पॉलिटिक्स

कहीं खाने में ही तो नही छुपा, दीदी और अम्मा की जीत का राज!

‘मां, माटी, मानुष’, ‘दु टका किलो चावल’ के साथ पांच साल पहले तीन दशकों तक राज करने वाले लेफ्ट को हराकर बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी ने एक महिला मुख्यमंत्री का पद हासिल किया था। लेकिन आज फिर पांच सालों बाद दीदी दोबारा सत्ता पर काबिज होने जा रही हैं।

इस बार के चुनाव में तो जहां दीदी का सत्ता में आना थोड़ा सा मुश्किल लग रहा था। वहीं दूसरी ओर में भारी मतों से साथ 294 सीटों में से 218 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की और लेफ्ट को अपने आस-पास भी खड़ा नहीं होने दिया।

पिछली बार तो दीदी सिंगूर को मुद्दा बनाकर सत्ता में आई थी, लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में अच्छे कामों से ज्यादा भ्रष्टाचार की लिस्ट थी। शारदा चिटफंट से लेकर चुनाव से पहले फुटओवर ब्रिज गिरने तक। दीदी के बिग्रेड के कई नेता तो भ्रष्टाचार के मामले में जेल की हवा भी खा चुके है।

विपक्ष ने दीदी को सत्ता छोड़ देने तक के लिए कहा, लेकिन दीदी तो अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। भ्रष्टाचार की लंबी लिस्ट भी दीदी को दोबारा सत्ता में आने से रोक नहीं पाई।

दीदी ने नारे और सच में ‘दु टका किलो चावल’ ने बंगाल की जनता पर दीदी का जादू चलने दिए। पिछली बार तो सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद ही दीदी ने गरीबों के बीच चावल बटवाकर अपना वायाद पूरा किया।

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दीदी और अम्मा एक साथ

वैसे तो बंगाल गरीबी रेखा के नीचे आता है, लेकिन बंगाल में ‘दु टका चावल’ देकर लोगों के दिलों में जगह बना ही ली… क्योंकि बंगाल में चावल खाने वालों की कमी नहीं है।

खैर बात मुद्दे की करते हैं पांच सालों तक सत्ता में काबिज रहने वाली दीदी पर कई मुसीबतें भी आई। लेकिन चुनाव में उसे जीता कर जनता ने दीदी को एक बार फिर भरोसा दिला दिया कि विपक्षी चाहे जितना भी उसके विरोध करें लेकिन उनकी गरीब जनता उनके साथ है।

तमिलनाडु में जयललिता की जय-जयाकार  

दूसरी ओर अम्मा ने भी कुछ ज्यादा तो कमाल नहीं कर पाई लेकिन सत्ता में तो काबिज हो ही गई। महज कुछ सीटों से ही अम्मा करूणानिधि को हारा पाई है।

अम्मा के लिए भी इस बार का चुनाव जीतना थोड़ा टेढ़ी खीर साबित होने जैसा था। पिछली बार के चुनाव में अम्मा भी आसानी से जीत कर सत्ता में आ गई थी। लेकिन इस बार तो अम्मा पर भी अच्छा खासा भ्रष्टाचार का काला दाग लग चुका था। फिर भी लोगों ने उसका साथ नहीं छोड़ा।

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जयाललिता

इसका जीता जागता सबूत है बैंगलोर हाईकोर्ट में आय से ज्यादा संपति मामले में अम्मा की कोर्ट में पेशी और जनता का बाहर प्रदर्शन। युवाओं में तो इस बात को लेकर इतना रोष था कि एक युवक ने बीच चौराहे पर आत्मदाह कर लिया था।

खैर बात की जाए अम्मा के लिए लोगों के प्यार के बारे में तो, यह कहना गलत नहीं होगा कि अम्मा ने जनता के लिए बहुत कुछ किया है। दीदी की तरह अम्मा का भी सेन्ट्रल पॉइंट खाने पर ही रहा है।

दो साल पहले की बात है चेन्नई में अम्मा नाम की एक कैंटीन खोली गई। जोकि गरीब लोगों को कम पैसो में स्वादिष्ट भोजन से तृप्त करती है। कैंटीन का मुख्य का मकसद गरीब और मजदूर तबके के लोगों को दो वक्त का खाना सस्ते में मुहैया कराना है। आपको सुनकर हैरानी होगी इस कैंटीन में एक रूपए में इटली सांभर, तीन रूपए में डोसा और पांच रूपए में चावल सांभर मिलता है।

हैरानी वाली बात यह कि इस कैंटीन में गरीब तबके के लोग ही नहीं बड़ी-बड़ी एमएनसी में काम करने वाले लोग आकर लंच करते हैं। अब जिस राज्य में गरीब जनता को इतनी बड़ी सुविधा दी जाए उसे नेता के भ्रष्ट होने के क्या मतलब। कई ऐसे भी होगें जिनको भ्रष्ट का मतलब भी पता नहीं होगा।

खैर वैसे इस बार जनता का दिल करूणानिधि के लिए भी पिघला था, क्योंकि चुनावी सर्वे के अनुसार कई लोगों का कहना था कि करूणानिधि 92 साल के हो गए है और हो सकता है यह उनका आखिरी चुनाव हो।

खैर अब तो जनता को खाना खिलाकर अम्मा सत्ता में काबिज हो चुकी हैं। अब आगे देखना है कि पांच साल मे क्या करती हैं.. ताकि दोबारा से पांच के लिए सत्ता में आ सके।

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