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इस्लाम धर्म में यह सब करना है जरुरी , जाने क्या ?

जाने इस्लाम धर्म से जुड़ी कुछ खास बातें 


 इस्लाम में रमजान का महीना काफी पवित्र माना जाता है. अब 6  मई से रमजान शुरू होने वाले है जब सभी मुस्लिम रोज़ा रखते है खुदा की इबादत करते है और सभी बुरी आदतों को खुद से दूर रखते  है. लेकिन कुछ बाते ऐसी है जो आप इस्लाम  के बारे में नहीं जानते है तो चलिए आज हम आपको बताते  है इस्लाम से जुड़ी  यह कुछ ख़ास बातें:  

इस्लाम में यह सब करना है जरुरी :

1. इस्लाम में कलमा पढ़ना जरुरी है जो आपको यह एहसास दिलाता है कि अल्लाह एक है और मुहम्मद साहब उनके रसूल हैं

2.हर रोज पाँचो वक़्त  की नमाज़ भी पढ़नी फ़र्ज़ यानि जरुरी है.

3. रमज़ान इस्लाम धर्म का पवित्र महीना माना जाता है.  इसमें महीने भर केवल सूर्यास्त के बाद 1 बार खाना खाने का नियम होता है. 

4 मक्का और मदीना  इस्लाम धर्म के पवित्र तीर्थ स्थानों में से है

अब जानते है की आखिर इस्लाम धर्म  है क्या और  इसके  प्रवर्तक कौन थे?

इस्लाम जो है वो एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है शान्ति को अपनाना साथ ही इस्लाम धर्म का मूल स्वरूप  है एक ऐसा धर्म, जिसके जरिए एक इंसान दूसरे इंसान के साथ प्रेम और अहिंसा से भरा व्यवहार कर ईश्वर की पनाह लेता है.आपको बता दे इस्लाम धर्म के जो प्रवर्तक थे वो हजरत  मोहम्मद  साहब थे. ऐसा बताया जाता है कि जब भारत में हर्षवर्धन और पुलकेशियन का शासन था तब हजरत मुहम्मद अरब देशों में इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहे थे इस तरह से इस्लाम धर्म का उदय  हुआ.

साथ ही जिस तरह से हिन्दुओ की ग्रन्थ “गीता” है  उसी तरह से इस्लाम की ग्रन्थ कुरान है . कुरान वह पवित्र ग्रंथ है, जिसमें हजरत मुहम्मद के पास ईश्वर के जरिए भेजे संदेश शामिल हैं

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पॉलिटिक्स

ट्रिपल तलाक पर आज संसद में पेश हो सकता है बिल

सरकार ने मुस्लिम संगठनों से नहीं ली कोई राय


ट्र‌िपल तलाक के मामले में आज लोकसभा में बिल पेश किया जा सकता है। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक को पिछले हफ्ते ही कैबिनेट में मंजूरी दी थी। भाजपा सरकार ने इस बिल को पास कराने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है। इस मौके के लिए भाजपा ने खासकर अपने सभी सांसदों को संसद में ही मौजूद रहने को भी कहा है। सरकार ने लोकसभा में यह जानकारी दी कि ट्र‌िपल तलाक विधेयक का कानून तैयार करने से पहले मुस्लिम संगठनों से राय नहीं ली गई थी।

ट्रिपल तलाक

सरकार से पूछा गया था कि तीन तलाक पर मसौदा कानून तैयार करने से पहले सरकार ने मुस्लिम संगठनों से सलाह ली थी या नहीं। इस सवाल पर विधि राज्य मंत्री पी. पी. चौधरी ने अपने लिखित जवाब में ऐसा कहा कि उन्होंने मुस्लिम संगठनों से कोई भी विचार-विमर्श नहीं किया। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तुरंत तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) चलन में बना हुआ है, जिसके लिए कानून पास की जाने की आवश्यकता है।

रविशंकर प्रसाद का बयान

वहीं अन्य लिखित जबाव में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सरकार का मानना है कि महिलाओं के सम्मान और लैंगिग समानता का मसला मानवता से जुड़ा है। इसमें धर्म या विश्वास से कोई लेना देना नहीं है। सरकार का मानना है कि प्रस्तावित विधेयक महिलाओं के सम्मान, लैंगिग न्याय एवं समानता में मददगार होगा। केंद्रीय कानून मंत्री ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं इसके बावजूद ऐसे 66 और मामले भी दर्ज किए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते 15 दिसंबर को ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ को मंजूरी दी थी। इस विधेयक में तलाक देने वाले पति के लिए तीन साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

ट्रिपल तलाक

विधेयक में क्या हैं प्रावधान?

तीन तलाक को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है और इसके अलावा पीड़ित महिलाओं को भरण पोषण की मांग करने का अधिकार दिया गया है। जिसके अंतर्गत तीन साल का कारावास का प्रावधान है। अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति ट्रिपल तलाक का प्रयोग करता है तो उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने ‘असंवैधानिक व मनमाना’ बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि तीन तलाक इस्लाम का कोई अभिन्न अंग नहीं है। सरकार का दावा है कि इसे तीन तलाक की पीड़िता की रक्षा और उन्हें सम्मान व सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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