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डीएमआरसी ने 26 जनवरी को लेकर जारी की एडवायजरी, बंद रहेंगे कुछ मेट्रो स्टेशन

जाने कोरोना संकट के बीच कैसे हो रही है 72वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां


जैसा की हम जानते है कि लम्बे समय से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कोरोना वायरस से परेशान है इसी बीच अभी हमारे देश में कोरोना संकट के बीच 72वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर है.  इस साल कोरोना संकट के कारण साल आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन के सामने भी 72वें गणतंत्र दिवस समारोह के सुरक्षित आयोजन की चुनौती है. इस बार पुरे देश में गणतंत्र दिवस को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की जा रही है. हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली पुलिस गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जुटी है. इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस के अलावा दिल्ली मेट्रो ने भी गणतंत्र दिवस समारोह के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खास तैयारियां की हैं. साथ ही साथ डीएमआरसी ने यात्रियों के लिए एडवायजरी भी जारी की है.

 

जाने कब से कब तक बंद रहेंगे मेट्रो स्टेशन

डीएमआरसी यानि की दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने कहा है कि अभी सभी मेट्रो पार्किंग लॉट 25 जनवरी सुबह 6 बजे से लेकर 26 जनवरी दोपहर 2 बजे तक बंद रहेगी.  इतना ही नहीं दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने ट्वीट करके प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के बारे में भी कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के ट्वीट के मुताबिक केन्द्रीय सचिवालय और उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन गणतंत्र दिवस यानि की 26 जनवरी को दोपहर 12 बजे तक बंद रहेगी. साथ ही साथ डीएमआरसी ने बताया कि दोपहर 2 के बाद भी यात्री केन्द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन को केवल लाइन 2 और लाइन 6 के बीच इंटरचेंज के रूप में ही इस्तेमाल कर सकेंगे. डीएमआरसी बताया कि पटेल चौक और लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट गणतंत्र दिवस के दिन सुबह 8.45 बजे से दोपहर 12 बजे तक बंद रहेगी.  समयपुर बादली और हुडा सिटी सेंटर मेट्रो लाइन की सेवा 26 जनवरी को सिर्फ आंशिक तौर पर ही चालू रहेगी.

 

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जाने डीएमआरसी की एडवायजरी

 

1. डीएमआरसी के ट्वीट के मुताबिक सेंट्रल सचिवालय स्टेशन का उपयोग गणतंत्र दिवस के दिन यात्री सिर्फ इंटरचेंज लाइन 2 और लाइन 6 के लिए कर सकते है।

 

2. गणतंत्र दिवस के दिन सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12 बजे तक पटेल चौक और लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशन पर प्रवेश और निकास बंद रहेंगे।

 

3. समयपुर बादली और हुडा सिटी सेंटर मेट्रो लाइन की सेवा 26 जनवरी को सिर्फ आंशिक तौर पर ही चालू रहेंगी।

 

4. केंद्रीय सचिवालय और उद्योग भवन मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास 26 जनवरी को दोपहर 12 बजे तक बंद रहेगा।

 

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आज आजाद मैदान में जुटेंगे हजारों किसान, जाने आंदोलन से जुडी महत्वपूर्ण बाते

जाने किसान आंदोलन के लेटेस्ट उपदटेस


26 नंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन को कल पूरे दो महीने हो जायेगे. दिल्ली में चल रहे किसानों और केंद्र सरकार के बीच का आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अभी दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए और केंद्र सरकार को विरोध जताने के लिए आज महाराष्ट्र के किसान भी मुंबई के आजाद मैदान में इकट्ठा होने वाले हैं.  महाराष्ट्र राज्य के कोने-कोने से किसानों का जत्था मुंबई के आजाद मैदान में इकट्ठा होगा.  कल शाम यानि कि रविवार की शाम को ही हज़ारों की तदाद में किसान मुंबई के आजाद मैदान में पहुंच चुके हैं और अभी भी किसानों के आने का सिलसिला जारी है. इतना ही नहीं कड़कड़ाती ठंड में तंबू के नीचे बैठे किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए किसान महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक नृत्य भी किया.  तो चलिए आज हम आपको किसान आंदोलन से जुडी कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण बातें बतायेगे.

 

जाने किसान आंदोलन से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बाते

1. अब तक दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन की लहर दिल्ली से मुंबई पहुंची चुकी है. नए कृषि कानूनों के खिलाफ मुंबई के आजाद मैदान में सैकड़ों की संख्या में किसान जमा हो गए हैं.

 

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2. नए कृषि कानूनों के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य के कोने-कोने से किसानों का जत्था मुंबई के आजाद मैदान में इकट्ठा हुआ और आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं होंगे किसानों का आंदोलन नहीं रूकेगा.  इतना ही नहीं आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि आज की रैली करने के बाद राज्यपाल को ज्ञापन देने जाएंगे.

 

3. किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के नेता सुखविंदर सिंह ने सभरा में कहा कि शर्तों के साथ रैली निकालने की बात को हम नामंजूर करते है और फिर उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे वो पुलिस के साथ बैठक करेंगे. जिसके बाद तय किया जाएगा कि कौन से रूट पर रैली निकालनी है और कितने बजे रैली निकलनी है.  सुखविंदर सिंह ने कहा कि 12 बजे रैली निकालने का कोई तुक नहीं बनता.

 

4. आज सुबह 11 बजे नए कृषि कानूनों के खिलाफ मुंबई के आजाद मैदान में किसानों की रैली हुई. इस रैली को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार और महा विकास अघाडी के कुछ प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया. शरद पवार के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट, पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे भी रैली को संबोधित किया.

