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‘तीन तलाक triple talaaq – लोकसभा में बिल की पेशी,जेडीयू (JDU) करेगा विरोध 

Triple Talaq to be presented in Lok Sabha


ट्रिपल तलाक़ बिल को भाजपा सरकार लोकसभा में पेश करने जा रही हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने पहले कार्यकाल में भारत की महिलाओं से जो वादा किया था, वो पूरा करने का समय आ आज्ञा हैं। आज ‘तीन तलाक’  ट्रिपल तलाक़ बिल को भाजपा सरकार लोकसभा में पेश करने जा रही हैं। आज चर्चा के बाद बिल को पारित किये जाने की संभावना जताई जा रही है। लोकसभा में बिल दोपहर 12.30 बजे पेश करने के बाद चर्चा का विषय रहेगा।  हाल ही में मिली आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा सरकार ने लोकसभाके पहले सत्र के पहले दिन ही तीन तलाक विधेयक का ड्राफ्ट पेश किया था।  आज के सदन के लिए सरकार ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है। इसके अनुसार सभी सांसदों का सदन में निश्चित समय पर उपस्थित होना होता है।

तीन तलाक़ बिल क्या हैं 
तीन तलाक़ ऐसा बिल है जिसमे तीन तलाक को अपराध बताया गया हैं और इसमें तीन   तलाक़ करने वाले व्यक्ति को अपराधी बताते हुए दोषी माने जाने का प्रावधान हैं। साथ ही व्यक्ति को जेल की सजा सुनाए जाने का प्रावधान है हालाँकि सज़ा की अवधि निश्चित नहीं हुई हैं।
जेडीयू (JDU) करेगा विरोध 
तीन तलाक बिल को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) बिल के मौजूदा स्वरूप को लेकर भाजपा सरकार का समर्थन नहीं करेगा। जेडीयू (JDU) संसद में आज इस बिल का विरोध करेगी। आपको बता दे कि इससे पहले भी जेडीयू तीन तलाक बिल पर अपना विरोध प्रकट कर चुकी है हालाँकि स्पष्ट रूप से कुछ नई नहीं था। जेडीयू सरकार का ये रुख इस कारण है कि सरकार ने इस बिल पर उनसे कोई चर्चा नहीं की थी।

विपक्षी दलों का विरोध

तीन तलाक(Triple talaq) बिल को लेकर कई विपक्षी दलों का कड़ा विरोध हो रहा है और मोदी सरकार को इसका सामन करना पड़ सकता हैं। लेकिन भाजपा सरकार के अनुसार सभी बराबर के हकदार है और उनके अनुसार मुस्लिम महिलाओं की स्थिति में सुधार और लैंगिक समानता के लिए यह कदम जरूरी है। इसी कदम को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी(BJP) ने लोकसभा के पहले सत्र के दौरान कांग्रेस(Congress) से  अपील की थी कि वह देश में समानता और समान नागरिक संहिता के लिए उनका सहयोग करें।

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केंद्र सरकार ट्रिपल तलाक के लिए लाएगा कानून

मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हो रहा है हनन


सोमवार को ट्रिपल तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय की कमी के कारण सिर्फ तीन तलाक पर ही सुनवाई होगी। लेकिन केंद्र चाहती है कि बहुविवाह और निकाह हलाला जैसे मुद्दों को भविष्य में सुनवाई के लिए खुला रखा जाएं।

सभी तरह के तलाक बुरे हैं

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस ललित ने अटॉर्नी जरनल मुकुल रोहतगी से पूछा कि अगर हम तीन तलाक खत्म करते है तो आगे क्या रास्ता है। इस बात का जवाब देते हुए अटॉर्नी जरनल ने कहा कि हम इसको लेकर एक कानून लाएंगे।

सुनवाई के दौरान रोहतगी ने कहा कि सभी प्रकार के तलाक बुरे हैं। इससे मुस्लिम महिलाओं को अधिकारों  का हनन हो रहा है।

वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने कहा कि वह इस देश में मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारो का संरक्षक है।

तीन तलाक

बाकी देशों में मुस्लिम महिलाओं के पास ज्यादा अधिकार है

आज हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि देश में मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार नहीं पा रहा है। जबकि दूसरे देशों में भारत के मुकाबले मुस्लिम महिलाओं के पास अधिकार है। तीन तलाक समाज, देश और दुनिया में मिल रहे अधिकारों से मुस्लिम महिलाओं को वंचित रखता है।

रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि तलाक का धर्म या धार्मिक प्रथा से कोई लेना देना नहीं।  देखना तो यह कि किसी के जीवन को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। कोर्ट पवित्र कुरान, गुरु ग्रंथ साहिब या गीता की व्याख्या करने के लिए नहीं है।

