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भारत

पी.एम मोदी ने बढ़ाया एक बार फिर से दोस्ती का हाथ

भारत से चीन को चीनी , आयात करने की तैयारी 


यह बात सभी जानते है की पी एम मोदी सिर्फ देश के पीएम नहीं बल्कि एक बहुत अच्छे से इंसान है. वह कभी भी दूसरो की मदद करने से पहले पीछे नहीं हटते चाहे वो दोस्त हो या दुशमन. इस बार पीएम मोदी ने इस बात को साबित कर दिया.

भारत के साथ चीन के रिश्ते भले ही कुछ समय से अच्छे न हो लेकिन भारत ने फिर भी चीन के आगे मदद के द्वारा चीन के आगे दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, भारत पहली बार चीन को चीनी निर्यात करने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग को यह वादा किया की भारत 10 से 15 लाख टन चीनी निर्यात की जाएगी. यह सौदा करीब 50 करोड़ डॉलर का हो सकता है.साथ ही चावल और दवाओं के निर्यात से भी व्यापार घाटे में कमी लाने की उम्मीद की जा रही है.

ऐसा बताया जाता है की चीन जो है वो चीनी के सबसे बड़े आयातकों में से है. चीन के उपभोक्ता हर साल करीब 1.4 करोड़ टन चीनी का उपभोग करते हैं. चीन में चीनी का उपभोग भारत से बहुत कम है, जबकि वहां की जनसंख्या भारत से ज्यादा है. भारत में हर साल करीब 2.5 करोड़ टन चीनी का उपभोग होता है.

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विदेश

ब्रिक्स सम्मेलन- नहीं चला पाकिस्तान का साथी, आंतकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई

10 आतंकी संगठन पर हुई चर्चा, ज्यादातर पाकिस्तान के


चीन के श्यामन में 9वां ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आतंकवाद का मुद्दा मुख्य रहा। पीएम मोदी ने जोरो-शोरों से सम्मेलन के आतंकवाद को मुद्दा उठाया। इतना ही नहीं पीएम आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी बात मनवाने में सफल रहे।

रुस प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी

ब्रिक्स सम्मेलन के घोषणा पत्र में 10 आतंकवादी संगठनो का जिक्र किया गया है। जिसमें लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनो का जिक्र किया गया है। इनमें से ज्यादातर आंतकी संगठन पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं। पाकिस्तान का बिना नाम लिए ही इन आतंकी संगठनों को जिक्र किया गया है।

घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ में आंतकवाद की चर्चा

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत मे आतंकवाद का मुद्दा उठाया। ब्रिक्स श्यामन घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ मे आंतकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस-पास के इलाकों में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं।

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम लोग दुनिया भर में हुए आतंकी हमले में कड़ी निंदा की। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है। घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी ब्रिक्स देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लडेंगे।

चीन ने हर बार अडंगा

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम रुसी पीएम ब्लादिमीर पुतिन से मिले और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान भारत और रुस के बीच पर्यटन के लेकर बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

सम्मेलन से कुछ दिन पहले ही चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग पीएम मोदी से मिले थे। जिसके बाद ही डोकलाम से दोनों देशों की सेना पीछे हटी थी।

आपके बता दें ब्रिक्स सम्मेलन पर जिस अहम मुद्दे पर चर्चा हुई है। इससे पहले चीन इस मुद्दे अडंगा लगाता रहा है। चीन पाकिस्तानी समर्थक आतंकी संगठन अंतर्राष्ट्रीय संगठन घोषित करने पर अडंगा लगाती रही है। लेकिन इस बारे के घोषणापत्र से भारत को एक बड़ी सफलता मिली है।

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विदेश

दो महीने बाद सुलझा डोकलाम विवाद, पीछे हटी दोनों देशों की सेना

चीन ने कहा पहले भारत की सेना हटे


पिछले दो महीने से भारत और चीन के बीच चल रहे डोकलाम विवाद पर आज विराम लग गया है। दोनों देशों की सेना पीछे हट रही हैं।

