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कैसे जन्म होता है किन्नरों का

क्या हैं इनके जन्म के पीछे का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य


किन्नरों के बारे में तो आप सबने सुना ही होगा लेकिन कभी आपने सोचा है कि इनका जन्म कैसे होता है और आखिर ये पैदा कैसे और किन कारणों से होता है। कुछ लोग इसे विज्ञान से जोड़ते है तो कुछ आध्यात्म से, इसीलिए हमारे लिए दोनों तरह की परिस्थियों के बारे में जानना जरुरी है।

किन्नर

आइए जानते हैं इसके पीछे के रहस्य को:-

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:-

दरअसल जब कोई लड़का और लड़की जन्म लेने वाले होते हैं तो उसके लिए कुछ विशेष गुणसूत्र और हार्मोंस की जरुरत पड़ती है। जैसे लड़के के लिए पिता का Y गुणसूत्र और माँ के X गुणसूत्र मिलें तब लड़की जन्म लेती है परन्तु जब गुणसूत्रों और अंतर्गर्भिक परिस्थितियों का अनुपात बिगड़ जाता है तब एक किन्नर जन्म लेता है।
जब माता-पिता के गुणसूत्र अनियमित अनुपात में मिलते हैं तो होने वाला बच्चा क्या होगा वो तय कर पाना संभव नहीं होता और तब एक ऐसे इंसान का जन्म होता है जिसमें लड़का-लड़की दोनों के गुण सम्मिलित होते हैं।

किन्नर

धार्मिक दृष्टिकोण:-

आध्यात्म में इनके जन्म को लेकर कई ग्रह परिस्थितियां जिम्मेदार हैं, माना जाता है कि पिता के अंश की अधिकता से पुत्र और मान के अंश की अधिकता से पुत्री जन्म लेती है लेकिन कुछ कारणों की वजह से दोनों का अंश सामान रह जाये तो किन्नर जन्म लेते हैं और इसके लिए कुछ ग्रह-योग भी जिम्मेदार हैं।

जैसे शुक्र व शनि दशम स्थान में होने पर विषम राशि के लग्न को सम राशिगत मंगल को देख रहा हो, ऐसी और भी कई ग्रह दशा बताई गयीं हैं।

आज की परिवेश में किन्नर बदतर परिस्थिति में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। उन्हें हम सबकी सपोर्ट की जरुरत है। ये तो हम सबको पता है कि ‘जैसे वो हैं या जैसी उनकी पर्सनालिटी है, उसमे उनकी कोई गलती नहीं होती लेकिन फिर भी हमारा समाज उन्हें एक हीन भावना से क्यों देखता है और क्यों उनका समर्थन नहीं करता! हमें खुद में एक बदलाव करना चाहिए और अपनी सोच किन्नरों के लिए बदलनी चाहिए।

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लाइफस्टाइल भारत

क्यों मिलना चाहिए दलितों का हक़ और आवाज

दलितों का हक़ और आवाज़


21वी सदी में जीते हुए भी हम भेदभाव करना नहीं भूले। लोगों को उनके नाम/उपनाम के आधार पर उनका काम बताने वाले हम लोग, आज भी सदियों पुरानी मान्यताओं के आधार पर जिए जा रहे है। वैसे तो हम मॉडर्न ज़माने के है और वक़्त के साथ आगे बढ़ रहे है। पर जनाब, सिर्फ आप बढ़ रहे है, आपकी सोच आज भी ग्रंथो में अटकी हुई है। अपने हक़ का तो आपको पता है, पर आपकी ज़िम्मेदारियों का क्या? एक अच्छा और मॉडर्न इंसान होने के नाते ये आपका फ़र्ज़ बनता है कि आप किसी भी प्रकार के भेदभाव को बढ़ावा न दे। दलितों का हक़ उन्हें दिलाए और अपने स्तर पर ही भेदभाव रोकने की शुरुआत करे।

दलितों की श्रेणी आज के समय में भी इतनी पिछड़ी हुई है कि उन्हें अपने अधिकार एयर हक़ का कोई अता पता ही नहीं है। हैरानी की बात तो ये है कि बड़ी बड़ी बातें करने वाले लोगो को उनके अस्तित्व आउट जीवनशैली का कोई अंदाज़ा भी नहीं। उनकी पीड़ा और उनके दुखो का हम शायद अनुमान भी नहीं लगा सकते। हम भाग्यशाली है कि हमे एक बहुत ही सुखद जीवन मिला है। हमारे दर्द और परेशानियां हमारे किसी जात में पैदा होने के कारण नहीं है।

