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26/11 Mumbai Attack को हुए 11 साल, आज भी ताज़ी है उस शाम की यादें

26/11 Mumbai Attack : 11 साल पहले दहली थी मुंबई


 

MORE THAN A DECADE TO 26/11

जब भी 26 नवंबर 2008 की बात होती है तो अपने आप लोगो को मुंबई के उस आतंकी हमले की याद आ जाती है जिसने पुरे देश को हिला कर रख दिया था। ये वो तारीख जिसने पुरे देश को दहला कर रख दिया था। इस दिन मुंबई शहर में हर तरफ दहशत और मौत दिखाई दे रही थी। आज  इस हमले को 11 साल हो चुके है, लेकिन इसकी डरावनी यादें आज भी हमारे ज़ेहन से गई नहीं है। 10 आतंकवादी के करीब 60 घंटे तक मुंबई डरा कर रहते हुए 164 निर्दोष लोगो की जान ली थी।

दिल दहलाने वाली शाम:

हमेशा की तरह 26 नवंबर 2008 की शाम  को भी मुंबई अपबने शबाब पर थी, यह शाम ख़त्म ही होने वाली थी की शहर  के एक कोने से गोलियों की आवाज़ आना शुरू होगी। इस हमले की शुरुवात  लियोपोल्ड कैफे और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से हुई थी। पहले तो ऐसा कोई अंदाज़ा नहीं था की  यह हमला इतना बड़ा होने वाला है, लेकिन धीरे-धीरे मुंबई की अलग – अलग जगह से हमले  की खबर आने लगी।  आधी रात तक मुंबई में आतंक का असर नज़र आने लगा।

ताज में चली सबसे लम्बी लड़ाई:

26 नवंबर की रात में ही आतंकियों ने अपना रुख पूरी तरह से ताज होटल की तरफ मोड़ लिया था। यहां आतंकियों ने कई लोगो को बंधक बना कर रखा हुआ था, जिनमें सात विदेशी नागरिक भी शामिल थे  और इसके साथ ही ताज होटल के हेरीटेज विंग में भी आग लगा दी गई थी।  27 नवंबर की सुबह एनएसजी के कमांडो आतंकवादियों का सामना करने पहुंच चुके थे।  सबसे पहले होटल ओबेरॉय में लोगो को मुक्त कराकर ऑपरेशन 28 नवंबर की दोपहर को खत्म हुआ था, और उसी दिन शाम तक नरीमन हाउस के आतंकवादी भी मारे गए थे।  लेकिन होटल ताज के ऑपरेशन को उसके अंजाम तक पहुंचाने में 29 नवंबर की सुबह तक का वक्त लग गया था।

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शामिल थे 10 आतंकवादी

मुंबई हमले की पूरी राजनीती देख कर इस हमले के पीछे कितने आतंकवादी  थे  इसका अंदाज़ा लगना काफी मुश्किल था। लेकिन हमले के खत्म होने के बाद और कसाब के हिरासत में आने के बाद ये साफ़ होगया की इस हमले में 10 आतंकवादी शामिल थे ,उन्हें पाकिस्तान मे  ट्रेनिंग दी गई थी। उसके बाद वो आतंकी 26 नवंबर को एक बोट से समंदर के रास्ते भारत में घुसे थे।  पुलिस ने जली हुई बोट को भी बरामद कर लिया था।

शहीद हुए 11 जवान:

मुंबई के आतंकी हमले को नाकाम करने के अभियान में मुंबई पुलिस, एटीएस और एनएसजी के 11 जवान शहीद होंगे थे।  इनमें एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक कामटे, एसीपी सदानंद दाते, एनएसजी के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसआई विजय सालस्कर, इंसपेक्टर सुशांत शिंदे, एसआई प्रकाश मोरे, एसआई दुदगुड़े, एएसआई नानासाहब भोंसले, एएसआई तुकाराम ओंबले, कांस्टेबल विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अंबादोस पवार और एम.सी. चौधरी शामिल थे। इसके अलावा इस हमले में 137 लोगों की मौत हो गई थी जबकि लगभग 300 लोग घायल हो गए थे।

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पाकिस्तान में दुल्हन ने पहने टमाटर के गहने: कब तक यू ही गुस्से मे लाल रहेगा टमाटर, भाव पहुंचा 300 के पार