डोकलाम सीमा

दोनों देशों ने सेना हटाना शुरु की

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए बयान में कहा गया है कि दोनों देशों ने इस मुद्दे पर लगातार बात की है। जिसके बाद इस पर फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि विवाद के बाद भी पिछले कई दिनों से दोनों देशो को बीच इस मुद्दे को सुलझाने पर बात चल रही थी। दोनों देश के सेना अब धीरे-धीरे अपनी सेना हटाएंगी। दोनों देशों की सेना पीछे हटना शुरु भी हो गई है।

वहीं दूसरी ओर चीन विदेश मंत्रालय ने कहा कि अभी सिर्फ भारत की सेना ही पीछे हटेगी। चीन की सेना डोकलाम में लगातार पेट्रोलिंग करती रहेगी। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के बाद चीनी अखबार की ओर से ट्वीट कर कहा गया कि चीन और भारत ने 2 महीने से चल रहे डोकलाम विवाद को खत्म करने का फैसला किया गया है।

ब्रिक्स समिट के लिए चीन का दौरा करेंगे पीएम

आपको बता दें इससे पहले चीनी ने कई बार डोकलाम विवाद को लेकर भारत को धमकी दी थी। कुछ दिन पहले ही चीन से लद्दाख पर बन रही सड़क का निर्माण नहीं रोकता है तो यह भारत के लिए अच्छा नहीं होगा। इसके कारण डोकलाम विवाद और बढ़ता जाएंगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिनों के बाद ब्रिक्स समिट मे हिस्सा लेने के लिए चीन का दौरा करने वाले हैं। मोदी के दौरे से पहले ही दोनों देशों की कवायद विवाद को सुलझाने की थी। जिसका असर दिखाई दे रहा है। अभी तक जारी बयान से ये साफ नहीं कि कौन से देश की सेना पहले विवादित जगह से हटेगी।

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भारत

चीन ने सेना हटाने को कहा भारत ने कहा कूटनीति से होगा मामले का समाधान

डोकलाम सीमा में तनाव बढ़ता जा रहा है


सिक्किम के डोकलाम सीमा से भारत और चीन के बीच पैदा हुआ तनाव बढ़ता ही जा रहा है। ताजा मामले में चीन ने एक बार फिर से कहा है कि भारत अपनी सेना तुरंग पीछे हटाए। तभी कोई बात हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ रक्षामंत्री सुभाष भाम्रे ने मामले में भारत का रुख साफ करते हुए कहा कि हम चीन की धमकियों से पीछे हटने वाले नहीं है। इस मुद्दे को कूटनीतिक ढ़ंग से निपटाया जाना चाहिए।

बॉर्डर पर सेना

भारत अपने सैनिकों को तत्काल हटाए

खबरों की माने तो भारत में चीनी दूतावास में काउंसलर ली या ने कहा कि डोका ला में चीन की गतिविधियां उसकी सप्रभुतता में है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर भारत के चीनी सीमा पार की है जो संप्रभु राज्य के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। समाधान की बात करें तो भारत सबसे पहले अपने सैनिकों को तत्काल हटाए तभी कोई बात हो सकेगी।

वहीं इससे पहले राज्य रक्षा मंत्री सुभाष भाम्रे ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान कूटनीतिक माध्यम से किया जाना चाहिए। जो हम चाहते हैं। चीनी सैनिक उस जगह वापस लौट जाएं जहां वो पहले मौजूद थे। चीन भूटान क्षेत्र में दाखिल हो रहा है और उसे ऐसा नहीं करना चाहिए। यही हमारी चिंता है।

चीनी नागरिको को किया गया अर्ल्ट

भारत-चीन सीमा पर हो रही उठापटक के बीच चीन की सरकार भारत दौरे पर गए चीनी नागरिकों को अलर्ट करने पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस बारे में गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

