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Guru Nanak Jayanti 2026: गुरु नानक जयंती 2026 कब है? जानें शुभ तिथि, इतिहास, महत्व और गुरु की अनमोल शिक्षाएं

Guru Nanak Jayanti 2026, सिख धर्म के प्रथम गुरु और महान आध्यात्मिक संत गुरु नानक देव जी की जयंती हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इसे गुरु नानक जयंती, गुरुपुरब या गुरु नानक प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। यह सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है।

Guru Nanak Jayanti 2026 : लंगर से लेकर नगर कीर्तन तक, जानें इस पर्व की खास परंपराएं

Guru Nanak Jayanti 2026, सिख धर्म के प्रथम गुरु और महान आध्यात्मिक संत गुरु नानक देव जी की जयंती हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इसे गुरु नानक जयंती, गुरुपुरब या गुरु नानक प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। यह सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास, लंगर और नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है। Guru Nanak Jayanti 2026 भी देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि गुरु नानक देव जी के प्रेम, समानता, सेवा, ईमानदारी और मानवता के संदेश को याद करने का अवसर भी है।

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गुरु नानक जयंती 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। 2026 में गुरु नानक जयंती 24 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।इस दिन सिख समुदाय के लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और गुरुद्वारे में जाकर गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकते हैं। कई जगहों पर जयंती से एक या दो दिन पहले प्रभात फेरी और नगर कीर्तन निकाले जाते हैं।

गुरु नानक देव जी कौन थे?

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में तलवंडी में हुआ था, जिसे आज पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। उनके पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम माता तृप्ता था।बचपन से ही गुरु नानक देव जी का झुकाव आध्यात्मिकता और मानव सेवा की ओर था। उन्होंने समाज में मौजूद जाति-पाति, भेदभाव और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया और लोगों को सच्चाई, प्रेम तथा समानता का मार्ग दिखाया।गुरु नानक देव जी ने लोगों को समझाया कि ईश्वर एक है और सभी मनुष्य उसकी संतान हैं। उनके विचारों ने आगे चलकर सिख धर्म की नींव को मजबूत किया।

गुरु नानक देव जी के तीन प्रमुख सिद्धांत

गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं में जीवन को सही दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं। इनमें तीन सिद्धांत विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

1. नाम जपो

गुरु नानक देव जी ने लोगों को ईश्वर का स्मरण करने और आध्यात्मिक जीवन जीने का संदेश दिया। नाम जपो का अर्थ है ईश्वर के नाम का ध्यान करना और अपने मन को सकारात्मक एवं आध्यात्मिक विचारों से जोड़ना।

2. किरत करो

किरत करो का अर्थ है ईमानदारी से मेहनत करके जीवन यापन करना। गुरु नानक देव जी ने मेहनत और सच्चाई से कमाई करने को बहुत महत्व दिया। उनका संदेश था कि व्यक्ति को गलत तरीके से धन कमाने के बजाय अपने श्रम पर भरोसा करना चाहिए।

3. वंड छको

वंड छको यानी अपनी कमाई और भोजन को जरूरतमंदों के साथ बांटना। गुरु नानक देव जी ने सेवा और परोपकार को मानव जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसी भावना को आज गुरुद्वारों में होने वाले लंगर में भी देखा जा सकता है।

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गुरु नानक जयंती का महत्व

गुरु नानक जयंती का महत्व केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है। गुरु नानक देव जी ने मानवता और समानता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि इंसान की पहचान उसकी जाति, धर्म, भाषा या सामाजिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके कर्मों से होती है।उनकी शिक्षाएं आज भी समाज में भाईचारे, प्रेम और सद्भाव बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं। यही वजह है कि गुरु नानक जयंती को भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

गुरुद्वारों में होते हैं विशेष आयोजन

गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया जाता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ, शबद-कीर्तन और अरदास जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।कई गुरुद्वारों में अखंड पाठ भी कराया जाता है। यह गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार पाठ होता है, जिसे निर्धारित समय में पूरा किया जाता है।

नगर कीर्तन और प्रभात फेरी

गुरु नानक जयंती से पहले कई शहरों में प्रभात फेरी निकाली जाती है। श्रद्धालु सुबह-सुबह भजन और शबद गाते हुए विभिन्न इलाकों से गुजरते हैं।इसके अलावा नगर कीर्तन भी इस पर्व का प्रमुख आकर्षण होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। पंच प्यारे और गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है। रास्ते में लोग श्रद्धालुओं के लिए पानी, भोजन और अन्य सेवाओं की व्यवस्था करते हैं।

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लंगर की परंपरा

गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन विशेष महत्व रखता है। लंगर में हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं।इस परंपरा का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सभी इंसान बराबर हैं। भोजन तैयार करने से लेकर लोगों को परोसने तक श्रद्धालु सेवा भावना से काम करते हैं। लंगर गुरु नानक देव जी की समानता और सेवा की शिक्षाओं का जीवंत उदाहरण माना जाता है।

गुरु नानक देव जी की यात्राएं

गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन में कई लंबी यात्राएं कीं। इन यात्राओं को उदासियां कहा जाता है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा कर लोगों को प्रेम, सत्य, समानता और ईश्वर की एकता का संदेश दिया।उनकी यात्राओं के दौरान उन्होंने धार्मिक कट्टरता और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं पर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने समाज को बाहरी आडंबरों के बजाय अच्छे कर्म और सच्चे आचरण पर ध्यान देने की प्रेरणा दी।

गुरु नानक जयंती कैसे मनाएं?

गुरु नानक जयंती के दिन लोग गुरुद्वारे जाकर मत्था टेक सकते हैं, शबद-कीर्तन सुन सकते हैं और लंगर सेवा में हिस्सा ले सकते हैं। जरूरतमंदों की मदद करना, भोजन बांटना और समाज के लिए सेवा करना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप है।इस दिन गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना भी महत्वपूर्ण है।

गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक

आज के समय में जब समाज में असमानता, तनाव और भेदभाव जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं बेहद प्रासंगिक दिखाई देती हैं। उनका संदेश ईमानदारी से काम करने, जरूरतमंदों की मदद करने और सभी मनुष्यों को समान समझने की प्रेरणा देता है।उनकी शिक्षाओं का मूल भाव यही है कि इंसान को अपने कर्मों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।Guru Nanak Jayanti 2026 गुरु नानक देव जी के जीवन और उनकी महान शिक्षाओं को याद करने का पवित्र अवसर है। 24 नवंबर 2026 को मनाया जाने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं को प्रेम, समानता, सेवा और ईमानदारी का संदेश देगा।गुरु नानक देव जी का संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है—ईश्वर एक है, सभी मनुष्य समान हैं और सच्चे कर्म व मानव सेवा ही जीवन का वास्तविक आधार हैं। यही गुरु नानक जयंती का सबसे बड़ा संदेश है।

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