Tomato prices in Pakistan: जानिए!! पाकिस्तान में किस भाव बिक रहे है टमाटर


Tomato prices in Pakistan: पाकिस्तान में टमाटर की कीमत 320 रुपए तक पहुंच गई है। इससे दिक्कत की बात यह है की अब टमाटर के चोरी होने की भी खबरे आने लगी है। यही वजह है कि किसानों के लिए टमाटर बेशकीमती हो चुके है। प्रधानमंत्री इमरान खान के आर्थिक सलाहकार डॉक्टर अब्दुल हफीज ने दावा किया था कि कराची में टमाटर 17 रुपए किलो हैं और इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका जम कर मजाक उड़ा था।

टमाटर की चोरी:

शुक्रवार को कराची की थोक मंडी में टमाटर 320 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकेऔर वही  सिंध में टमाटर की फसल सबसे ज़्यादा ख़राब हुई थी। लेकिन, खेतों पर लुटेरों की नजर है। टमाटर लूट की कुछ घटनाएं हुईं तो किसान सतर्क हो गए है। एक न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, टमाटर सुरक्षा के लिए किसानों ने अपने खर्च पर हथियारबंद गार्ड तैनात कर दिए हैं। बादिन जिले के किसान लूट की घटनाओं के प्रति ज्यादा आशंकित हैं।

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बाकी सब्जियों के दाम छू रहे है आसमान:

सिर्फ टमाटर ही नहीं  लौकी और दूसरी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। लौकी यहां 170 रुपए किलोग्राम तक बिक रही है। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉक्टर अब्दुल हफीज के बयान ने अवाम के जख्मों पर नमक छिड़क दिया है। उन्होंने कहा है की  कराची में टमाटर का भाव 17 रुपए प्रति किलो है। मीडिया ने उनसे पूछा कि आप जगह या मंडी का नाम बताएं, जहां इस सब्जी का यह दाम है। इस पर हफीज गोलमोल जवाब देने लगे। लोगों की नाराजगी से घबराई सरकार ने ईरान से टमाटर आयात करने का आदेश दिया है । एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयात होने बावजूद टमाटर 150 रुपए किलो से कम नहीं हुआ है।

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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव की किस्मत का फैसला, आमने सामने होंगे भारत-पाक

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव की किस्मत का फैसला, आमने सामने होंगे भारत-पाक


अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में आज यानि 17 जुलाई, 2019 भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से जुड़े मामले में बुधवार को सुनवाई होगी। आज शाम साढे छह बजे नीदरलैंड में द हेग के ‘पीस पैलेस’ में सार्वजनिक सुनवाई होगी जिसमे अदालत के प्रमुख न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ कुलभूषण जाधव की किस्मत का फैसला सुनाएंगे।

कौन हैं कुलभूषण जाधव?

कुलभूषण सुधीर जाधव का जन्म 16 अप्रैल 1970 महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। इनके पिता मुंबई पुलिस के एक काबिल अफसर थे। 1987 में कुलभूषण ने डिफेन्स अकैडमी को ज्वाइन किया था। इसके बाद इन्होने 1991 में नौसेना के इंजिनियरिंग विभाग में जॉब की थी। कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी थे। जाधव ने 14 वर्ष पहले अपनी इच्छा के अनुसार सेनावृत्ति ले ली थी।

22 महीने पहले तीन मार्च, 2016 को कुलभूषण तब सुर्ख़ियों में आये जब पाकिस्तान ने उनको एक जासूस बताते हुए कैद कर लिया था। पाकिस्तान ने कुलभूषण को रॉ का एजेंट बताते हुए बलूचिस्तान से कैद करने की बात को सामने रखा था। पाकिस्तान ने कुलभूषण पर हुसैन मुबारक पटेल नाम का पासपोर्ट जब्त होने का दावा भी किया था।

 

पाक सरकार द्वारा कुलभूषण को फांसी की सजा

अप्रैल 2017 में पाकिस्तानी की सैन्य अदालत ने भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को एक बंद कमरे में सज़ा सुनाई थी। इस सुनवाई के दौरान कुलभूषण को ‘‘जासूसी और आतंकवादी ’’ करार कर दिया गया था। इन्ही आरोपों की वजह से कुलभूषण को मौत की सजा सुनाई थी। पाकिस्तान में उन पर ईरान में कथित रूप से घुसने का आरोप भी लगाया गया था।