दलित समाज

पंजाब, तमिल नाडु और गुजरात जैसे राष्ट्रों में आज भी दलितों के प्रति ऐसी मान्यताएं है, जो आपको किसी भी तरह से आधुनिक युग का नहीं बतलाता। दलित जात वर्षो से अत्याचार सहता आ रहा है। कभी उनको दास या गुलाम बना के रखा जाता था तो कभी उनको उनकी औकात बता कर उनसे गंदे काम करवाए जाते। दलित औरतों को मारा पीटा जाता और उनका बलात्कार भी किया जाता। और ये कोई ऐसी बात नहीं है जो आप नहीं जानते।

हर किसी को सच मालुम है फिर भी सब चुपी लगाए हर चीज़ का मज़ा लिए जा रहे है। आखिर किसी को क्या फर्क पड़ता है। अब किसी भी व्यक्ति का किसी भी जात में पैदा होना महज़ हादसा था। किसी ने पहले चुनाव या निर्णय थोड़ी न लिया था। अगर किसी के पास भी ये हक़ या ये शक्ति होती तो शायद वही सबसे ताकतवर और सबसे ज़्यादा पूज्य व्यक्ति होता। ज़िन्दगी हमें वरणाधिकार देती तो शायद हम वही चुनते जो हमे सही लगता। पर ज़िन्दगज तो आने हिसाब से चलती है।

बदलाव की ज़रूरत

किसी भी व्यक्ति का दलित होना इस बात कर फैसला नहीं करता की वो किस काम के लायक है। अगर याज के समय में भी दलितों का हक़ उन्हें नही मिला तो शायद हम से ज़्यादा नाइंसाफी करने वाला कोई नहीं होगा। शुरआत खुद से करे। दलितों को बुलाए जाने वाले नामो से किसी को अपमानित ना करे। उदाहरण के लिए किसी को छुड़ा या चमार गाली या अपशब्द के रूप में ना कहे। सोच बदलने की कोशिश करे। देश अपने आप बेहतर हो जाएगा।

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साहित्य और कविताएँ

चलो आज याद करे महात्मा गांधी के अल्फाज़ो को

महात्मा गांधी के अल्फाज़ो की महत्व


महात्मा गांधी ने हमारे देश को आज़ाद करने के लिए बहुत कुछ किया। गांधी के लिए हमारे मन में जो इज़्ज़त है उसको कोई कम नहीं कर सकता। हमें उसने इतना प्यार था कि कब वो हम सब के बापू बन गए, पता ही नहीं चला। और शायद तभी बापू को इस राष्ट्र का पिता माना जाता है। उन्हें ये दर्जा बिलकुल सही मिला है। वो हमेशा से ही प्रेम और अहिंसा में विश्वास रखते थे। महात्मा गांधी के अल्फाज़ो की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती है। उनका हर लफ्ज़ आज हमारे लिए ज्ञान के समान है।

महात्मा गांधी

तो चलिए आज याद करे महात्मा गांधी के अल्फाज़ो को:-

  1. अपने दोष हम देखना नहीं चाहते और दूसरों के दोष देखने में हमें मज़ा आता है। बहुत सारे दुःख इसी कारण से पैदा होते है।
  2. विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता की जननी है।
  3. अपने प्रयोजन में दृढ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है।
  4. पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।
  5. मेरी अनुमति के बिना कोई भी मुझे ठेस नहीं पहुंचा सकता।
  6. आप मानवता में विश्वास मत खोइए। मानवता सागर की तरह है; अगर सागर की कुछ बूँदें गन्दी हैं, तो सागर गन्दा नहीं हो जाता।
  7. आप तब तक यह नहीं समझ पाते की आपके लिए कौन महत्त्वपूर्ण है जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
  8. पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं।
  9. हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें। हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा।
  10. जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जायेगी, दुनिया में अमन आ जायेगा।
  11. जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है।
  12. सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं। अन्य से पृथक रखने का प्रयास करे।
  13. जिज्ञासा के बिना ज्ञान नहीं होता | दुःख के बिना सुख नहीं होता।
  14. कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
  15.  खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं।
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लाइफस्टाइल

