Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती 2026 कब है? इतिहास, महत्व और पूजा विधि
Mahavir Jayanti 2026, महावीर जयंती जैन धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार है। यह दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
Mahavir Jayanti 2026 : महावीर जयंती 2026, क्यों खास है यह दिन, जानें पूरी कहानी
Mahavir Jayanti 2026, महावीर जयंती जैन धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार है। यह दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में महावीर जयंती पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व केवल जैन समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश लेकर आता है।
भगवान महावीर का जन्म और प्रारंभिक जीवन
भगवान महावीर का जन्म ईसा पूर्व 599 में वैशाली गणराज्य के कुंडलपुर में हुआ था, जो वर्तमान में बिहार राज्य में स्थित है। उनके पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला लिच्छवि वंश के शासक थे। जन्म के समय उनका नाम वर्धमान रखा गया। बचपन से ही वे अत्यंत शांत, गंभीर और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे।कहा जाता है कि बचपन में ही उन्होंने असाधारण साहस और संयम का परिचय दिया, जिसके कारण उन्हें ‘महावीर’ की उपाधि मिली। राजसी जीवन और सभी सुख-सुविधाओं के बावजूद उनका मन संसारिक मोह-माया से दूर रहता था।
तपस्या और ज्ञान की प्राप्ति
30 वर्ष की आयु में भगवान महावीर ने राज-पाट और परिवार का त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया। इसके बाद उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक कठोर तपस्या और ध्यान किया। अनेक कष्टों और कठिनाइयों को सहते हुए उन्होंने आत्मज्ञान की प्राप्ति की।ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ‘जिन’ कहलाए, जिसका अर्थ है – इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने वाला। उन्होंने जीवन भर सत्य, अहिंसा और करुणा का प्रचार-प्रसार किया।
महावीर जयंती का महत्व
महावीर जयंती का उद्देश्य केवल जन्मोत्सव मनाना नहीं है, बल्कि उनके बताए सिद्धांतों को जीवन में अपनाना भी है। भगवान महावीर ने पंचमहाव्रतों का संदेश दिया—
- अहिंसा
- सत्य
- अस्तेय (चोरी न करना)
- ब्रह्मचर्य
- अपरिग्रह
इन सिद्धांतों का पालन करके व्यक्ति आत्मशुद्धि और मोक्ष की दिशा में अग्रसर हो सकता है। आज के समय में जब समाज हिंसा, लालच और असत्य की समस्याओं से जूझ रहा है, महावीर के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।
महावीर जयंती 2026 कब है?
साल 2026 में महावीर जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।भक्तगण प्रभात फेरी निकालते हैं और भगवान महावीर की शोभायात्रा सजाई जाती है। मंदिरों को सुंदर फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। श्रद्धालु दान-पुण्य और सेवा कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती?
इस पावन अवसर पर जैन समाज के लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा का जल, दूध और चंदन से अभिषेक किया जाता है।शोभायात्राओं में भगवान की प्रतिमा को रथ पर सजाकर नगर भ्रमण कराया जाता है। भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से उनके उपदेशों का प्रचार किया जाता है।इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान किए जाते हैं। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर और चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
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भगवान महावीर के उपदेश
भगवान महावीर ने सिखाया कि हर जीव में आत्मा होती है और सभी प्राणियों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म बताया।उनका संदेश था कि क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से दूर रहकर ही व्यक्ति सच्चे सुख और शांति को प्राप्त कर सकता है। उनका जीवन सादगी, त्याग और आत्मसंयम का प्रतीक है।
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आज के समय में प्रासंगिकता
आज के आधुनिक युग में जहां प्रतिस्पर्धा और भौतिकवाद बढ़ रहा है, वहां भगवान महावीर का संदेश हमें संयम और संतुलन का मार्ग दिखाता है। पर्यावरण संरक्षण, पशु अधिकार और शांति की दिशा में उनके विचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।अहिंसा का सिद्धांत केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं है, बल्कि विचार और वाणी में भी कोमलता अपनाना है। यदि हम उनके उपदेशों को अपने जीवन में लागू करें, तो समाज में प्रेम और भाईचारे की भावना मजबूत हो सकती है। महावीर जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्ची महानता शक्ति में नहीं, बल्कि संयम और करुणा में होती है। साल 2026 में महावीर जयंती के अवसर पर हमें भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे मूल्यों को जीवन में उतारकर ही हम एक बेहतर और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं।
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