पाकिस्तान अदालत द्वारा जाधव को दबाव देकर एक कबूलनामे पर ‘‘जासूसी और आतंकवादी” होने का दावा करके उनसे हस्ताक्षर करवा लिए गए थे। कुलभूषण को मौत की सजा सुना दी गयी थी जिसकी भारत सरकार ने काफी निंदा की और आईसीजे (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस) के दरवाज़े खटखटाएं।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और वियना संधि के प्रावधान

भारत सरकार ने 8 मई 2017 को वियना संधि के प्रावधानों का उल्लंघन होने की बात पर जोर देते हुए आईसीजे से इस मामले पर दखलंदाजी करने को कहा। इस मामले ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस पहुंचने के बाद से तूल पकड़ लिया। भारत ने नयी दिल्ली को जाधव तक राजनयिक पहुंच देने से बार बार इंकार करके पाकिस्तान के द्वारा वियना संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करने की बात कही और इस मामले में अपना पक्ष रखा।

18 मई 2017 को आईसीजे की दस सदस्यीय पीठ की बैठक हुई जिसमे भारत और पाकिस्तान आमने सामने आये। इस सुनवाई के दौरान भारत और पाकिस्तान ने अपना-अपना पक्ष रखा। इस सुनवाई के बाद जाधव की मौत की सजा रोक दी गई।

आईसीजे में , भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपना अपना पक्ष रखा था और जवाब दिये थे। इस मामले में भारत की तरफ से हरीश साल्वे ने इस मामले की पैरवी की। उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए पाकिस्तान की सैन्य अदालतों के निर्णयों और कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ कुलभूषण पर दबाव डालकर कबूलनामे पर हस्ताक्षर करने की बात को भी सामने रखा। इसी बीच उन्होंने कुलभूषण की मौत की सजा को निरस्त करने के लिए आईसीजे से अनुरोध किया था।

 

आखिरी फैसला क्या हुआ था

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जब यह मामला आया था तो इस पर 21 फरवरी, 2019 को एक ओर बैठक हुई थी। न्यायाधीश यूसुफ की अध्यक्षता में आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ की बैठक में भारत और पाकिस्तान के पक्ष सुनने के बाद इस मामले पर फैसला आज के दिन सुनाने के लिए रोक दिया गया था।

आज दो साल और दो महीने बाद इस मामले का फैसला हो जायेगा।

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पाकिस्तान में रमज़ान के समय पर दरगाह में हुआ बड़ा बम धमाका

24 से ज्यादा लोग हुए घायल


पुलवामा अटैक के बाद से देश में आतंकी हमले तेज़ी से बढ़ गए है.जी हाँ,अभी हाल ही में श्रीलंका में ईस्टर डे के दिन हुए 8  बड़े बम धमाके से  लोग अभी तक डर से सहमे हुए है तो वही दूसरी और आज पाकिस्तान में रमज़ान के समय पर आतंकी द्वारा बड़ा बम धमाका किया गया है. जिसमे 8 लोगों की मौत हुई है इनमे 5 पाकिस्तान पंजाब पुलिस के एलीट फोर्स के कमांडो हैं, जबकि एक सुरक्षा गार्ड है साथ ही 24 लोगो के घायल होने की खबर आ रही है.

बता दे कि यह बड़ा धमाका लाहौर स्थित दाता दरबार दरगाह के बाहर हुआ है जो की एक सूफी दरगाह है.जहाँ लोग सुबह नमाज़ पढ़ने आये थे इस बड़े बम धमाके में  मरने वालो की  संख्या अभी और बड़ सकती है.वही इस हमले में घायल हुए लोगों को मयो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 7-8 घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है.

2010 में भी हुआ था इसी जगह बम धमाका

ऐसा पहली बार नहीं है जब रमज़ान के समय पर बम  धमाका  किया गया है इससे पहले भी यहाँ पर 2010 में भी बड़ा हमला हुआ था, जिसमें कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. आज इस  धमाके में अभी तक 24  लोगो  के घायल होने की खबर आ रही है.

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वही यह धमाका आज सुबह दाता दरबार के गेट नंबर-2 के बाहर सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर हुआ है और इस बड़े धमाके के ज़रिये  पाकिस्तान पंजाब की एलीट फोर्स के कमांडो को निशाना बनाया गया. जिसमे 5 कमांडो, एक सुरक्षा गार्ड समेत 8 लोगों की मौत हुई है.  फ़िलहाल अभी दाता  दरगाह को चारो तरफ से घेर लिया गया है और हमले की जांच चाल रही है जिसमे यह पता चल जायेगा की इस हमले में किस आतंकी संगठन का हाथ है.

