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Monkey Menace: दिल्ली विधानसभा में बंदरों से निपटने का अनोखा तरीका | अनोखा सरकारी रोजगार

दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने शुरू की खास भर्तियाँ लंगूर की आवाज़ करने वाले लोगों को नौकरी, अच्छी सैलरी और बीमा कवरेज मिलेगा।

Monkey Menace: लंगूर की आवाज़ करने वालों की भर्ती

Monkey Menace: दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए सरकार ने नया कदम उठाया है। अब लंगूर की आवाज़ की नकल करने वाले लोगों को नौकरी दी जाएगी, ताकि बिना नुकसान पहुँचाए बंदरों को दूर रखा जा सके। यह फैसला अपने अनोखेपन और रोजगार के नए अवसरों को लेकर चर्चा में है।

क्या हुआ? दिल्ली विधानसभा में बंदरों का मुद्दा गरमाया

दिल्ली विधानसभा परिसर और उसके आसपास पिछले कुछ समय से बंदरों और लंगूरों की संख्या बढ़ गई है। ये जानवर विधानसभा के परिसर में प्रवेश करते हैं, अफरातफरी मचाते हैं और आगंतुकों और कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं।

बंदरों से निपटने के पारंपरिक उपाय काम न आने पर, सरकार ने एक अनोखे समाधान को अपनाया है — अब ऐसे लोगों को काम पर रखा जाएगा जो लंगूर की आवाज़ की नकल (langur sound mimic) कर सकते हैं।

भर्ती कैसे और क्यों?

Monkey Menace
Monkey Menace

सरकारी विभागों ने यह पाया कि लंगूरों को लंगूर की आवाज़ से डराया जा सकता है। इसी सोच के साथ PWD और दिल्ली सरकार ने एक योजना तैयार की है जिसमें ऐसे लोगों को नौकरी दी जाएगी जो लंगूर जैसी आवाज़ कर सकें और उसे बंदरों को सुनाकर भगाएँ। यह कदम पारंपरिक बंदर भगाने वाली तकनीकों के अलावा एक प्राकृतिक और रणनीतिक तरीका माना जा रहा है।

नौकरी की खास बातें

इस नौकरी की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • काम: लंगूर की आवाज़ की नकल कर बंदरों को दूर भड़काना 
  • स्थान: दिल्ली विधानसभा परिसर तथा आस-पास के सरकारी इलाके 
  • योग्यता: लंगूर आवाज़ की सटीक नकल की क्षमता 
  • सुविधाएं: आकर्षक सैलरी, इंश्योरेंस कवरेज और सरकारी नियुक्ति

सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि यह कदम मानव और जानवर दोनों के लिए सुरक्षित और प्रभावी होगा।

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बंदरों की समस्या क्यों बढ़ी?

Monkey Menace
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विशेषज्ञों के अनुसार, शहरों में हरित क्षेत्रों के कम होने, कबाड़ और खाद्य अपशिष्ट के फैलने से बंदरों की संख्या बढ़ी है। बंदर विधानसभा परिसर में आकर:

  • कर्मचारियों और जनता को भयभीत कर रहे हैं 
  • दस्तावेज़, फर्नीचर और सामान में नुकसान कर रहे हैं 
  • सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में समस्या पैदा कर रहे हैं

ऐसे में पारंपरिक उपाय जैसे आवाज़ करना, रबर बैंड, छड़ी आदि कुछ हद तक काम करते रहे, लेकिन समस्या की जड़ से नियंत्रण पाने के लिए यह “लंगूर आवाज़ mimics” की भर्ती एक नए प्रयास के रूप में सामने आई है।

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सामाजिक और विशेषज्ञ रिएक्शंस

इस अनोखे कदम को लेकर लोग दो भागों में बंटे हुए हैं:

  • कुछ लोगों का कहना है कि यह एक क्रीएटिव और मानवतावादी समाधान है, जो न केवल बंदरों को भगाने में मदद करेगा बल्कि जानवरों के प्रति संवेदनशील भी है। 
  • वहीं कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या यह पर्याप्त प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान होगा? कुछ ने सुझाव दिया है कि बेहतर पारिस्थितिक प्रबंधन, हरित क्षेत्र की सुरक्षा और मानवीय हटाने वाले उपायों पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने मज़ाक, समर्थन और आलोचना के साथ प्रतिक्रिया दी है।

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क्या यह असर करेगा? आगे क्या संभावनाएँ हैं?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस नई रणनीति का परीक्षण किया जा रहा है और परिणाम आने पर इसे अन्य सरकारी परिसरों में भी लागू किया जा सकता है। यदि यह सफल रहा, तो यह शहरी पारिस्थितिक प्रबंधन का एक नया मॉडल बन सकता है। अब यह देखना होगा कि लंगूरों के व्यवहार में परिवर्तन आता है या नहीं, और क्या बंदरों की संख्या पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

निष्कर्ष

दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों को नियंत्रित करने के लिए लंगूर आवाज़ mimics की भर्ती एक अनोखा, चुनौतीपूर्ण और नवाचारी कदम है। यह न केवल जनहित से जुड़ा है, बल्कि रोजगार और शहरी वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक नए दृष्टिकोण का प्रतीक भी बन सकता है।

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