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मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर , पीएम ने किया सबसे लंबे पुल का उद्धाटन

पुल अरुणाचल प्रदेश और असम को जोड़ता है


मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के सबसे लंबे पुल का उद्धाटन किया। इसकी लंबाई 9.15 किलोमीटर है। पुल पूर्वोत्तर के अनिनि में अरुणाचल प्रदेश में है। अनिनि चीन बॉर्डर से 100 किलोमीटर की दूरी पर है।

ढोला सदीया पुल

165 किलोमीटर दूरी में आई कमी

‘ढोला सदीया’ पुल लोहित नदी के पर बना है। लोहित, बह्मपुत्र की सहायक नदी है। यह पुल असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ता है। इस ब्रिज के बनने से असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएंगी। साथ ही दूरी में 4 घंटे की कमी आ जाएंगी। साथ ही हवाई और रेल परिवहन के अलावा सड़क रास्ते से आना जाना आसान हो जाएगा। यह अब तक देश के सबसे लंबे पुल बांद्रा-वर्ली सी लिंक से 3.55 किलोमीटर लंबा है।

मोदी ने ट्वीट कर इस पुल की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि यह देश के बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है।

वजनी टैंक उठाने में सक्ष्म

यह 60 टन वजनी युद्धक टैंक का वजन भी उठा सकता है। इस ब्रिज के द्वारा समान ढोने वाले और आर्मी की वाहन को आने जाने में सुविधा होगी।

साथ ही इस पुल के बन जाने से हमारी सेना कम समय में बॉर्डर दिबांग और अन्जऊ पहुंच पाएंगे। वर्तमान में यहां पहुंचने में दो दिन लगते है।

इसके साथ ही केंद्रीय परिवाहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक वीडियो ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने ढोला सदीया पुल के महत्व को बताया है।

निर्माण कार्य कांग्रेस सरकार के समय शुरु हुई

पुल का उद्धाटन करने के बाद पीएम मोदी एक एनडीए सरकार की तरफ से एक सभा रैली को संबोधित करेंगे। इस रैली में पीएम एनडीए सरकार की तीन साल की उपलब्धियों को बताएंगे।

पुल का निर्माण कार्य साल 2011 में शुरु हुआ था। इससे जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। इस पुल को बनाने में लगभग 950 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस पुल का निर्माण इस तरह किया गया है कि सैन्य टैंको को भार सहन कर सकें।

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अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दिया इस्तीफा 44 विधायकों ने छोड़ा कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी को और झटका लगा है अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 44 विधायकों सहित पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में शामिल हो गए है।

इसके बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री नाबाम टुकी ही अकेले विधायक बचे है जो कांग्रेस में रह गए हैं।

इससे पहले अरुणाचल प्रदेश की 66 सदस्यीय विधानसभा में 47 कांग्रेस के विधायक थे और 11 बीजेपी और 11 दो निर्दलीय विधायक है।

पेमा खांडू

मुख्यमंत्री खांडू ने 44 विधायकों सहित पीपीए में विलय की घोषणा कर दी है।  इसके साथ ही अरुणाचल में एक बार भी राजनीतिक संकट आ गया है।

इससे पहले 24 फरवरी में 24 विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ पीपीए में शामिल हो गए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कालिख को मुख्यमंत्री पद गंवाना पड़ा था। कुछ समय पहले ही कालिख पुल अपने घर में मृतक पाए गाए थे।

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कालिख पुल की जंगल से लकडियां लाने से लेकर आत्महत्या करने तक का सफर

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने मंगलवार को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत के पीछे का सबसे बड़ा कारण उनका डेपरेशन बताया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही हिंदी न्यूज चैनल में दिए इंटरव्यूय में उन्होंने बताया था वो अपनी जिदंगी में बहुत परेशान है। जिसके कारण वह किसी से मिल भी नहीं रहे है। सिर्फ साढ़े चार महीने तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कालिखो पुल का जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है। एक आम इंसान से राज्य के मुख्यमंत्री बनने तक उनके जीवन में कई उतार-चढाव आए।

आईये कालिख पुल के जीवन के संघर्ष के बारे में जानते हैं

कालिखो के नाम का मतलब ही है ‘बेहतर कल’ जैसा कि नाम में ही बेहतर कल का जिक्र है। वैसे ही उनका भविष्य बहुत बेहतर रहा। लेकिन उसका अंत बहुत ही दर्दनाक रहा। एक चौकीदार से मुख्यमंत्री बनने तक उनके जीवन में कई परेशानियां आई। लेकिन इन सब को दरकिनार करते हुए कालिख ने उस मुकाम को हासिल किया जिसे वह पाना चाहते थे।

