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कंडोम और इससे जुड़ी जानकारियां और मजेदार फैक्ट्स

कंडोम से जुडी कुछ ख़ास जानकारी


आजकल के समय में स्त्री-पुरुष दोनों के लिए कंडोम का उपयोग करना जरूरी है। वैसे तो सबको ही पता है की कंडोम का इस्तेमाल लोग किसलिए करते हैं। लेकिन फिर भी बता दें की ज्यादातर पुरुष और महिला गर्वधारण को रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करती हैं। वैसे तो मार्किट में गर्वधारण को रोकने के लिए कई तरह के पिल्स और नई-नई तरह की चीजें भी उपलब्ध है। ऐसे समय में जरुरी है की दोनों अपनी-अपनी जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रख कर गर्वनिरोध के सही तरीकों को जानें। ज्यादातर गर्वनिरोध की सारी जिम्मेदारी औरतों के ऊपर ही डाल दी जाती है, लकिन आज-कल के नए तकनीक के साथ पुरुष गर्वनिरोधक न सिर्फ अपनाने में आसन हैं बल्कि ये काफी कारगर भी है।

कंडोम

आज हम कंडोम से जुड़े कुछ खास बातों के बारे में बतायेंगे:-

  • सेक्स के दौरान हमेशा नए कंडोम का ही उपयोग करें। कंडोम की मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट को हमेशा ध्यान से पढ़ें।
  • कंडोम को कभी भी खीच कर या फुलाने की कोशिश न करें, क्यूंकि मैनुफैक्चर कंपनिया पहले से ही कई तरह के टेस्ट कर चुके होते हैं।
  • कंडोम को अप्लाई करने से पहले टिप पर स्पेस देना ना भूलें।
  • सेक्स शुरू करने के पहले ही कंडोम का अप्लाई करना अच्छा होता है। क्यूंकि सेक्स के दौरान ऐसा करना रिस्की हो सकता है।
  • इस बात को ध्यान में रखें की कंडोम सीधा या उल्टा खुल सकता है। इसीलिए ध्यान से सीधी तरफ से इसका उपयोग करे।
  • इस पर किसी और तरह का लुब्रिकेंट उपयोग न करें।
  • एक बार में हमेशा एक ही कंडोम का इस्तेमाल करें। कुछ लोग डबल सुरक्षा के लिए कभी-कभी दो-दो कंडोम का उपयोग करते हैं।
  • कंडोम के इस्तेमाल से आप किसी बीमारी या HIV जैसे रोगों से दूर रह सकते हैं।
  • डिस्चार्ज के बाद इसे सावधानी से फेंक दे ताकि सीमेन फैल ना सके।
  • हमेशा साधारण और बिना किसी फ्लेवर वाले कंडोम का इस्तेमाल करें। फ्लेवर सिर्फ एक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है, इससे क्वालिटी और सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता।
  • आप डॉटेड कंडोम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अगर इच्छा हो तो।
  • कंडोम को पॉकेट में या धुप में रखने से बचें क्यूंकि ऐसा करने से कंडोम के ख़राब होने के ज्यादा चांसेस होते हैं।
कंडोम

कुछ अजीब लेकिन मजेदार फैक्ट्स कंडोम के बारे में:-

  • स्वीडन में एक टाइम था जब एक कंडोम एम्बुलेंस हुआ करता था, जिससे अगर किसी को जरुरत हो तो वो एक विशेष नंबर डायल करके बुलाते थे।
  • ज्यादातर मार्किट में मिलने वाले कंडोम की लाइफ 4 साल तक होती है, लेकिन अगर उन्हें किसी ठन्डे जगह पे रखा जाये तो।
  • 39% हाई स्कूल के स्टूडेंट्स को काफी अच्छे से पता होता है की कंडोम का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
  • इलेक्ट्रिसिटी के द्वारा भी कंडोम का जाँच किया जाता है जिससे अगर इसमें कोई छिद्र हो तो उसका पता लगाया जा सके।
  • लगभग 40% महिलाएं खुद ही कंडोम खरीदती हैं। इससे पता चलता हैं कि वो अपने हेल्थ और खुद को लेकर काफी जागरूक हैं। इसके लिए उन्हें अपने पार्टनर पर निर्भर होने की जरुरत नही है।
  • 80% से ज्यादा पुरुषों ने ये माना है की उन्हें कंडोम का इस्तेमाल करना नहीं पसंद।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन ज़माने में भी लोगों को कंडोम के बारे में पता था।
  • कंडोम सबसे सस्ता गर्वनिरोध है।