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पॉलिटिक्स भारतीये पॉलिटिक्स

जेनेवा संधि क्या है और यह किन पर लागू होता है ?

जाने जेनेवा संधि से जुड़ी यह कुछ ख़ास बातें ?


इस बात से सभी वाकिफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में कितना तनाव का माहौल बना हुआ. हाल ही में हुए पुलवामा अटैक के बाद भारत ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कड़ी कूट निति अपनाई है . जिसमे हमारी भारतीय वायुसेना ने पाक के आतंकी कैंपो पर हमला किया और उनके 300 आतंकियों को मार गिराया.उसके बाद से पाकिस्तान में बौखलाहट मच गई है .

वहीं भारत की और से किए गए एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक के जरिए भारत के जवान के कैंपो को अपना निशाना बनाया जिसमे वह नाकाम रहे लेकिन पाक का एक जेट F- 16 क्रैश हो गया जो कि  भारत में गिरा , वही भारत का भी एक जेट MIG – 21 क्रैश हुआ जो कि पाक्सितान में गिरा लेकिन उसमे बैठे पायलट अभिनन्दन पाक की आर्मी के गिरफ्त में आ गये. लेकिन जेनेवा संधि के मुताबिक पाकिस्तान की आर्मी पायलट अभिनन्दन के साथ ही नहीं बल्कि किसी भी युद्धबंदियों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं कर सकती. तो क्या है जेनेवा संधि एक बार जान ले ?

जाने जेनेवा संधि से जुडी यह कुछ ख़ास बातें ?

जेनेवा संधि जो है वो युद्धबंदियों के अधिकारों की रक्षा करता है. साथ ही इस संधि का उद्देश्य है युद्ध के वक्त मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना. आपको बता दे की जेनेवा कन्वेंशन में मानवता को बरकरार रखने के लिए चार संधिया शामिल की गयी थी. पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 और तीसरी संधि 1929 में हुई. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी.

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साथ ही इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास के मुताबिक जेनेवा संधि में युद्ध के दौरान गिरफ्तार सैनिकों और घायल लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना है इसको लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं. इसमें साफ तौर पर ये बताया गया है कि युद्धबंदियों के क्या अधिकार हैं.

यहाँ जाने की जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों के क्या अधिकार है ?

1 . इस संधि के तहत जो युद्धबंदि है उनका अच्छे से ध्यान दिया जाना चाहिए, यानी कि उनको खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाए.

2. साथ ही उनके साथ किसी भी तरह का अमानवीय बर्ताव न किया जाए.

3. चाहे वो सैनिक पुरुष हो या स्त्री दोनों पर ही यह जेनेवा संधि लागू होती है.

4. इसमें आप युद्धबंदियों से उनकी जाति, धर्म या किसी भी बारे में नहीं पूछ सकते.

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मनोरंजन एजुकेशन

URI:The Surgical Strike Movie Review: विक्की कौशल अपने अभिनय के लिए लूट रहे है वाह- वाही!

जाने क्या था सर्जिकल स्ट्राइक? विक्की कौशल का बेहतरीन अभिनय दिला सकता है फिल्म को बड़ी सफलता 


सर्जिकल स्ट्राइक सेना के द्वारा किया जाने वाला एक विशेष प्रकार का हमला होता है यह हमला पूरी तरह गुप्त होता है. इस हमले की सूचना  कुछ चुनिंदा लोगो को ही होती है और इस हमले में सबसे पहले रणनीति तैयार की जाती है. इसमें समय, कमांडोज की संख्या, किस जगह पर हमला किया जायेगा इन बातो का विशेष ध्यान रखा जाता है. हमले के  दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि जिस स्थान को टारगेट किया जायेगा वहीं पर हमला हो. साथ ही सिविलियन इलाकों को कोई नुकसान ना हो. इससे पब्लिक प्लेस, या आम जनताम और उसके उपयोग से साधनों को कोई नुकसान ना पहुंचे और इस प्रकार के आक्रमण में अगर वायु-बल का इस्तेमाल किया जाता है तो उसमें भी यह कोशिश की जाती है कि सटीक बमबारी की जाए जिसमें आस-पास की सुविधाएँ कम से कम क्षतिग्रस्त हों.

