Vaibhav Sooryavanshi: ‘ऐसे नहीं चलेगा…’, जायसवाल विवाद पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर सख्त, ICC से की बड़ी मांग
Vaibhav Sooryavanshi, भारतीय क्रिकेट में इन दिनों मैदान पर खिलाड़ियों के आक्रामक व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच कोलंबो टेस्ट के दौरान हुई तनातनी पर ICC ने कार्रवाई तो की, लेकिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर इस सजा से संतुष्ट नहीं हैं।
Vaibhav Sooryavanshi : पहले वैभव सूर्यवंशी, अब यशस्वी जायसवाल… मैदान पर विवादों पर मांजरेकर ने उठाए सवाल
Vaibhav Sooryavanshi, भारतीय क्रिकेट में इन दिनों मैदान पर खिलाड़ियों के आक्रामक व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच कोलंबो टेस्ट के दौरान हुई तनातनी पर ICC ने कार्रवाई तो की, लेकिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर इस सजा से संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि ऐसी घटनाओं पर ज्यादा सख्ती जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों को भविष्य में इस तरह का व्यवहार दोहराने से रोका जा सके। मांजरेकर ने जायसवाल के मामले को कुछ महीने पहले वैभव सूर्यवंशी से जुड़े विवाद से भी जोड़ते हुए ICC और BCCI के रवैये पर सवाल उठाए हैं।

क्या है यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो का विवाद?
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट मैच कोलंबो में खेला जा रहा है। मुकाबले के पहले दिन भारत की पारी के दौरान 17वें ओवर में असिथा फर्नांडो ने यशस्वी जायसवाल को आउट किया। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच मैदान पर बहस हो गई। ICC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान हुआ और फिर दोनों के सिर आपस में टकराए। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।इस घटना को ICC ने खिलाड़ियों के बीच अनुचित शारीरिक संपर्क से जुड़े नियम के तहत देखा। दोनों पर ICC Code of Conduct के Article 2.12 के उल्लंघन का आरोप लगा। इसके बाद जायसवाल और फर्नांडो पर उनके मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और दोनों के खाते में एक-एक डिमेरिट पॉइंट जोड़ा गया।
ICC की सजा पर मांजरेकर क्यों नाराज?
पूर्व भारतीय बल्लेबाज और मशहूर कमेंटेटर संजय मांजरेकर को लगता है कि 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर खिलाड़ियों को इस तरह के व्यवहार के बाद आसानी से बच निकलने दिया जाता है, तो इससे उन्हें अपनी गलती दोहराने का मौका मिलता है।मांजरेकर के मुताबिक मामला सिर्फ एक खिलाड़ी को सजा देने का नहीं है, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत को संदेश देने का है। मैदान पर प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता स्वाभाविक है, लेकिन जब मामला शारीरिक टकराव तक पहुंच जाए तो अनुशासन की सीमा स्पष्ट होनी चाहिए।
‘पहले वैभव, अब जायसवाल’ क्यों कहा?
संजय मांजरेकर ने यशस्वी जायसवाल के मामले को वैभव सूर्यवंशी से जुड़े पुराने विवाद से जोड़ा है। जून 2026 में भारत ए और श्रीलंका ए के बीच मुकाबले के दौरान वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंका ए के खिलाड़ी विशेन हलंबगे के बीच विवाद हुआ था। सुपर ओवर में भारत ए की हार के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस हुई और वैभव ने हलंबगे को धक्का दिया था।उस मामले में वैभव और हलंबगे पर उनकी मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था। विवाद में भूमिका के लिए तिलक वर्मा और श्रीलंका के निरोशन डिकवेला पर भी कार्रवाई की गई थी। उस समय भी मांजरेकर ने वैभव के व्यवहार की आलोचना की थी और कहा था कि अगर वह टीम के कोच होते तो युवा बल्लेबाज को अगले मुकाबले से बाहर कर देते।यही वजह है कि जायसवाल के मामले के बाद मांजरेकर ने फिर से सख्त अनुशासन की जरूरत पर जोर दिया है।
मांजरेकर का कहना है- सजा का असर दिखना चाहिए
मांजरेकर की चिंता यह है कि क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों के लिए मैदान पर वरिष्ठ और स्थापित खिलाड़ियों का व्यवहार एक उदाहरण बनता है। अगर किसी खिलाड़ी को शारीरिक टकराव के बाद केवल मामूली आर्थिक दंड मिलता है, तो दूसरे खिलाड़ी भी इसे गंभीरता से न लेने लगें।उनका तर्क है कि खिलाड़ियों को यह समझना जरूरी है कि प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता क्रिकेट का हिस्सा हो सकती है, लेकिन शारीरिक संपर्क और व्यक्तिगत टकराव स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। खासकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों से अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
ICC के नियम क्या कहते हैं?