अगर खतरा लगा तो चीनी नागरिकों को भारत से आगाह किया जाएगा। उधर, एक अखबार में छपे लेख के जारिये भारत में रह रहे चीनी को आगाह किया गया है कि चीन विरोधी तत्वों से सावधान रहें।
वहीं दूसरी ओर मीडिया ने अपने लेखों के जरिए सरकार को भारत में कम निवेश करने की सलाह दी है।

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भारत

जम्‍मू-कश्‍मीर में एक दर्जन से ज्‍यादा कर्मचारी बर्खास्‍त दिए

जम्‍मू-कश्‍मीर में एक दर्जन से ज्‍यादा कर्मचारी बर्खास्‍त दिए


एक दर्जन से ज्‍यादा कर्मचारी बर्खास्‍त

जम्‍मू-कश्‍मीर में एक दर्जन से ज्‍यादा कर्मचारी बर्खास्‍त दिए :- जम्‍मू में 12 से ज्‍यादा कर्मचारियों को बर्खास्‍त कर दिया गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है, कि राज्‍य सरकार ने एक दर्जन से ज्‍यादा कर्मचारियों को राष्‍ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप की वजह से बर्खास्‍त कर दिया है। वरिष्‍ठ आधिकारी ने यह भी बताया है, कि राज्‍य की पुलिस ने इन सभी कर्मचारियों की राष्‍ट्रविरोधी गतिविधियों से संबंध रिपोर्ट मुख्‍य सचिव को सौंप दी थी, जिसके बाद उन्‍होने सभी के जुड़े विभागों के प्रमुखों को कर्मचारियों को बर्खास्‍त करने को कहा।साथ ही बताया, कि कुछ लोग अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए है।

आप को बता दें, बर्खास्‍त किए गए कर्मचारियों में कुछ कश्मीर यूनिवर्सिटी के सहायक रजिस्ट्रार शामिल है, साथ ही शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, इंजीनियरिंग और आदि विभाग के लोग शामिल है। अधिकारी ने यह जानकारी भी साझा की, कि राज्‍य सरकार ने इस कार्रवाई को अंजाम सविंधान के आर्टिकल 126 के तहत दिया है।

यहाँ पढ़ें :अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने भारत को हर मदद का ऑफर दिया है- अमेरिकी राजदूत

प्रदर्शन के दौरान तैनात सुरक्षाकर्मी

बुरहान वानी की मौत के

दरअसल, 22 साल के हिज्‍बुल के बुरहान वानी नाम के आतंकवादी के इस साल नौ जुलाई में मारे जाने के बाद से बीते तीन महीने से कश्‍मीर घाटी में अशांति का मोहल्‍ल बना हुआ है । एनकाउंटर में हुई मौत के बाद प्रदर्शन हुए जिस में अब तक लगभग 91 लोग मार गए है। साथ ही 12000 से भी ज्‍यादा लोग घायल हो गए है। बता दें, ये प्रदर्शन 104 दिनों से जारी है।

जम्‍मू में चीन के झ़डे

आप को बता दे, बीते दिनों में सुरक्षाबलों के द्वारा 10 जगहों पर छापे मारे गए, ज‍हां कथित रूप से आतंकवादियों के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ों जैसे, कि पेट्रोल बम, भारत के विरोधी में प्रचार करने वाली सामग्री, अनधिकृत सेलफोन और जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठनों से जुड़े दस्तावेजों के साथ अब चीन के झंडे भी बरामद किए गए हैं।