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माँ ना बन पाने की कुछ खास वजह

लाइफस्टाइल और आनुवंशिकता हो सकते हैं इसके बड़े कारण


भारत में 25% महिलाएं अपने अनिमियत पीरियड्स और पीरियड्स से जुडें समस्यों से परेशान हैं और इनमे से 90% मामलों में बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पता। इस समस्या की चपेट में केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि युवतियां भी हैं। ऐसे में आजकल कम उम्र में ही कुछ ऐसी बिमारियाँ शरीर को घेर लेती हैं। जिनसे निकल पाना आसान नहीं होता। हर लड़की का सपना होता है की वो माँ बनें। अगर माँ बनने की उम्र में अगर महिलाएं माँ नहीं बन पति तो वो उसकी जिंदगी की सबसे बड़ा अभिशाप बन जाता है। दुनिया मनो रुकी हुई सी लगने लग जाती है। वैसे तो माँ न बन पाने के कई कारण हैं जिसमे से सबसे बड़ा कारण है ओवरिज का फेल हो जाना। अगर किसी भी महिला के साथ ये समस्या है तो उसे जल्द किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ को मिलना चाहिए।

माँ पिक्स

पीओएफ का मतलब होता है 40 की उम्र से पहले ओवरिज का सामान्य तरह से काम नहीं करना। ये ओवरिज सामान्य रूप से ऐसट्रोजन हर्मोने का निर्माण नहीं कर पाते या नियमित रूप से अंडे का रिलीज़ नहीं हो पता। इसे बाँझपन या बच्चे ना होने की आम समस्या कहते हैं। कई बार अपनी सही उम्र से पहले ओवरिज का फेल होने को भी मेनोपॉज से जोड़ दिया जाता है लेकिन ये दोनों समस्याएं बिलकुल अलग-अलग हैं। अगर किसी महिला का ओवरिज फेल हो गया है तो उसे अनिमियत पीरियड्स हो सकती है और वो गर्वधारण भी कर सकती है। उम्र से पहले मेनोपॉज का अर्थ है की माहवारी का स्थायी तौर पर रुक जाना और उसके बाद गर्भवती होना नामुमकिन है।

लाइफ स्टाइल और आनुवंशिकता है बड़ा कारण-

कुछ समय पहले से ही महिलाओ में ओवरिज के फेल होने के खतरे बढें हैं लेकिन पर्यावरण और लाइफ स्टाइल जैसे की धुम्रपान, शराब का सेवन, लम्बी और बड़ी बिमारियों जैसे जेनिटल टीवी, किमोथैरपी और रेडियोथैरपी होना भी इसके मुख्य कारण हैं। भारत में 30-40 आयु के लोगों में पीएफओं के मामले 0.1% है। ये आंकडें दिखने में नाममात्र के दिखतें हैं लेकिन 25% महिलाएं अनिमियत पीरियड्स और पीरियड्स से जुडें कई समस्यों से सामना कर रही हैं।

आज के बदलते पर्यावरण और लाइफ स्टाइल के कारण शरीर में कम उम्र की लड़कियां भी इस बिमारियों की चपेट में आ जाती हैं। लेकिन इस तरह की बिमारियों से बचने के लिए बेहतर है कि समय पर परिवार शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। अगर किसी भी ततः की दिक्कत आ रही हो तो अपना मेडिकल जाँच जरुर करवाएं।

आइवीएफ तकनीक-

एग डोनेशन के तकनीक को अपनाकर बच्चे की चाहत को पूरी की जा सकती है। इस तकनीक के बाद महिलाएं 35वर्ष के बाद भी गर्वधारण कर सकती हैं। ये तकनीक उन कपल्स के लिए चमत्कारी है जो इन बिमारियों की वजह से परेशान रहते हैं। ऐसे में महिलाओं को अपनी जीवन शैली नियंत्रित करने की खास जरुरत है। जिससे इन समस्यों से आसानी से बाहर निकला जा सके।

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