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पॉलिटिक्स

Godhra Riots: सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा कांड के 8 दोषियों को दी राहत की सांस

गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी के मामले में आठ दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आठ दोषियों को जमानत दे दी है।

Godhra Riots: इन सभी दोषियों को 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर जमानत मिली

Godhra Riots: 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के कोच में आग लगाकर 59 लोगों की हत्या के दोषी 8 लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। इन सभी लोगों को निचली अदालत और हाई कोर्ट से उम्र कैद की सजा मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर जमानत दी है। हालांकि, कोर्ट ने ऐसे 4 लोगों को जमानत से मना कर दिया है जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सज़ा दी थी और हाई कोर्ट ने उसे उम्र कैद में बदल दिया था।

जिन लोगों को जमानत मिली है, उनके नाम हैं- अब्दुल सत्तार गद्दी, यूनुस अब्दुल हक, मो. हनीफ, अब्दुल रउफ, इब्राहिम अब्दुल रज़ाक़, अयूब अब्दुल गनी, सोहेब यूसुफ और सुलेमान अहमद। इन सभी लोगों पर ट्रेन में जल रहे लोगों को बाहर आने से रोकने का दोष साबित हुआ है। जिन 4 लोगों को रिहा करने से कोर्ट ने मना कर दिया है, वह हैं- अनवर मोहम्मद, सौकत अब्दुल्ला, मेहबूब याकूब मीठा और सिद्दीक मोहम्मद मोरा। इन पर हत्या में सीधे शामिल होने का दोष साबित हुआ है। गुजरात सरकार ने इनको मौत की सज़ा देने की मांग की है।

शर्तों के आधार पर बेल

पीठ ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि दोषियों को सत्र न्यायालय द्वारा लगाए गए नियमों और शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाए। शीर्ष अदालत ने हालांकि चार दोषियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा घटना में उनकी भूमिका को उजागर करते हुए उनकी जमानत याचिकाओं का विरोध किया गया था। जिन याचिकाकर्ताओं की जमानत याचिका खारिज हुई थी उनकी तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ से उनकी अर्जियों पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा की कल त्योहार है।

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गुजरात सरकार ने किया विरोध

गुजरात सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले मेहता ने पहले कहा था कि यह केवल पथराव का मामला नहीं है, क्योंकि दोषियों ने साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगा दी थी जिससे 59 यात्रियों की मौत हो गई थी। सजा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कई याचिकाएं लंबित हैं। गुजरात के गोधरा में 27 फरवरी 2002 को ट्रेन की एस-6 बोगी में आग लगाए जाने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे। उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2017 के अपने फैसले में गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में 11 दोषियों को दी गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। उसने 20 अन्य को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

गोधरा कांड?

27 फरवरी, 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन से रवाना हुई साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की एक बोगी में उपद्रवी भीड़ ने आग लगा दी थी। जिसमें 59 लोगों की जान चली गई। बाद में जांच में पता चला कि अहमदाबाद की ओर जा रही साबरमती एक्सप्रेस जैसे ही गोधरा स्टेशन से चली, किसी ने चेन खींचकर उसे रोक दिया था और फिर पथराव के बाद ट्रेन के एक डिब्बे को आग के हवाले कर दिया गया था। ट्रेन में सवार लोग हिन्दू तीर्थयात्री थे और अयोध्या से वापस आ रहे थे।  इसके बाद ही गुजरात के कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़की। जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। हालात पर काबू पाने के लिए सेना को बुलाना पड़ा था। इस प्रकरण में 1,500 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

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