पैदा होने के बाद से ही उनकी जिदंगी में तो जैसे दुख लिख दिए गए थे। उनके पैदा होने के महज 13 महीने के बाद ही उनकी मां उन्हें छोड़ चल बसी और पांच साल की नन्ही उम्र में पिता ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बाद से ही उनकी जिदंगी में संघर्ष का दौर शुरु हो गया।

अरुणाचल प्रदेश के हवाई क्षेत्र के वाला गांव में पैदा हुए कालिख कभी-कभी स्कूल जा पाते थे, क्योंकि उन्हें अपनी आंटी को जंगल से लकडियां लाकर देनी होती थी। ऐसे ही उनकी जिदंगी की दिन कटे महीने और कई साल पार हो गए। दस साल की उम्र में उन्होंने दो साल के लिए कारपेंटर की ट्रेनिंग शुरु की। जहां उन्हें महज 1.50 रुपए रोज के मिलते थे। इसके बाद इसी दुकान पर ट्रेनिंग करवाने लगी। इसी दौरान उनकी दुकान पर कई बड़े अधिकारी और राजनेता सामान लेने के लिए आने लगे। जिनके पास कालिख ने अपनी पढ़ने की इच्छा जाहिर की। बस इसके बाद उन्होंने एक नाइट स्कूल में एडमिशन करवा।

कालिख पुल

एक दिन उनकी जिदंगी में एक छोटा सा बदलाव आया। स्कूल के एक प्रोग्राम के दौरान राज्य शिक्षा मंत्री और कई बडी हस्तियों ने हिस्सा लिया था। इसी दौरान कालिख ने हिंदी में एक स्पीच दी और एक देशभक्ति गीत गाया। जिसके बाद नेता जी खुश हो गए और जल्द ही कालिख को दिन वाले स्कूल में एडमिशन करने कहा और यहां से ही उन्हें चौकीदार की नौकरी मिल गई।

लेकिन यहीं उनकी जिदंगी की परेशानी खत्म नहीं हो गई। कुछ समय बाद उन्हें एक बीमारी हो गई जिसका इलाज करवाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। किसी रिश्तेदार ने भी उनकी मदद नहीं की। जिदंगी से तंग आकर लोहित नदी के रेलवे ट्रैक पर जाकर जान देने की कोशिश की लेकिन भीड़ होने के कारण नहीं दे पाए।

इन सबके बाद उन्होनें राजनीति में कदम रखा और साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014 में हाय्लुंइंग से विधायक बने।

कालिख ने साल 2105 में कांग्रेस से बगावत करने के बाद खूब सुर्खियां बटोरियां। साल 2015 में कांग्रेस के 47 विधायकों में से 21 ने बगावत कर नबाम टुकी को गद्दी से हटवा दिया था। जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया था।

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अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री की मौत, घर में पंखे से लटके पाए गए

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बागी नेता कालिखो पुल की मृत्यु हो गयी है। कालिखो का शव उनके घर में पंखे पर लटका हुआ मिला है। शव मंगलवार को मिला है। कांग्रेस के एक नेता ने बताया है कि पुल ने खुदकुशी की है।

साल 2016 में लगभग साढ़े चार महीने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहें। लेकिन जुलाई के में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी पाए जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद भी वह मुख्यमंत्री निवास में ही रहते थे।

पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल

फरवरी में नबाम तुर्की के सत्ता से हटाने के लिए बागी हुए कांग्रेस नेता का नेतृत्व कालिख ने ही किया था। जिसके बाद राज्य में 26 जनवरी से राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।

कालिखो की मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुर्की ने अफसोस जताया है उन्होंने कहा है कि यह बहुत दुख भरी बात है कि कालिखो जैसे युवा नेता अब हमारे बीच नहीं रहें।

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कांग्रेस का फैसला आज, तुकी को साबित करना होगा बहुमत

अरुणाचल प्रदेश में आज मुख्यमंत्री नबाम तुकी को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है। शनिवार यानि आज दोपहर 1 बजे विधानसभा में बहुमत परीक्षण होगा।

बता दें, बहुमत परीक्षण को देखते हुए ईटानगर विधानसभा के आसपास धारा 144 लगा दी गई है।

गौरतलब है कि कल शुक्रवार को नबाम तुकी ने राज्यपाल से मुलाकात कर बहुमत साबित करने के लिए 10 दिन का समय और माँगा था, लेकिन राज्यपाल ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया। इसलिए तुकी को आज ही बहुमत साबित करना होगा।

राज्यपाल की और से जारी प्रैस रिलीज मे ये बताया गया है कि राज्यपाल को शक है कि विधानसभा में तुकी सरकार के पास बहुमत नहीं है, हालांकि तुकी ने ये दावा किया है की उनके पास बहुमत है।

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अरूणाचल में राष्ट्रपति शासन पर शत्रु का सवाल,किसने दी PM को राय?

