Parinirvana Day 2026: परिनिर्वाण दिवस, भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण की स्मृति में पावन दिन
Parinirvana Day 2026 परिनिर्वाण दिवस (निर्वाण दिवस) 2026 बौद्ध धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण अर्थात् देह त्याग कर पूर्ण निर्वाण को प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है।
Parinirvana Day 2026 : Nirvana Day 2026, परिनिर्वाण का अर्थ और बौद्ध धर्म में इसका महत्व
Parinirvana Day 2026 परिनिर्वाण दिवस (निर्वाण दिवस) 2026 बौद्ध धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण अर्थात् देह त्याग कर पूर्ण निर्वाण को प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। हर वर्ष यह पर्व 15 फरवरी को दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा श्रद्धा, ध्यान और करुणा भाव के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी परिनिर्वाण दिवस शांति, आत्मचिंतन और मानवता के संदेश को पुनः स्मरण कराने का अवसर बनेगा।
परिनिर्वाण का अर्थ और महत्व
‘निर्वाण’ का अर्थ है दुख, अज्ञान और पुनर्जन्म के चक्र से पूर्ण मुक्ति। जब कोई व्यक्ति समस्त आसक्तियों से मुक्त होकर परम सत्य को जान लेता है, तब वह निर्वाण की अवस्था को प्राप्त करता है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवनकाल में ज्ञान प्राप्ति (बोधि) के बाद करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश दिया। परिनिर्वाण उस अवस्था को कहते हैं, जब बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में देह त्याग कर अंतिम मुक्ति प्राप्त की। यह दिन शोक का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पूर्णता और शांति का उत्सव माना जाता है।
भगवान बुद्ध का अंतिम उपदेश
परिनिर्वाण से पूर्व भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों को महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने कहा “अप्प दीपो भव” अर्थात् अपना दीपक स्वयं बनो। इसका अर्थ है कि मनुष्य को बाहरी सहारे पर निर्भर रहने के बजाय आत्मबोध, नैतिकता और करुणा के मार्ग पर स्वयं चलना चाहिए। उनका अंतिम उपदेश आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक है अनित्यता को स्वीकार करना और अहिंसा, सत्य तथा करुणा के साथ जीना।
परिनिर्वाण दिवस 2026 कैसे मनाया जाएगा
परिनिर्वाण दिवस पर बौद्ध अनुयायी मंदिरों और विहारों में एकत्र होकर ध्यान, प्रार्थना और धम्म चर्चा करते हैं। इस दिन की प्रमुख परंपराएं इस प्रकार हैं—
- भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण
- ध्यान और मौन साधना
- त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म, संघ) का स्मरण
- करुणा और दान का अभ्यास
कई देशों में इस दिन सफेद वस्त्र पहनने की परंपरा है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
अहिंसा और करुणा का संदेश
परिनिर्वाण दिवस का मूल संदेश अहिंसा, करुणा और समभाव है। बुद्ध ने जीवन भर हिंसा का विरोध किया और सभी जीवों के प्रति दया का भाव रखने की शिक्षा दी। आज के समय में, जब दुनिया तनाव, संघर्ष और असहिष्णुता से जूझ रही है, परिनिर्वाण दिवस हमें याद दिलाता है कि शांति बाहर नहीं, भीतर से शुरू होती है।
अनित्यता का बोध
भगवान बुद्ध के उपदेशों का एक केंद्रीय तत्व है अनित्यता (अनिच्चा)। इसका अर्थ है कि संसार की हर वस्तु परिवर्तनशील है। सुख-दुख, जीवन-मृत्यु सब क्षणभंगुर हैं। परिनिर्वाण दिवस हमें यह सिखाता है कि यदि हम इस सत्य को समझ लें, तो आसक्ति और दुःख से मुक्त होकर एक संतुलित जीवन जी सकते हैं।
विश्वभर में परिनिर्वाण दिवस का महत्व
भारत, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, जापान, चीन, कोरिया और वियतनाम जैसे देशों में परिनिर्वाण दिवस बड़े श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। भारत में कुशीनगर जहां भगवान बुद्ध ने परिनिर्वाण प्राप्त किया विशेष रूप से इस दिन का केंद्र होता है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु एकत्र होकर बुद्ध को नमन करते हैं।
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आधुनिक जीवन में परिनिर्वाण दिवस की प्रासंगिकता
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक तनाव, असंतोष और हिंसा से घिरे हुए हैं। ऐसे में परिनिर्वाण दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि—
- क्या हम करुणा के साथ जी रहे हैं?
- क्या हम अपने मन को शांत रखने का प्रयास करते हैं?
- क्या हम दूसरों के दुःख को समझते हैं?
बुद्ध का मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था।
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युवाओं के लिए प्रेरणा
परिनिर्वाण दिवस युवाओं को आत्मअनुशासन, धैर्य और नैतिक जीवन की प्रेरणा देता है। यह दिन सिखाता है कि सच्ची सफलता बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और संतुलन में है।परिनिर्वाण दिवस (निर्वाण दिवस) 2026 भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को आत्मसात करने का एक पावन अवसर है। यह दिन हमें जीवन की अनित्यता को स्वीकार कर करुणा, अहिंसा और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यदि हम बुद्ध के उपदेशों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं, तो न केवल हमारा जीवन शांतिपूर्ण होगा, बल्कि समाज और विश्व में भी सद्भाव और शांति का विस्तार होगा।परिनिर्वाण दिवस हमें याद दिलाता है शांति का मार्ग भीतर से होकर जाता है।
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