भारत और पाकिस्तान के रिश्तो की बारे में तो पूरी दुनिया जानती है पाकिस्तान ने किस तरह भारत की दोस्ती का जवाब पीछे से वॉर कर के दिया है कई बार पाकिस्तान ने भारत की LOC में  घुसपैठ करने की कोशिश  और कई बार भारत ने इसे नजरअंदाज किया पर पाकिस्तान ने भारत के शांत रहने और नजरअंदाज करने का फायदा उठाया। एक बार फिर पाकिस्तान ने 18 सितंबर को उरी में  घुसपैठ की. जिसमे कई भारतीय सैनिक और भारतीय लोग  मारे गए इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा कदम उठाने  का फैसला लिया उसके बाद हुआ सर्जिकल स्ट्राइक

सर्जिकल स्ट्राइक 28-29 सितंबर को भारतीय सेना द्वारा किया गया था. ये उरी हमले के खिलाफ पाकिस्तान के लिए मुँह तोड़ जवाब था 18 सितंबर को चार भारी हथियारों से लैस आतकवादियो ने जम्मू कश्मीर के पास उरी गाँव में एक बड़ा हमला किया और ये हमला बहुत ही घातक था 18 सितंबर को सुबह 5:30 पर चार उग्रवादियों ने LOC पार कर के उरी में हमला किया 3 min में उन लोगो ने ग्रेनेड फैके थे इन लोगो ने सैनिकों के टैंट पर आग लगा दी और इसमें 17 जवान शहीद हुए थे चार उग्रवादियों और सेना के बीच ये फायरिंग 6 घटे तक चली इसके बाद भारतीय सेना ने उग्रवादियों को मार. इस में 17 जवान शहीद हुए और 25-30 को गहरी चोट आई.

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पाकिस्तान को उरी हमले का जवाब

उरी हमले का बदला लेने और पाकिस्तान को सबक सीखने की लिए भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक किया उरी हमले के बाद जब प्रधानमंत्री जब वॉर रूप में गए थे तो उसी दिन से सर्जिकल स्ट्राइक के तैयारी शुरू कर दी.  10 दिन की तैयारी के बाद ये ऑपरेशन किया गया और उरी हमले के ठीक 11 दिन बाद भारतीय सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक किया जिसमे 18 भारतीय सैनिक कश्मीर के उस हिसे गए जहाँ पाकिस्तान सेना तैनात रहती है. भारत ने बीती रात नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकी शिविरों पर सर्जिकल हमले किए जिनमें आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचा है और बुहत सारे आतंकवादी मारे गए हैं. सेना द्वारा आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए अचानक की गई इस कार्रवाई के बारे में घोषणा सैन्य अभियान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने आनन-फानन में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में की.

विक्की कौशल का दमदार अभिनय

विक्की कौशल की फिल्म आज बड़े परदे पर रिलीज़ हो गयी और उनका दमदार अभिनय लोगो को काफी लुभा रहा है. हाल ही में विक्की कौशल दिल्ली आये थे और उन्हने एक प्रेस  कांफ्रेंस  में बताया की उनकी फिलम उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक में काम करके काफी मज़ा आया और उन्होंने काफी कुछ सीखा भी.  आपको बता दे, यह इस साल के पहली बड़ी रिलीज़ मूवी है.

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विजय दिवस 2018: आखिर क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

यहाँ जाने की कैसे भारत ने पाकिस्तान पर पाई थी विजय?


विजय दिवस एक ऐसा दिन है जिसे कोई भी नहीं भूल सकता क्यूंकि इस दिन भारत और पकिस्तान के बीच हूआ युद्ध में कई जवान शहीद हुए और भारत ने 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आज़ाद कराया था । भारत की इस बड़ी जीत को याद करते हुए हर साल विजय दिवस 16  दिसम्बर को मनाया जाता है.

यहाँ जाने आखिर ने इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान पर कैसे जीत पाई?