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भारत

कश्‍मीर घाटी में छापों के दौरन मिले चीन के झड़े

कश्‍मीर घाटी में छापों के दौरन मिले चीन के झड़े


कश्‍मीर में चीन के झंडे

कश्‍मीर घाटी में छापों के दौरन मिले चीन के झड़े :- जम्‍मू कश्मीर में तनाव की स्थिति होना कोई नई बात नहीं है। मगर अब इस तनाव के बीच अब एक चिंता की नई वजह इस में जुड़ गई है। हाल ही के दिनों में सुरक्षाबलों  के द्वारा मारे गए छापों में कथित रूप से आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ों  जैसे, कि  पेट्रोल बम, भारत के विरोधी में प्रचार करने वाली  सामग्री, अनधिकृत सेलफोन और जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा जैसे आदि आतंकी संगठनों से जुड़े दस्तावेज़ के साथ अब चीन के झंडे भी बरामद हुए हैं। जो चिंता का नया विषय बना गया है।

पाकिस्‍तान और चीन का झ़डा

दरअसल, 100 दिन तक शांति बनाए रखने के बाद सुरक्षाबलों ने बारामूला में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था।  22 साल के बुरहान वानी  आतंकवादी के इस साल जुलाई में मारे जाने के बाद से बीते तीन महीने से कश्‍मीर घाटी में अशांति का मोहल्‍ल बना हुआ और इस दौरन  बारामूला ही सबसे ज़्यादा प्रभावित वाला इलाका रहा है। जम्‍मू की राजधानी श्रीनगर से करीबन 55 किलोमीटर की दूरी पर बसा बारामूला में प्रदर्शनकारियों का खासा नियंत्रण रहा है। साथ ही वहां  कर्फ्यू लगा हुआ है लेकिन बार-बार कर्फ्यू तोड़कर सुरक्षाबलों और उनके वाहनों, कार्यालयों पर हमले करते रहे है। इस प्रदर्शनकारियों के द्वारा पाकिस्तान देश के झंडे लहराया और देखना कोई नई बात नहीं है, क्‍योंकि ऐसा आगे दिन घाटी में होता रहता है। मगर अब खुफिया एजेंसियों को हाल ही के दिनों में बड़े-बड़े प्रदर्शनों के दौरान चीन देश के झंडे देखे  जाना चिंता का विषय बन गया  है।

यहाँ पढ़ें : आइए जाने किताबों को पढ़ने के फायदे

कश्‍मीर में चीन के झड़े

सेना के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी साझा की है, कि बारामूला की पुरानी बस्ती में व्यापक तलाशी अभियान के तहत 17 अक्टूबर यानि सोमवार को 12 घंटे के भीतर 700 से भी ज़्यादा घरों की तलाशी ली गई। साथ ही दस जगहों पर छापे मारे गए, जहां पथराव करने वालों तथा संदिग्ध आतंकियों की मदद करने वालों के रहने की संभावना थी।

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पाकिस्तान में स्थित गुटों को आतंकवादी घोषित करने को लेकर सर्वसम्मति हासिल नहीं कर सका भारत

 पाकिस्तान में स्थित गुटों को आतंकवादी घोषित करने को लेकर सर्वसम्मति हासिल नहीं कर सका भारत


पड़ोस में आतंकवाद का मदरशिप

 पाकिस्तान में स्थित गुटों को आतंकवादी घोषित करने को लेकर सर्वसम्मति हासिल नहीं कर सका भारत :- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार यानि कल गोवा राज्‍य में बिक्‍स सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों को साफ-साफ य‍ह  कहा दिया है,  कि भारत देश के पड़ोस में आतंकवाद का मदरशिप चल रहा है। जो कि  विकास और आर्थिक वृद्धि के ब्रिक्स के लक्ष्यों के लिए खतरा है। साथ ही नरेन्‍द्र मोदी ने यह भी कहा, कि आतंकवाद को पनाह देने वाले भी आतंकवादियों जितना ही बड़ा खतरा हैं, मगर नरेन्‍द्र मोदी के इतना कहने के बाद भी पांचों सदस्य देशों द्वारा स्वीकृत गोवा घोषणापत्र में भारत की उन चिंताओं का ज़िक्र नहीं है, जो सत्र के दौरान या सिर्फ प्रारंभिक सत्र के दौरान उठाई गई थीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

