Govardhan Puja 2026: गोवर्धन पूजा 2026 की तारीख हुई तय, जानें कब करें पूजा और क्या है इसका महत्व
Govardhan Puja 2026, गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे दिवाली के अगले दिन मनाने की परंपरा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा की जाती है।
Govardhan Puja 2026 : गोवर्धन पूजा 2026 कब है? जानें कृष्ण की गोवर्धन लीला और अन्नकूट उत्सव की खास बातें
Govardhan Puja 2026, गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे दिवाली के अगले दिन मनाने की परंपरा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा की जाती है। ब्रज क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवानों और व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
Govardhan Puja 2026 कब है?
साल 2026 में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच तिथि को लेकर स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए पूजा का सटीक मुहूर्त अपने शहर के पंचांग के अनुसार देखना उचित रहता है।
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रज के लोग हर साल भगवान इंद्र की पूजा करते थे और अच्छी बारिश की कामना करते थे। श्रीकृष्ण ने लोगों को समझाया कि उन्हें अपने जीवन और आजीविका के लिए गोवर्धन पर्वत, प्रकृति और गौवंश का आभार व्यक्त करना चाहिए।इसके बाद ब्रजवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे नाराज होकर इंद्र देव ने भारी बारिश शुरू कर दी। लगातार वर्षा से ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी लोगों को उसके नीचे शरण दी।कई दिनों तक ब्रजवासियों को सुरक्षित रखने के बाद इंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा मनाने की परंपरा मानी जाती है।
अन्नकूट के रूप में भी मनाया जाता है पर्व
गोवर्धन पूजा को कई जगहों पर अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को बड़ी संख्या में अलग-अलग तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसमें सब्जियां, मिठाइयां, अनाज, फल और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं।मंदिरों में अन्नकूट का भव्य आयोजन किया जाता है। कई स्थानों पर तरह-तरह के व्यंजनों से भगवान के सामने अन्नकूट सजाया जाता है। भक्त इसे भगवान के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति से मिलने वाले अन्न के सम्मान के रूप में देखते हैं।
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घर पर कैसे बनाएं गोवर्धन पर्वत?
गोवर्धन पूजा के दिन घर के आंगन या पूजा स्थल पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाने की परंपरा है। इसके ऊपर फूल, पत्तियां और अन्य पूजा सामग्री सजाई जाती है। कुछ लोग मिट्टी या अन्य प्राकृतिक सामग्री से भी गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाते हैं।इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के साथ गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। पूजा में रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप और नैवेद्य आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
गोवर्धन पूजा की सरल विधि
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें। गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाएं और उसे फूलों से सजाएं।भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को पूजा स्थल पर स्थापित करें। दीपक और धूप जलाकर भगवान का ध्यान करें। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।गोवर्धन पर्वत की पूजा के बाद उसकी परिक्रमा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोवर्धन की परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। इसके बाद अन्नकूट का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाता है।
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गौ पूजा का भी है विशेष महत्व
गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौ माता की पूजा करने की भी परंपरा है। विशेष रूप से ग्रामीण और ब्रज क्षेत्रों में इस दिन गायों को स्नान कराया जाता है और उन्हें सजाया जाता है। उनके सींगों पर रंग या सजावटी वस्तुएं लगाई जाती हैं और फूलों की माला पहनाई जाती है।गायों को गुड़, हरा चारा और अन्य खाद्य सामग्री खिलाई जाती है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है और गोवर्धन पूजा प्रकृति, पशुधन और कृषि जीवन के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है।
गोवर्धन पूजा और प्रकृति का संबंध
गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के महत्व को भी दर्शाती है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा का संदेश यह माना जाता है कि मनुष्य को अपने आसपास मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। पर्वत, पेड़-पौधे, जल, पशु और कृषि ये सभी मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अन्नकूट के माध्यम से अन्न और खाद्य पदार्थों के प्रति सम्मान की भावना भी व्यक्त की जाती है।
ब्रज में खास होता है गोवर्धन उत्सव
उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने पहुंचते हैं। लगभग 21 किलोमीटर लंबी गोवर्धन परिक्रमा धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।इस दौरान रास्ते में आने वाले मंदिरों में दर्शन और पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा के अवसर पर ब्रज में विशेष धार्मिक कार्यक्रम और भंडारे भी आयोजित किए जाते हैं।
पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
गोवर्धन पूजा के दौरान साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री को श्रद्धा के साथ तैयार करें और भगवान को ताजा भोजन का भोग लगाएं। यदि घर में गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाया जा रहा है तो पूजा के बाद उसे सम्मानपूर्वक विसर्जित या निर्धारित स्थान पर रखने की स्थानीय परंपरा का पालन करें।अन्नकूट में भोजन की बर्बादी से बचना भी जरूरी है। जरूरतमंद लोगों को भोजन या प्रसाद बांटना इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है।
Govardhan Puja 2026 का संदेश
गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, अन्न, पशुधन और पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला यह याद दिलाती है कि जीवन में अहंकार से अधिक महत्वपूर्ण प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी है।साल 2026 में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा के साथ अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। भक्त इस पर्व को परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के भाव के साथ मनाएंगे।
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