अपने बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाले बीजेपी नेता और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोलकर हलचल पैदा कर दी है।

आज शत्रुघ्न ने तीन ट्वीट किए और अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए ट्वीट में लिखा “मुझे हमारे एक्शन हीरो  प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है, लेकिन इस बात से अचंभित हूं कि आखिर उन्हें अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन लगाने की राय किसने दी?”

यही नहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने केंद्र पर निशाना साधते हुए लिखा “जब अरुणाचल प्रदेश का मामला सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच के पास रोका था तो वहां राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया। समझ नहीं आता कि आखिर केंद्र सरकार को ऐसी भी क्या चिंता थी और क्या जल्दी थी।”

अपनी तीसरे ट्वीट में बिहारी बाबू ने लिखा है, “भगवान बचाए अगर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हमारे पक्ष में नहीं आता है तो हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री लोगों को क्या जवाब देंगे।”

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अरूणाचल प्रदेश में 24 जनवरी को राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की गई थी। राष्ट्रपति शासन को अपनी मांग से अगले दिन लागू कर दिया गया। इसके पूर्व शत्रुघ्न सिन्हा के मित्र और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इसे गलत बताया गया है।

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अरुणाचल में चीन से युद्ध जैसे हालात के चलते लगा राष्ट्रपति शासन : केंद्र सरकार !

अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने चौंकाने वाली वजह बतायी है। केंद्र ने कोर्ट में दायर जवाब में कहा है, कि राज्य में गंभीर राजनैतिक अस्थिरता है और युद्ध जैसे हालात है।

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि अरुणाचल में चीन की वजह से युद्ध जैसे हालातों का खतरा बना हुआ है, लिहाजा राष्ट्रपति शासन लगाने की इजाजत दी गयी है।

गौरतलब है कि अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी तक केंद्र सरकार से जवाब दायर करने को कहा था।

एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में गर्वनर जेपी राजखोवा की राष्ट्रपति को भेजी 6 रिपोर्ट का हवाला भी दिया है।

कोर्ट में दाखिल एफिडेविट के अनुसार अरुणाचल के एक बड़े हिस्से पर चीन अपना हक जताता आया है, जिसके चलते लंबे समय से घुसपैठ की कोशिशे इस इलाके में होती रहती है। इसमें यह भी कहा गया है कि राज्य में कानून व्यवस्था लगभग खत्म हो गई है।

इस मामले पर अगली सुनवाई सोमवार को होनी है।

चीन की इन हरकतों की वजह से राज्य में राजनैतिक और आर्थिक हालात अस्थिर हैं,  इन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।

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राष्ट्रपति शासन- सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल सहित दिया केंद्र को नोटिस !

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू के विरोध में कांग्रेस की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के वकील से वो रिपोर्ट पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया।

सुनवाई के बाद राज्यपाल और केंद्र दोनों को नोटिस दिया गया है। साथ ही शुक्रवार को इस मामले पर जवाब भी मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 1 फरवरी को है।

अरुणाचल प्रदेश में पिछले दिसंबर से ही राजनीतिक संकट पैदा हुए हैं। ऐसे में वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है।

राष्ट्रपति शासन लगते ही कांग्रेस पार्टी ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने ऐसा करके गणतंत्र को कुचल दिया है।

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अरुणाचल प्रदेश में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन!

पिछले 16 दिसंबर से राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। कैबिनेट के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दे दी है। जिसके साथ आज सोमवार से अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन शुरु हो गया है।

सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस और आप ने कड़ी आलोचना की है, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इसे राजनीतिक असहिष्णुता भी कह डाला।

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की सिफारिश की गई थी।

पिछले साल 16 दिसंबर को यहां तब राजनीतिक संकट उत्पन्न हुआ जब कांग्रेस के 21 बागी विधायकों ने भाजपा से हाथ मिला लिया था। मुख्यमंत्री नाबाम तुकी की जगह कैलिखो पॉल को नेता चुन लिया गया था। नाबाम तुकी ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल राजखोवा भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। वहीं वे कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ उनकी सरकार गिराने की साजिश में लगे हैं।

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