West Bengal Elections 2026: EC का फैसला वैध, काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों पर TMC की याचिका खारिज
West Bengal Elections 2026 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली TMC की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने EC के फैसले को पूरी तरह वैध और पारदर्शी बताया।
West Bengal Elections 2026: कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC की याचिका खारिज कर मतगणना प्रक्रिया को बताया वैध
West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच मतगणना प्रक्रिया को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मतगणना में केवल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी।
West Bengal Elections 2026 का क्या था पूरा मामला?
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग द्वारा मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों की नियुक्ति निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है। पार्टी की ओर से सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह फैसला पारदर्शिता के खिलाफ है और इसमें राजनीतिक प्रभाव की आशंका हो सकती है।
EC के अधिकारों को मिली मान्यता
West Bengal Elections 2026 कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि:
- चुनाव आयोग को मतगणना प्रक्रिया तय करने का पूरा अधिकार है
- केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह वैध है
- इस फैसले में कोई कानूनी खामी नहीं है
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि केवल राज्य सरकार के कर्मचारी ही मतगणना में शामिल होंगे।
West Bengal Elections 2026 की पारदर्शिता पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने TMC की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मतगणना प्रक्रिया में पहले से ही कई सुरक्षा उपाय मौजूद हैं:
- माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति
- CCTV निगरानी
- राजनीतिक दलों के एजेंटों की मौजूदगी
इन सभी व्यवस्थाओं के चलते प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहती है।
राजनीतिक प्रभाव के आरोप पर क्या बोला कोर्ट?
TMC ने यह भी आशंका जताई थी कि केंद्रीय कर्मचारी राजनीतिक प्रभाव में काम कर सकते हैं।
इस पर कोर्ट ने कहा:
मतगणना हॉल में कई स्टेकहोल्डर्स मौजूद रहते हैं, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना बेहद कम हो जाती है। आरोप केवल आशंकाओं पर आधारित हैं, जिनके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।
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चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप पर सख्त रुख
कोर्ट ने दो टूक कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी को मतगणना या चुनाव परिणाम पर आपत्ति है, तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत चुनाव याचिका दायर कर सकता है।
निष्कर्ष
इस फैसले के साथ यह साफ हो गया है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर न्यायपालिका का भरोसा कायम है। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में अब मतगणना बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे बढ़ेगी। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह फैसला चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करता है।
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