कैसे सुधारें अपना व्यक्तित्व

क्या आपको अपने व्यक्तित्व में कमी लगती हैं, उसे सुधारें ऐसे


हमारा व्यक्तित्व जीवनभर नयी परिस्थितियों और तजुरबे के साथ बदलता रहता है। पर ज़रूरी नही की सभी बदलाव हमारे व्यक्तित्व के लिए उचित हो। कई परिस्थित्याँ हमारे व्यक्तित्व को उठाने की जगह और नीचे गिरा देती हैं इसलिए यह ज़रूरी है की हम इस पर ध्यान रखें की किस प्रकार का व्यक्तित्व हमारे लिए अच्छा होगा।

एक अच्छी शख़्सियत उसे माना जाता है जो बदलाव के साथ अच्छे गुण लाए। किसी के लिए भी शख़्सियत में बदलाव वही उचित है जिसमें नकारात्मक लक्षण कम हो और सकारात्मक गुणों की बढ़ोतरी हो। हम जिस व्यक्तिव की बात कर रहे हैं वो असल में है क्या? यह मनुष्य की सोच, उसका बरताव है जो उसे बाक़ी सब लोगों से अलग बनाता है।

हर व्यक्ति यह चाहता है की बाक़ी लोग उससे आकर्षित हों। तो क्या अपने व्यक्तित्व को अपने अनुसार बदला जा सकता है? आइए जाने हम कैसे बदल सकते हैं अपने व्यक्तित्व को:-

यहां पढ़ें : जानिए क्या फर्क होता है एक अंतर्मुखी और बहिर्मुखी लोगो में

  1. सबसे पहले अपने सभी गुण अवगुण एक काग़ज़ पर लिख लें। जो आप अपने अंदर नही रखना चाहते उन्हें पेन्सल से काट दीजिए और जिन्हें आप मजबूत करना चाहते हैं उनपर सही का निशान लगा लें और फिर उनके काम करना शुरू करें। उदाहरण के तौर पर यदि आप शर्मीले हैं तो अपनी शर्म को कम करने पर काम करें।
  2. सबकी बातें ध्यान से सुने। आप बात करते हुए अपनी शख़्सियत का एक आइना लोगों के सामने रखते है। जब कभी सामने कोई बोल रहा हो तब यह बहुत ज़रूरी है की आप उसकी बात ध्यान से सुने वो भी दिलचस्पी से। यदि आप रुचि भी लेंगे तो आपका व्यक्तित्व ख़राब होगा।
  3. ज़्यादा से ज़्यादा किताबें पढ़ें और अपनी रुचि के क्षेत्र बढ़ायें। इससे आपकी एक आकर्षक छवि लोगों के सामने प्रस्तुत होगी और साथ ही साथ आपका शब्दों का ज्ञान बढ़ेगा जो लोगों से बात करती बार सहायक होता है।
  4. बात करने की कला को सीखें। आप जितने ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ बात करेंगे उतने ही ज़्यादा आकर्षक प्रतीत होंगे। लोग ऐसे व्यक्ति  बात करना पसंद नही करते जो ठीक से जवाब ना दे पायें और अपनी बातों को उत्साह से भरिए।
  5. अपना मत रखने की आदत बनाइए। जो लोग केवल दूसरे लोगों की हाँ में हाँ मिलाते हैं वे लोगों को पसंद नही आते। अपनी एक बहतेरीन छवि बनाने के लिए ख़ुद का मत रखना सीखें।
  6. आप अपने जैसे ही रहें। यदि आप किसी का स्टाइल चुरा कर अच्छे बनना चाहते हैं तो यह बहुत ग़लत है क्योंकि हर किसी की अलग विशेषताएँ होती हैं। आप अपनी विशेषताएँ अपने ही अंदर ढूँढने की कोशिश करिए वे अवश्य मिलेंगी।
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सोशल मीडिया के बाद कैसे बदल गए लोग

सोशल मीडिया के बाद का बदलाव


सोशल मीडिया के बाद हम लोग तो ऐसे बदले की हमारा अस्तित्व उस तक ही सीमित रह गया। हमने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी ये बड़ी सी दुनिया को एक छोटे से डब्बे में सीमित करके रख दिया। पहले हम अपने रिश्तेदारों से और दोस्तों से बात करते थे। उनके हाल चाल और ज़िन्दगी में बारे बात करके उनकी खबर रखते थे। पर अब हम उनके जीवन में चल रही गतिविधियों को लाइक करते है।