ICC के Code of Conduct के तहत Level 1 के अपराधों में आधिकारिक चेतावनी से लेकर मैच फीस के अधिकतम 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट पॉइंट दिए जा सकते हैं। जायसवाल और फर्नांडो को 25 प्रतिशत मैच फीस और एक-एक डिमेरिट पॉइंट मिला है, यानी यह Level 1 के दायरे में दी गई सजा है।ICC के नियमों के अनुसार यदि कोई खिलाड़ी 24 महीने की अवधि में चार या उससे ज्यादा डिमेरिट पॉइंट हासिल करता है, तो ये सस्पेंशन पॉइंट में बदल सकते हैं। दो सस्पेंशन पॉइंट एक टेस्ट या दो वनडे/टी20 मुकाबलों के प्रतिबंध के बराबर होते हैं, जो खिलाड़ी के अगले लागू मैच पर निर्भर करता है।इसका मतलब यह है कि जायसवाल को फिलहाल किसी मैच से निलंबित नहीं किया गया है, लेकिन उनके रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट जुड़ गया है।
क्या जायसवाल की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है?
विवाद के बाद जायसवाल के व्यवहार पर कई पूर्व क्रिकेटरों ने सवाल उठाए। दूसरी ओर, जायसवाल ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी घटना पर राय बनाने से पहले यह जानना जरूरी है कि वास्तव में मैदान पर क्या कहा गया था।यही पहलू क्रिकेट में स्लेजिंग और उसके जवाब को लेकर बहस को और दिलचस्प बनाता है। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच बातचीत और उकसावे की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन जब बातचीत शारीरिक टकराव में बदल जाए तो मामला गंभीर हो जाता है।
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क्या सिर्फ जायसवाल ही विवाद में रहे?
कोलंबो टेस्ट में अनुशासन से जुड़े विवाद का यह अकेला मामला नहीं रहा। श्रीलंका के स्पिनर प्रभात जयसूर्या पर भी ICC ने कार्रवाई की। उन्हें दूसरे दिन आउट होने के बाद गुस्से में सीमा रेखा के पास लगे उपकरण पर बल्ला मारने के कारण आधिकारिक चेतावनी दी गई और एक डिमेरिट पॉइंट मिला। ICC ने इसे Code of Conduct के Article 2.2 के तहत Level 1 का उल्लंघन माना।इस तरह भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में मैदान पर खिलाड़ियों के व्यवहार और अनुशासन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
मांजरेकर की चिंता क्यों महत्वपूर्ण है?
संजय मांजरेकर का सवाल सिर्फ जायसवाल या वैभव सूर्यवंशी तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि क्रिकेट की संस्थाएं खिलाड़ियों के व्यवहार के लिए स्पष्ट और मजबूत संदेश दें। उनका मानना है कि अगर ऐसी घटनाओं को हल्के में लिया गया तो खिलाड़ी भविष्य में भी ऐसी गलतियां दोहरा सकते हैं।खासकर वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी के मामले में अनुशासन को लेकर सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। 15 वर्षीय क्रिकेटर के लिए मैदान पर व्यवहार भी उसके क्रिकेटिंग विकास का हिस्सा है। वहीं जायसवाल जैसे स्थापित अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज से भी उम्मीद रहती है कि वह दबाव और उकसावे की स्थिति में खुद पर नियंत्रण रखें।
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आगे क्या होगा?
फिलहाल यशस्वी जायसवाल पर ICC की ओर से घोषित कार्रवाई 25 प्रतिशत मैच फीस के जुर्माने और एक डिमेरिट पॉइंट तक सीमित है। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी, इसलिए औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।संजय मांजरेकर की मांग के बाद बहस जरूर तेज हो गई है कि क्या Level 1 के ऐसे मामलों में और कड़ी सजा होनी चाहिए। हालांकि, मौजूदा ICC नियमों के तहत दी गई सजा निर्धारित दायरे में है।कुल मिलाकर, ‘पहले वैभव, फिर जायसवाल’ वाली मांजरेकर की टिप्पणी भारतीय क्रिकेट में अनुशासन को लेकर एक बड़ी बहस की ओर इशारा करती है। क्रिकेट में जुनून और आक्रामकता जरूरी हैं, लेकिन खिलाड़ियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मैदान पर मुकाबला बल्ले और गेंद से हो तो खेल की खूबसूरती बनी रहती है; लेकिन जब बात व्यक्तिगत टकराव तक पहुंचती है, तो कार्रवाई और अनुशासन दोनों जरूरी हो जाते हैं।
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