तीन तलाक असंवैधानिक है

इससे पहले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 सभी नागरिकों को बराबरी का हक देते हैं और इनकी रोशनी में तीन तलाक असंवैधानिक है। जेठमलानी ने दावा किया कि वो  बाकी मजहबों की तरह वो इस्लाम के भी छात्र है। उन्होंने हजरत मोहम्मद को ईश्वर के महानतम पैगंबरों में से एक बताया और कहा कि उनका संदेश तारीफ के काबिल है।

आपको बता दें ट्रिपल तलाक को लेकर 11 मई से पांच जजों की संवैधानिक पीठ सुनवाई कर रही है। जोकि 19 मई तक रोजाना चलने वाली है।

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ट्रिपल तलाक के कारण महिला की 12 साल जिदंगी बर्बाद

12 साल में तीन बार हुई तलाक


 

ट्रिपल तलाक, आजकल यह मुद्दा एक धर्म और जाति का ही नहीं ब्लकि पूरा देश के मुद्दा बन गया है। मुस्लिम समुदाय के महिलाओं को तीन तलाक के कारण कई तरह की परेशानियों को देखना पड़ता है। मात्र भर तीन बार तलाक, तलाक, तलाक बोलने से ही शादी जैसा पवित्र बंधन टूट जाता है।

केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही ट्रिपल तलाक का मामला महिलाओं में जोरों शोरों से उठाया है। यह मुद्दा उठने के बाद से ही घर के अंदर आवाज को दबाकर बैठी कई महिलाओं ने पीएम को इस कुरीति को खत्म करने की अपील की है। कई महिलाओं ने आगे आकर मीडिया को अपनी आपबीती भी बताई है।

सिर्फ बच्चे न होने पर मिला पहला तलाक

इस अंग्रेजी बेवसाइट की खबर के अनुसार एक मुस्लिम महिला को 12 साल में ट्रिपल तलाक के नाम पर तीन तलाक मिला है।

तीन तलाक के नाम पर यूपी की 35 वर्षीय तारा खान को तीन बार तलाक मिल चुका है। उसकी जिदंगी की परेशानी यही ही नहीं रुकी उसका चौथा पति भी उसे छोड़कर चला गया  है।

तारा खान का कहना है “बीते 12 साल मेरे लिए बहुत ही भयावह रहे हैं, अब मैं इसी जगह जाना चाहती हूं जहां यह सब न हो।“

तारा ने अपनी आपबीती बताती हुई कहा कि उसकी पहली शादी बरेली के ही जाहिद खान से हुई। सात साल की शादी में तारा का बच्चा नहीं हुआ, तो उसके पति ने एक छोटी महिला से शादी कर ली और मुझे  तलाक दे दिया।

ट्रिपल तलाक


 
रिश्तेदारों ने करवाई दूसरी शादी

पहली शादी टूट जाने के बाद वह अपने किसी रिश्तेदार के घर रहने लगी। इसी दौरान उसके रिश्तेदारों ने उसकी दूसरी शादी पप्पू खान करवा दी। पप्पू उसे बुरी तरीके से तंग किया करता था। जब तारा ने उसका विरोध किया तो उसने उसे छोड़ दिया।

दूसरे तलाक के बाद तारा अपने मामा के घर रहने लगी। यहां भी उसके मामा और भाई ने इतने लंबी जिदंगी अकेले कैसे काटेगी कहकर फिर से शादी करने को कहा। उन्हीं के कहने पर तारा की तीसरी शादी सोनू से हो गई। लेकिन इस  बार भी तारा की किस्मस साथ नहीं दी और सोनू और भी निकम्मा निकला। सोनू उसे मारता पीटता था। अचानक एकदिन वह तारा को उसके घर के बाहर छोड़कर चला गया। वहां छोड़कर जाने से पहले सोनू उसे तलाक दे चुका था।

तारा के  पांच भाई है

पिछले साल जुलाई में तारा की एक बार फिर शमशाद से शादी हुई। लेकिन शमशाद ने भी उसे छोड़ दिया।

तारा की जिदंगी बद से बत्तर हो गई है। तारा के पांच भाई है लेकिन कोई भी उस अपने साथ नहीं रखना चाहता है। उन्हें लगता है कि तारा उनके घर की बेइज्जती करती है इसलिए वह उसे अपने साथ नहीं रखते हैं।

तारा इन सब से परेशान हो चुकी है। वह कहती है कि मुस्लिम महिलाएं कहां जाएं क्या करें? अब मैं इन सब के साथ और नहीं लड़ सकती हूं।

अब तारा और शमशाद एक कॉउसलिंग के लिए जा रहे हैं ताकि अपने पारिवारिक जीवन को बचा सकें।