कैसे बदला सोशल मीडिया ने हमे

चलिए जानते है कि ऐसी क्या चीज़े थी जो सोशल मीडिया के बाद से बदल गई:-

  1. पहले के ज़माने में बच्चे सच में खेलने जाते थे। पर अब बच्चे सिर्फ फ़ोन पर ऑनलाइन गेम्स खेलते है।
  2. हमारी सारी मेहनत सिर्फ हमे और हमारे परिवार को पता होती थी। और आज हर छोटी से छोटी चीज़ सबको पता होती है। हर काम करने से पहले हम उसे पोस्ट जो कर देते है।
  3. जन्मदिन पर, पहले तोहफे खोलने की ख़ुशी होती थी। और अब, मैसेज और नोटिफिकेशन देख कर ही लोग खुश हो जाते है।
  4. लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए बहाने ढूंढते थे। पर अब उनके पास एक मैसेज भेजने की भी फुर्सत नहीं होती।
  5. हमारी सोच और दुनिया अब इसी तक सीमित है

    यहाँ पढ़ें : जानिए क्या होते है गेमिंग के फायदे और नुकसान

  6. पत्रों की जगह कब ई-मेल ने ले ली हमे पता ही नहीं चला। पहले ई-मेल मिलने की ख़ुशी होती थी और अब किसी दोस्त या रिश्तेदार का पत्र आजाए तो अचंभा होता है।
  7. कहीं घूमने जाने का मतलब होता था, परिवार के साथ मज़ा करना। सोशल मीडिया के बाद से इसका मतलब ही बदल गया है। अब सिर्फ घूमना तस्वीरो के लिए ज़रूरी है।
  8. लोगो की जीवनशैली का हिस्सा बनने की जगह, सोशल मीडिया ही लोगो की जीवन शैली बन गया।
  9. लोगो के लिए कोई भी खबर और जानकारी ढूँढना ज़्यादा आसान हो गया। पहले लोगो को समय लगता था, पर अब तो एक क्लिक में सब मिल जाता है।

सिर्फ परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से ही नहीं पर नए लोगो से भी जुड़ना आसान बना दिया। हम जितना लोगो से सोशल मीडिया के माध्यम स्व जुड़ते रहे, उतना ही हम उनसे दूर होते रहे है। सोशल मीडिया ने हमे इस दुनिया से जितना जोड़ा है उतना ही दूर भी कर दिया है। हमारी दुनिया जितनी सिमित होती गयी, उतनी ही उलझती भी गयी।

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जानिए आपको कौन सी चीज़े बदलनी है अभी के अभी

चीज़े बदलनी है, खुद को नहीं


ज़िंदगी की परिभाषा हर किसी के लिए अलग है| क्या करें, क्या ना करें, यह हम समझ ही नहीं पाते क्योंकि हमारे पास इसका कोई ज्ञान ही नहीं होता। अगर हम चाहे भी, तो भी अक्सर ऐसी चीज कर जाते हैं जो हमारे भाग पर बहुत गलत होती है इसलिए हमें जरुरत है कुछ चीजें बदलने की। अपनी ही कुछ आदतें बदलने की। इससे किसी और का नहीं पर हमारा ही फायदा होगा। हम एक बेहतर इंसान बन पाएंगे और एक ज्यादा सुलझी हुई और आसान जिंदगी जी पाएंगे।

तो जानिए क्या चीज़े बदलनी है :-

  1. हम अक्सर लोगों से बिना बात के माफी मांगते है। समझा जा सकता है की हम अपने रिश्ते को बचाने के लिए या दूसरों की इज्जत रखने के लिए हर बात के लिए माफी मांग लेते हैं। पर कुछ बातें या अवसर ऐसे होते हैं जहां हमें अपनी इज्जत को दाव पर रखकर दूसरों से माफी मांगनी पड़ती है। अपनी इज़्ज़त के बदले में कभी किसी से माफ़ी ना मांगे। सही गलत आप सभी समझते हैं तो इसलिए जहां सही लगे वही माफी मांगे।
  2. चीज़े बदलनी है, खुद को नहीं