यह युद्ध 1971 मे शुरू हुआ था जब पाकिस्तान फौज गैर-मुस्लिम आबादी को निशाना बना  रहे थे जिसके बाद भारत ने यह खबर सुनकर  इस युद्ध में भाग लिया। यह युद्ध महज 14 दिन तक चला जिसमे 93 हजार पाक सैनिकों ने खुद को हथियारों समेत सरेंडर किया था. साथ ही इस युद्ध में भारत के 3 हजार  जवान  शहीद हो गए और कुछ घायल भी हुए थे. लेकिन यह युद्ध भारत के लिए ऐतिहासिक युद्ध रहा है इसलिए हर साल 16  दिसंबर को  विजय दिवस मनाया जाता है

बता दे की यह युद्ध तब हुआ था जब भारत में कांग्रेस की सरकार थी उस समय हमारी प्रधानमंत्री  इंदिरा गाँधी थी. उन्होंने जनरल मानेकशॉ की राय लेकर इस युद्ध में उन्हें जाने की अनुमति दी क्यूंकि तब पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों ने भारतीय वायु सीमा को पार करके पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर, आगरा आदि सैनिक हवाई अड्डों पर बम गिराना शुरू कर दिया था .

इसलिए  इंदिरा गाँधी ने तुरंत फैसला लेकर  जनरल मानेकशॉ को पूरी सेना के साथ युद्ध के लिए भेजा. भारतीय सेना ने युद्ध पर पूरी तरह से अपनी पकड़ बना ली और अंत में भारत को पाकिस्तान पर जीत हासिल हुई.

लेकिन भारत के जितने भी जवान इस युद्ध में शहीद हुए उनकी याद में यह दिन मनाया  जाता  है  ताकि  हर देशवासी के दिल में देशप्रेम को लेकर जो उमंग है  वो जिन्दा रहे.
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भारत

सार्क सम्मेलन पर मंडरा रहे हैं खतरे के बादल

 

इस साल भी नहीं हो सकता है सार्क सम्मेलन


 

पिछली साल की तरह इस साल भी सार्क सम्मेलन नहीं  होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि सभी सार्क सदस्य देशों ने आतंकवाद को लेकर एकजुटता दिखाई है। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सलाना बैठक के इतर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सार्क देशो को प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की।

इससे पहले यूएन के भाषण के दौरान भारतीय विदेश मंत्री आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही सार्क सम्मेलन को लेकर भारत की उदासीनता स्पष्ट की थी। ऐसे मे इस सम्मेनल का महत्व कम हो रहा है। क्योंकि भारत इसमें अहम रोल निभाता है।

विदेशमंत्री सुषमा स्वराज

सार्क सम्मेलन में अनिश्चता

भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों का असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ रहा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सार्क सम्मेलन की अनिश्चितताओं का जिक्र नहीं किया। लेकिन आतंकवाद को खत्म करने की प्राथमिकता पर बल दिया।

अपने भाषण के दौरान सुषमा स्वराज ने कहा था क्षेत्रीय समृद्धि, संपर्क और सहयोग केवल शांति और सुरक्षा के वातावरण में ही हो सकता है।  हालांकि दक्षिण एशिया में शांति को जोखिम में डालने वाले खतरे बढ़ रहे हैं। हम सबके लिए यह बेहद जरुरी है कि आतंक के सभी रुपों का खात्मा किया जाए और इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

पिछले साल नहीं हुई था सार्क सम्मेलन

आपको बता दें इससे पहले पिछले साल पाकिस्तान द्वारा आतंक का समर्थन किया था। जिसके बाद सभी सार्क के देशों ने इसका बहिष्कार किया। और किसी ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।

हिस्सा न लेने का दूसरी सबसे बड़ी वजह यह थी कि सम्मेलन पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाला था। सम्मेलन हर साल की तरह नवंबर में होने वाला था। और उम्मीद की जा रही है इस साल भी इस पर न होने के बादल मंडरा रहे हैं।

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ब्रिक्स सम्मेलन- नहीं चला पाकिस्तान का साथी, आंतकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई

10 आतंकी संगठन पर हुई चर्चा, ज्यादातर पाकिस्तान के


चीन के श्यामन में 9वां ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आतंकवाद का मुद्दा मुख्य रहा। पीएम मोदी ने जोरो-शोरों से सम्मेलन के आतंकवाद को मुद्दा उठाया। इतना ही नहीं पीएम आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी बात मनवाने में सफल रहे।

