Aluminium Foil: फॉयल छोड़िए, रोटियां पैक करने का यह देसी जुगाड़ है सबसे सेफ
Aluminium Foil, घर से ऑफिस, स्कूल या सफर के लिए टिफिन पैक करते समय हम में से ज्यादातर लोग रोटियां एल्यूमिनियम फॉयल में लपेट देते हैं। यह आसान लगता है, रोटियां गर्म भी रहती हैं और टिफिन साफ-सुथरा भी रहता है।
Aluminium Foil : रोज फॉयल में रोटियां पैक करती हैं? अब बदलें ये आदत
Aluminium Foil, घर से ऑफिस, स्कूल या सफर के लिए टिफिन पैक करते समय हम में से ज्यादातर लोग रोटियां एल्यूमिनियम फॉयल में लपेट देते हैं। यह आसान लगता है, रोटियां गर्म भी रहती हैं और टिफिन साफ-सुथरा भी रहता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि यह छोटी-सी आदत धीरे-धीरे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है? अगर आप भी रोजाना फॉयल में रोटियां पैक करती हैं, तो अब संभल जाना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि एक देसी जुगाड़ है, जो आपकी सेहत भी बचाएगा और रोटियां भी नरम रखेगा।
एल्यूमिनियम फॉयल में रोटियां क्यों हो सकती हैं खतरनाक?
एल्यूमिनियम फॉयल देखने में जितना सेफ लगता है, उतना है नहीं। खासकर जब इसमें गरम रोटियां लपेटी जाती हैं।
1. एल्यूमिनियम का खाने में घुलना
जब गरम खाना एल्यूमिनियम फॉयल के संपर्क में आता है, तो फॉयल से एल्यूमिनियम के कण खाने में मिल सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा खाना सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है।
2. पाचन से जुड़ी समस्याएं
कुछ रिसर्च के मुताबिक ज्यादा एल्यूमिनियम शरीर में जाने से
- गैस
- अपच
- पेट दर्द
- कब्ज
जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
3. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
बच्चों का डाइजेशन सिस्टम और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। ऐसे में एल्यूमिनियम फॉयल में पैक रोटियां ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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क्या रोज इस्तेमाल से बढ़ सकता है बड़ा खतरा?
कई लोग सोचते हैं कि “थोड़ा-सा फॉयल क्या नुकसान करेगा?” समस्या तब होती है जब यह रोज की आदत बन जाती है। धीरे-धीरे शरीर में एल्यूमिनियम जमा हो सकता है, जो आगे चलकर हड्डियों, किडनी और दिमाग से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकता है।
अब जानिए वो देसी जुगाड़, जो बचाएगा आपकी सेहत
हमारी दादी-नानी के जमाने में न एल्यूमिनियम फॉयल था, न प्लास्टिक। फिर भी रोटियां घंटों तक नरम रहती थीं। आइए जानते हैं वही देसी और सेफ तरीके।
1. सूती कपड़े में रोटियां लपेटें
यह सबसे आसान और सेहतमंद तरीका है।
कैसे करें?
- साफ सूती रुमाल या पतले कपड़े में रोटियां लपेटें
- फिर टिफिन में रखें
फायदे:
- रोटियां नरम रहती हैं
- पसीजती नहीं
- कोई केमिकल संपर्क नहीं
2. केले या साल के पत्ते का इस्तेमाल
आज भी कई गांवों में यह तरीका अपनाया जाता है।
फायदे:
- पूरी तरह नेचुरल
- रोटियों में हल्की खुशबू
- सेहत के लिए सुरक्षित
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3. स्टील या पीतल का टिफिन
अगर आप रोज टिफिन ले जाती हैं, तो स्टील या पीतल का डिब्बा सबसे बेस्ट है।
- गरमी ज्यादा देर तक रहती है
- कोई हानिकारक रिएक्शन नहीं
- लंबे समय तक टिकाऊ
4. घी का देसी जुगाड़
रोटियों को पैक करने से पहले उन पर हल्का-सा देसी घी लगा दें।
फायदे:
- रोटियां सूखती नहीं
- स्वाद बढ़ता है
- पाचन भी बेहतर होता है
5. मिट्टी का टिफिन (अगर उपलब्ध हो)
आजकल फिर से मिट्टी के बर्तनों का चलन बढ़ रहा है।
- तापमान संतुलित रहता है
- खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू बनी रहती है
- पूरी तरह केमिकल फ्री
क्या कभी-कभार फॉयल इस्तेमाल करना ठीक है?
अगर बहुत मजबूरी हो तो कभी-कभार एल्यूमिनियम फॉयल का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन
- सीधे गरम रोटी न लपेटें
- पहले सूती कपड़े में लपेटकर फिर फॉयल का इस्तेमाल करें
टिफिन पैक करते समय रखें ये जरूरी बातें
- रोटियां बहुत ज्यादा गरम न हों
- प्लास्टिक और फॉयल से बचें
- नेचुरल मटीरियल को प्राथमिकता दें
- बच्चों के टिफिन में खास ध्यान रखें
एल्यूमिनियम फॉयल में रोटियां लपेटना भले ही आसान लगे, लेकिन सेहत के लिहाज से यह सही आदत नहीं है। अगर आप चाहती हैं कि परिवार स्वस्थ रहे, तो आज से ही यह छोटी-सी आदत बदल लें।
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