    यहाँ पढ़ें : कुछ बनना ही है तो प्रशंसात्मक बने, आलोचनात्मक नहीं

  3. हर बात के लिए सफाई ना दे। आखिर क्यों आप को जरूरत पड़ती है हर बात की सफाई देने की? आपने जो किया वह आपकी मर्जी थी। वह आपने अपने लिए किया। किसी को सफाई पेश करके यह साबित करना कि आप सही थे, आपको गलत साबित कर देता है। सफाई हम तभी देते हैं जब हमें डर होता है कि हमने कुछ गलत किया है। अगर आप सही हैं तो सफाई क्यों देनी? समय अपने आप को सही साबित कर देगा।
  4. लोगों की आलोचना कर आप खुद की सोच का परिचय लोगों को दे देते है। लोगों की हर बात पर या उनकी आदतों के बारे में बातें कर के, उसका मजाक उड़ा कर आपको कभी कुछ नहीं मिलेगा आपकी सोच और छोटी होती चली जाएगी और अक्सर आलोचनात्मक लोग बहुत ही असुरक्षित महसूस करते हैं इसी वजह से वह दूसरों को नीचा दिखाते हैं ताकि वह खुद ऊपर आ सके।
  5. यहां पर हर व्यक्ति एक अलग इंसान है। उसकी पहचान और उसकी काबिलियत हर किसी से अलग है। जैसे आप सबसे अलग है वैसे ही वह भी सबसे अलग है। इसलिए आपको लोगों की तुलना करना छोड़ना होगा। आप जितना खुद को दूसरों के साथ देखेंगे उतना हारा हुआ महसूस करेंगे। आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि आप अपनी तुलना खुद से करें। हर व्यक्ति एक अलग जगह पर है, आप उन से तुलना नहीं कर सकते। हर किसी की कहानी अलग होती है इसलिए आप अपनी कहानी, जिंदगी, काबिलियत, सफलता, दुख या सुख की तुलना किसी और कि जिंदगी या उनकी कहानी से नहीं कर सकते।
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प्यार होने के बाद बदल जाती है लड़कियों की ये सारी आदतें

लडकियों को अपने मोबाइल से हो जाता है प्‍यार


ऐसा कहते है, जब किसी इंसान की जिन्‍दगी में प्‍यार आता है, तो प्यार इंसान को बदल देता है। अगर आप की जिन्‍दगी प्‍यार आया होगा तो आप ने भी अपने आप में कई बदलाव देखें होगें। मगर हर किसी में  अलग – अलग बदलाव आते है। प्‍यार में  आने के बाद कुछ लोग बहुत ज्यादा इमोशनल हो जाते है, तो कुछ लोग मैच्योर। कुछ लोग अचानक से ब्यूटी कॉन्शियस हो जाता है, तो कोई बेफिक्र हो जाता है।

अगर हम बात करें लड़कियों की तो जब लड़कियां प्‍यार के रिश्‍ते में आती है, तो लड़कियों में कई बदलाव देखने को मिलते है। जैसे उनकी बहुत सारी  हरकतें और कुछ आदतें बदल जाती हैं। वैसे तो प्‍यार में आए बदलाव हर किसी में अलग -अलग होते है, मगर कुछ बदलाव ऐसे होते है, जो हर लड़की में होते है। आज हम आप को बताएगें ऐसे ही कुछ बदलाव जो हर लड़की में देखने को मिलते है।

  • नींद थोड़ी कम आना

आप ने ये तो सुना ही होगा, कि प्यार होने पर नींद उड़ जाती है। जब किसी लड़की को प्‍यार होता है, तो वो लडकी देर रात तक जगना शुरू कर देती है। हर आदत हर लड़की की बदल जाती है। देर रात तक  अपने पार्टनर से फोन पर बातें करना, चैट करना उनकी आदत बन जाती है। साथ ही बातें करते-करते कब सवेरा हो जाता है, लड़कियों को ये पता ही नहीं चल पता है।

  • मोबाइल बना जाता है सीक्रेट

प्‍यार होने से पहले तो लडकियों को अपने मोबाइल कहां पड़ा है और कहां  है, इस की ख़बर भी नहीं होती है। लेकिन प्‍यार होते ही वो अपने मोबाइल को अपने आप से दूर भी नहीं होने देती । मोबाइल को लेकर वो  बहुत क्रेजी हो जाती है। लड़की के मोबाइल पर पासवर्ड ना हो ऐसा हो नहीं सकता है।

  • गानों की पसंद में बदलाव

प्यार के रिश्‍ते में आने पर लड़कियों की गाने की पसंद भी बदल जाती है। उन्‍हें हर रोमांटिक स्टोरी, लव-सॉन्ग अपना लगने लग जाता है