 

5. आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस समारोह के बाद ट्रैक्टर परेड की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में एक परिपत्र जारी किया है.  इसमें उन्होंने कहा पुलिस कर्मियों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था की जानी चाहिए और उनके जोनल अधिकारियों के तहत ड्यूटी के उनके बिंदुओं पर तैयार रहना चाहिए.

 

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आज किसान आंदोलन का 50 दिन, क्या आज निकलेगा कोई समाधान, जानें आंदोलन से जुड़ी कुछ अहम बातें

आज किसान संगठनों और सरकार के बीच होगी नवें चरण की बातचीत


कृषि के नये कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा शुरू किये गए आंदोलन का आज 50 दिन है. अभी तक कृषि के नये कानूनों को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच आठ चरणों में बातचीत हो चुकी है.  लेकिन आज तक मुद्दे का कोई हल नहीं  निकल सका है.  परन्तु इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने कानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन कर दिया है. जिसका अभी किसान संगठन विरोध कर रहे हैं.  जिसको लेकर आज यानि कि शुक्रवार को एक बार फिर सरकार और किसानों के बीच बातचीत होनी है.  अभी सरकार और किसानों के बीच नवें चरण की बातचीत के बावजूद भी इस बात पर अनिश्चितता बनी
हुई है कि इस मुद्दे पर कोई हल निकलेगा या नहीं क्योंकि अभी तक किसान नेताओं ने इस बात पर जोर दिया हुआ है कि वो इन नए कानूनों को वापस लेने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे.

 

जाने किसान आंदोलन से जुडी कुछ अहम बातें

1. किसानों ने नवें चरण की बातचीत से पहले गुरुवार यानि कि कल कहा कि वे शुक्रवार को सरकार के साथ नौवें चरण की बातचीत का हिस्सा बने जा रहे है लेकिन उन्हें इस बातचीत की ज्यादा उम्मीद नहीं है कि कोई समाधान निकलेगा.क्योंकि वे इन कानूनों को वापस लिए जाने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे.

 

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2. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कृषि के नए कानूनों के खिलाफ डाली गई याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए, इन पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन किया था. लेकिन किसानों ने इसका विरोध किया है.

 

3. कल यानि की गुरुवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि उन्हें शुक्रवार को यानि की आज हो रही बातचीत से सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद है. हालांकि नरेंद्र सिंह तोमर पहले भी केंद्र सरकार की इन  बैठकों से हल निकलने की आशा जता चुके हैं.

 

4. ऐसा माना जाना रहा है कि आज किसान संगठनों की सरकार के साथ आखिरी बैठक हो। क्यो कि सुप्रीम कोर्ट की समिति की पहली बैठक 19 जनवरी को होने की संभावना है.

 

5. पिछले हफ्ते किसानों द्वारा ट्रैक्टर रैली निकाली गयी थी और किसानों ने कहा था कि अगर 26 जनवरी से पहले उनकी मांगें नहीं मानी जाएगी तो वो राजपथ पर होने वाली परेड के समानांतर अपनी बड़ी ट्रैक्टर रैली निकालेंगे. इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया था. अब इस पर सोमवार को सुनवाई होनी है.

 

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क्या होता है बीटिंग रिट्रीट ? जाने इस से जुड़े इतिहास के बारे में ?

यह है बीटिंग रिट्रीट से जुड़ी कुछ अहम बातें: 


बीटिंग रिट्रीट हर साल 29 जनवरी को मनाते है. जो गणतंत्र दिवस के समारोह की समाप्ति को दर्शाता है. साथ ही इस समारोह में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड अलग- अलग धुन बजाते हुए मार्च करते हैं. बीटिंग रिट्रीट का यह समारोह हर साल रायसीना हिल्स पर मनाया जाता है.

 सबसे पहले जानते है की क्या है बीटिंग रिट्रीट ?

बीटिंग रिट्रीट जो है वो हर साल 26  जनवरी के तीन दिन बाद यानी की 29 जनवरी को रायसीना हिल्स पर शाम 6  बजे से मनाया जाता है। जिसके चीफ गेस्ट होते है देश के राष्ट्रपति. यह समारोह देश के गौरव को झलकाता है.जिसमे तीनों सेनाएं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स सेना  एक साथ मिलकर  बैंड और अलग- धुन  बजाते है।  इसके अलावा परेड भी करते है और राष्ट्रपति को सलामी देते है.

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साथ ही इसकी तैयारियाँ 26 जनवरी से ही शुरू हो जाती है जब राष्‍ट्रपति भवन समेत सरकारी भवनों को भी अच्छी तरह सजाया जाता है. वही इस समारोह का समापन  ‘सारे जहां से अच्‍छा गाने’ की धुन के साथ खत्म किया जाता है. जिसे 26  जनवरी यानी  गणतंत्र दिवस के समारोह की समाप्ति को सूचक कहा जाता है. ऐसा भी कहा जाता है की जब युद्ध के दिनों सेना शाम को युद्ध विराम करती थी, तब सेना के बैंड उनके लिए संगीतमय कार्यक्रम आयोजित करते थे. इसे ही बीटिंग रिट्रीट कहते थे.

अब जानते है बीटिंग रिट्रीट से जुड़े इतिहास के बारे में ?

बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत साल 1950 में इंडियन आर्मी के मेजर रॉबर्ट  के द्वारा की गई थी.साथ ही इसे पहले ‘वॉच सेटिंग’ भी कहा जाता था  और यह सूर्य के अस्त  होने के समय पर मनाया जाता है. बीटिंग समारोह को इतिहास में दो बार रद्द भी किया गया है पहले 2001 को जब गुजरात मे भूकंप आया था और दूसरी बार तब जब  2009 को देश के आठवें राष्ट्रपति वेंकटरमन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो हुआ था.

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