दरअसल, घोषणापत्र में आग्रह किया गया है, कि आतंकवादियों  के ठिकानों को खत्म किया जाए।  सभी देशों को व्यापक पहल करनी होगी, जिस में कट्टरपंथ से निपटना, आतंकियों की भर्ती रोकना और आतंकवाद को वित्तपोषण खत्म करना शामिल होगा। साथ ही  घोषणापत्र में कहा गया है, कि इंटरनेट और  सोशल मीडिया पर भी आतंकवाद से टक्कर लेनी होगी।

विचारों पर फोकस

गोवा में हुए दो दिन के ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरन  सचिव ‘अमर सिन्हा’ ने यह कहा कि घोषणा पत्र में विचारों पर फोकस किया गया है। साथ ही यह भी बताया, कि वे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद आदि जैसे पाकिस्तान में स्थित गुटों को आतंकवादी घोषित करने को लेकर सर्वसम्मति हासिल नहीं कर सके है। वजह यह बताई है, कि यह मामला सिर्फ भारत और पाकिस्तान देश से जुड़ा मामला हो जाता। मगर घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी घोषित किए जा चुके संगठनों से निपटने की ज़रूरत पर बल दिया गया है। बता दें, भारत में उरी हमले हुआ था, जिस में सेना के कैम्प पर आतंकवादी हमला किया गया था। साथ ही लगातार सीमापार से आतंकवाद की अन्य घटनाओं को लेकर पाकिस्तान देश पर अंगुली उठाने के मामले में चीन के दोहरे रवैये की वजह से भारत और चीन संबंधों में खटास व्याप्त रही।

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रूस करेगा भारत के साथ एक अरब का सयुंक्‍त निवेश कोष

रूस करेगा भारत में निवेश


रूस करेगा भारत के साथ एक अरब का सयुंक्‍त निवेश कोष भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में रूस ने पहली बार 50 करोड़ डॉलर तक की राशि के निवेश पर सहमति जताई है। साथ ही रूस एक अरब की राशि वाले रूस भारत निवेश कोष की स्थापना के लिए करीबन इतनी ही राशि नवगठित नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंड फंड में भी निवेश करने वाला है।

रूस और भारत

आरडीआईएफ के मुख्य कार्यकारी किरील दिमित्रेव ने यह जानकारी साझा करते हुए कहा है, कि इस ‘रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष’ से भारत में रूसी कारोबारी गतिविधि के लिए आकर्षक निवेश के अवसरों और विकास’ का समर्थन करेगा।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपति पुतिल के बीच आज कई अहम समझौते हुए है। इन में सबसे अहम है , हेलिकॉप्टर डील पर हुआ समझौता। इस समझौते में पांच बिलियन डॉलर मतलब कि 33,500 करोड़ रूपये तक के रक्षा समझौते पर हस्‍ताक्षर हुए है ।

इस रक्षा समझौते के तहत रूस भारत को जीमन से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल उपलब्‍ध करवाएगा।

भरी मात्रा में मीढियाकर्मी मौजूद

गोवा राज्‍य में ब्रिक्स और बिम्सटेक की मीडिया कवरेज की व्यवस्था भी अपने आप में एक बड़ा आयोजन है। इस आयोजन को कावर करने के लिए देश विदेश से आए मीडियाकर्मियों को पल पल की जानकारी मिलती रहे इसके लिए कई मीडिया सेंटर बनाए गए हैं। यहां भारतीय मीडिया के लिए दो सेंटर है तो वहीं विदेशी मीडिया के लिए एक मीडिया सेंटर बनाया गया है। बता दें, इस बिक्‍स समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति हिस्सा लेने आए है।

बिक्‍स के बारे में

आज से 16 अक्‍टूबर तक चलने वाला बिक्‍स सम्‍मेलन आठवां है। इस समिट की शुरूआत साल 2011 में हुई थी। इस के सदस्‍य है, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। इस बिक्‍स समिट का मकसद है आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर पश्चिमी देशों को चुनौती देना।

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