World Day of Metta: विश्व मैत्री दिवस 2026, जानें इतिहास, महत्व और मैत्री का सही मतलब
World Day of Metta, हर साल 23 मार्च को दुनिया भर में विश्व मैत्री दिवस (World Day of Metta) मनाया जाता है। यह दिन बौद्ध दर्शन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत ‘मेट्टा’ को समर्पित है,
World Day of Metta : क्यों कहा जाता है इसे करुणा और दया का दिवस?
World Day of Metta, हर साल 23 मार्च को दुनिया भर में विश्व मैत्री दिवस (World Day of Metta) मनाया जाता है। यह दिन बौद्ध दर्शन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत ‘मेट्टा’ को समर्पित है, जिसका अर्थ है—निस्वार्थ प्रेम, करुणा और सभी जीवों के प्रति सद्भावना। आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में यह दिवस हमें इंसानियत, सह-अस्तित्व और मानसिक शांति का महत्व याद दिलाता है।
मेट्टा क्या है? (What Is Metta)
‘मेट्टा’ एक पालि शब्द है, जिसका अर्थ है मैत्रीभाव, प्रेमपूर्ण दयालुता और करुणा। बौद्ध धर्म में मेट्टा चार ब्रह्मविहारों में से एक है—मेट्टा (मैत्री), करुणा, मुदिता और उपेक्षा। मेट्टा का मतलब केवल अपने प्रियजनों के लिए प्रेम नहीं, बल्कि शत्रु, अजनबी और स्वयं के प्रति भी समान सद्भावना रखना है। यह भावना अहिंसा, सहिष्णुता और शांति को जन्म देती है।
विश्व मैत्री दिवस का इतिहास
World Day of Metta की शुरुआत बौद्ध शिक्षाओं को वैश्विक स्तर पर फैलाने और मानवता में करुणा का भाव जगाने के उद्देश्य से की गई। यह दिवस खासतौर पर मेट्टा भावनाओं (Loving-Kindness Meditation) को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है, जिससे लोग अपने मन की नकारात्मक भावनाओं—जैसे क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष—से मुक्त हो सकें।
मेट्टा ध्यान का महत्व
मेट्टा ध्यान एक ऐसी साधना है, जिसमें व्यक्ति मन ही मन सभी के लिए सुख, शांति और सुरक्षा की कामना करता है।
यह ध्यान सबसे पहले स्वयं के लिए किया जाता है, फिर परिवार, मित्रों, अजनबियों और अंत में उन लोगों के लिए भी, जिनसे मनमुटाव हो।
मेट्टा ध्यान के लाभ
- मानसिक तनाव और अवसाद में कमी
- आत्मविश्वास और आत्म-स्वीकृति में वृद्धि
- क्रोध और नकारात्मकता पर नियंत्रण
- आपसी संबंधों में सुधार
- समाज में शांति और सौहार्द
आज के समय में मेट्टा की जरूरत क्यों?
आज की दुनिया हिंसा, युद्ध, असहिष्णुता और मानसिक तनाव से जूझ रही है। सोशल मीडिया, प्रतिस्पर्धा और असमानताओं ने लोगों के बीच दूरी बढ़ा दी है। ऐसे समय में मेट्टा हमें यह सिखाता है कि शांति बाहर नहीं, हमारे भीतर से शुरू होती है। जब व्यक्ति अपने विचारों में करुणा लाता है, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।
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विश्व मैत्री दिवस कैसे मनाया जाता है?
विश्व मैत्री दिवस के अवसर पर दुनियाभर में कई तरह की गतिविधियां होती हैं:
- बौद्ध मठों और ध्यान केंद्रों में मेट्टा ध्यान सत्र
- ऑनलाइन और ऑफलाइन ध्यान कार्यक्रम
- शांति मार्च और सामूहिक प्रार्थनाएं
- स्कूलों और विश्वविद्यालयों में नैतिक शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम
- सोशल मीडिया पर करुणा और प्रेम का संदेश
मेट्टा और भारतीय दर्शन
भारत की संस्कृति में भी मेट्टा जैसी भावनाएं गहराई से जुड़ी हैं। “वसुधैव कुटुम्बकम्” का विचार—सारी दुनिया एक परिवार है—मेट्टा के सिद्धांत से मेल खाता है। महात्मा बुद्ध की करुणा, महावीर स्वामी की अहिंसा और महात्मा गांधी के सत्य-अहिंसा के सिद्धांत मेट्टा की ही अभिव्यक्ति हैं।
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हम अपने जीवन में मेट्टा कैसे अपनाएं?
मेट्टा को अपनाने के लिए हमें बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा असर डाल सकते हैं:
- हर दिन कुछ मिनट मेट्टा ध्यान करें
- किसी जरूरतमंद की मदद करें
- दूसरों को माफ करना सीखें
- नकारात्मक भाषा और हिंसक विचारों से बचें
- स्वयं के प्रति भी दयालु बनें
विश्व शांति की दिशा में एक कदम
विश्व मैत्री दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची शांति कानूनों और हथियारों से नहीं, बल्कि करुणा और समझ से आती है।
अगर हर व्यक्ति अपने मन में थोड़ी सी मेट्टा विकसित कर ले, तो दुनिया कहीं अधिक सुरक्षित, शांत और प्रेमपूर्ण बन सकती है। World Day of Metta केवल एक आध्यात्मिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला एक वैश्विक आंदोलन है।
मेट्टा हमें सिखाता है कि जब हम दूसरों के लिए शुभकामनाएं रखते हैं, तो सबसे पहले हमारा अपना मन शांत होता है।
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