रुस प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी

ब्रिक्स सम्मेलन के घोषणा पत्र में 10 आतंकवादी संगठनो का जिक्र किया गया है। जिसमें लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनो का जिक्र किया गया है। इनमें से ज्यादातर आंतकी संगठन पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं। पाकिस्तान का बिना नाम लिए ही इन आतंकी संगठनों को जिक्र किया गया है।

घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ में आंतकवाद की चर्चा

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत मे आतंकवाद का मुद्दा उठाया। ब्रिक्स श्यामन घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ मे आंतकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस-पास के इलाकों में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं।

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम लोग दुनिया भर में हुए आतंकी हमले में कड़ी निंदा की। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है। घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी ब्रिक्स देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लडेंगे।

चीन ने हर बार अडंगा

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम रुसी पीएम ब्लादिमीर पुतिन से मिले और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान भारत और रुस के बीच पर्यटन के लेकर बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

सम्मेलन से कुछ दिन पहले ही चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग पीएम मोदी से मिले थे। जिसके बाद ही डोकलाम से दोनों देशों की सेना पीछे हटी थी।

आपके बता दें ब्रिक्स सम्मेलन पर जिस अहम मुद्दे पर चर्चा हुई है। इससे पहले चीन इस मुद्दे अडंगा लगाता रहा है। चीन पाकिस्तानी समर्थक आतंकी संगठन अंतर्राष्ट्रीय संगठन घोषित करने पर अडंगा लगाती रही है। लेकिन इस बारे के घोषणापत्र से भारत को एक बड़ी सफलता मिली है।

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आईएसआई का तीसरा एजेंट मुंबई से गिरफ्तार

पाकिस्तान से पैसा जमा करने का निर्देश मिलता था


 

यूपी और महाराष्ट्र एटीएस के संयुक्त कारवाई से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक ओर जासूस पकड़ा गया है। जासूस मुंबई के अग्री पाड़ा से पकड़ा गया है।

पाक उच्चाधिकारी के संपर्क में थे

आपको बता दें इससे पहले एटीएस ने फैजाबाद और मुंबई से दो पाकिस्तानी जासूस जावेद और अल्ताफ कुरैशी को गिरफ्तार किया था। जावेद को पाकिस्तान से पैसा जमा करने का निर्देश मिलता था।

इन दोनों से मिली जानकारी के बाद ही मुंबई के अग्री पाड़ा पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान जावेद के पुत्र इकबाल का गिरफ्तार किया गया। उसके पास से पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि उसने एक पाक एजेंट के निर्देश पर आफताब के खाते में पैसा जमा किया था।

 

पकड़े गए आईएसआई जासूस


 

आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि यह दोनों जासूस पाकिस्तान उच्चायोग के एक आधिकारी से संपर्क में थे। अल्ताफ और जावेद को मुंबई के कोर्ट में इंस्पेक्टर अविनाश मिश्र द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। वहां से ट्रांजिट रिमांड का आदेश लेकर लखलऊ लाया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा अक्टूबर में किए गए सार्जिकल स्ट्राइक के बाद से सेना के कामकाज पर नजर रखने के लिए पाकिस्तान ने हायर किया था।

पहली गिरफ्तारी फैजाबाद से हुई थी

गौरतलब है कि यूपी एटीएस और सेना की संयुक्त कारवाई से ही आफताब अली को फैजाबाद से पकड़ा जा सका था।

अफताब के पास से संदिग्ध कागजात,कैंट एरिया का नक्शा, आतंकी लिटरेचर और कई चिट्ठियां भी बरामद हुई है।

आफताब की गिरफ्तारी के बाद से ही इस नेटवर्क में काम करने वालों पर एटीएस की नजर थी। इसी दौरान यूपी एटीएस की टीम ने मुंबई में महाराष्ट्र की टीम के साथ मिलकर रुम नंबर 201, युसूफ मंजिल,डॉ आनंद राव मेन रोड, मुंबई पर छापा मारा और वहां से अल्ताफ कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी अल्ताफ कुरैशी पुत्र हनीफ मूलरुप से दोरजी, गुजरात का रहने वाला है। एटीएस के मुताबिक अल्ताफ हवाला का अवैध कारोबार करता है। वह आईएसआई के कहने पर फैजाबाद से पकड़े गए एजेंट आफताब के खाते में पैसा जमा करता था। अल्ताफ के पास से लगभग 70 लाख रुपये भी बरामद किए गए है।