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कोरोना से जंग के लिए इन देशों ने शुरू किया बच्चों का टीकाकरण, जाने भारत में कब से शुरू होगा

जाने क्यों बच्चों को टीकाकरण से बाहर रखा गया है


पिछले साल से फैला हुआ कोरोना वायरस आज भी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है पहले कोरोना की पहली लहर आई जिसमे लाखों लोगों की जान चली गयी। उसके बाद लोगों को लगा साल 2021 में उन्हें इस कोरोना वायरस से छुटकारा मिलेगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस साल भी कोरोना वायरस ने अपना कहर बरकरार रखा। इस बार हम सभी लोगों को कोरोना की दूसरी लहर का सामना करना पड़ा है कोरोना महामारी की दूसरी लहर पहली वाली से भी ज्यादा खतरनाक है। इस कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान लोगों को वायरस में म्यूटेशन के कारण कोविड-19 से संबंधित कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा था। कोरोना की इस दूसरी लहर में सभी उम्र के लोगों में इसके लक्षण देखने को मिले थे। लेकिन इन सबके बीच अच्छी बात यह है कि अभी कोरोना की दूसरी लहर का असर लगभग थमता सा दिख रहा है। अब लोगों के मन में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर कई तरह के सवाल आ रहे है। कई रिपोर्ट्स ये दावा कर रही है कि तीसरी लहर का असर बच्चों में अधिक देखने को मिल सकता है। अगर हम विशेषज्ञों की माने तो उनके अनुसार वैक्सीनेशन ही इसका एकमात्र उपाय है जो लोगों को संभावित तीसरी लहर से सुरक्षित कर सकता है तो चलिए जानते है क्यों अभी देश में बच्चों को टीकाकरण से बाहर रखा गया है।

जाने किन देशों में बच्चों को दी जा रही है वैक्सीन

आपको बता दे कि अमेरिका में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की अनुमति मिलने के बाद मई के मध्य से ही 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को फाइजर वैक्सीन देने की शुरुआत की जा चुकी है। सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि कनाडा, जापान, चिली और इटली ने भी 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को फाइजर वैक्सीन लगाने की मंजूरी दे दी है। जबकि अभी दुबई और फिलीपींस ने सिर्फ आपातकालीन उपयोग के लिए इस वैक्सीन को मंजूरी दे दी है।

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जाने फाइजर वैक्सीन बच्चों के लिए कितनी असरदार है

आपको बता दे कि हाल ही में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार ‘वैज्ञानिकों ने फाइजर वैक्सीन के टीकाकरण वाले बच्चों में काफी असरदार प्रभाव देखे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार फाइजर वैक्सीन के दोनों डोस लेने के बाद बच्चों में वैक्सीन की प्रभाविकता 100 फीसदी के करीब देखी गई है। वैज्ञानिकों द्वारा 2,260 बच्चों पर किए गए अध्ययन में पाया कि फाइजर वैक्सीन लेने के बाद बच्चों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।

जाने भारत में कब से शुरू होगा बच्चों का टीकाकरण

आपको बता दे कि भारत में वैक्सीन डे से ही बायोटेक ने बच्चों पर परीक्षण करना शुरू किया है। वही दूसरी तरफ कुछ मीडिया रिपोर्टस में दावा किया है कि जाइडस कैडिला कंपनी को भी बच्चों के वैक्सीन निर्माण करने का काम मिल सकता है। वही कुछ रिपोर्टस का दावा है कि फाइजर ने हमारे देश में अपनी वैक्सीन लाने के लिए भारतीय सरकार के साथ बातचीत की।  जिससे की अन्य देशों की तरह हमारे देश में भी बच्चों का टीकाकरण हो सकें। अभी भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि हमारे देश में भी बच्चों की वैक्सीन सितंबर-अक्टूबर तक उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है।

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कोरोना से रिकवर करने के बाद आप कब लगवा सकते हैं वैक्सीन?


जाने कोरोना से रिकवर करने वाले लोग कब और कैसे लगवाएं वैक्सीन?


पिछले साल से फैला हुआ कोरोना वायरस आज भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है अभी हमारे देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है। जिसने पुरे देश में कोहराम मचाया हुआ है। लेकिन इस बार तो हमारे देश में इस वायरस से बचने के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिसे पहले 45+ वाले लोगों के लिए शुरू किया गया था लेकिन अभी हाल ही में 1 मई से टीकाकरण अभियान 18+ के लोगों के लिए भी खोल दिया गया है। अभी हमारे देश में हर रोज लाखों लोग इस कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे है। ऐसे में अभी कोरोना से रिकवर होने वाले लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि वे कब और कैसे वैक्सीन लगवा सकते हैं? क्योकि अभी कोरोना से रिकवर होने वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन के कोई भी खास निर्देश नहीं है। तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बतायेगे।

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जाने कब और कैसे लगवाएं वैक्सीन

सफदरजंग हॉस्पिटल के कम्यूनिटी हेड जुगल किशोर जी का कहना है कि कोरोना से रिकवर करने वाले लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए कम-से-कम 6 हफ्तों का इंतजार करना चाहिए। उसके बाद उन्होंने बताया, अगर कोई व्यक्ति कोरोना से रिकवर हुआ है और उसने कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लगावाया है तो उसे दूसरे डोज के लिए 6 हफ्तों का इंतजार करना चाहिए। डाक्टर जुगल किशोर जी के अनुसार जिस दिन कोरोना से रिकवर हुए व्यक्ति के शरीर से कोरोना के लक्षण खत्म हो जाते हैं उसके बाद वो 6 से 8 हफ्तों के बाद कोरोना का टीका लगवा सकता है। और आपको बता दे कि कोरोना से रिकवर करने वाले लोगों की टीकाकरण प्रक्रिया भी आम लोगों के टीकाकरण प्रक्रिया की तरह ही होती है।

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6 हफ्तों से पहले वैक्सीन लगाने के नुकसान

अगर आप कोरोना से रिकवर होने के तुरंत बाद ही वैक्सीन लगवाते है तो आपके शरीर में एंटीबॉडी बनने में दिक्कत होगी। डाक्टर जुगल किशोर ने बताया कि जब भी कोई मरीज कोरोना से रिकवर हो जाता हैं तो उनके शरीर में एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। और वैक्सीन भी शरीर में जाकर एंटीबॉडी बनाती है लेकिन अगर आपके शरीर में रिकवर होने के कारण एंटीबॉडी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है और ऐसे में आप कोरोना की वैक्सीन भी ले लेंगे तो आपको दिक्कत हो सकती है। अगर आप बिना 6 हफ्तों का इंतजार किये वैक्सीन लगवाएंगे तो वो आपके शरीर में जाकर अपना काम करने में असमर्थ होगी।

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वैक्सीन लगवाने के बाद भी बरते सावधानी

इन सारी चीजों के साथ ही डॉक्टर जुगल किशोर कहते है कि जो भी लोग कोरोना वैक्सीन के लिए जा रहे है। उनके लिए भी वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करना बेहद जरूरी है। क्योकि अक्सर लोगों को लगता है कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद वह सुरक्षित है लेकिन ऐसा नहीं है। वैक्सीन लगवाने के 2 से 6 हफ्ते के बाद व्यक्ति सुरक्षित होता है। अगर कोई व्यक्ति वैक्सीन लगवाने के बाद भी संक्रमण के संपर्क में आता है तो उसके संक्रमित होने का खतरा रहता है। इसलिए सभी लोगों के लिए बेहद जरूरी है कि वो वैक्सीन लगगवाने के बाद भी कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करें।

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