Whatsapp ai chatbot: WhatsApp का ‘सीक्रेट’ कोड आया सामने? Meta के AI निर्देशों पर बड़ा विवाद
Whatsapp ai chatbot, दुनिया के लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp को लेकर एक नया तकनीकी विवाद सामने आया है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta के व्हाट्सएप हेल्प सेंटर के कई वेबपेजों के सोर्स कोड में ऐसे छिपे हुए निर्देश मिले, जो कंपनी के एआई सपोर्ट चैटबॉट के लिए तैयार किए गए थे।
Whatsapp ai chatbot : AI और यूजर्स के अधिकारों पर बहस तेज, WhatsApp के कथित लीक कोड ने खड़े किए सवाल
Whatsapp ai chatbot, दुनिया के लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp को लेकर एक नया तकनीकी विवाद सामने आया है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta के व्हाट्सएप हेल्प सेंटर के कई वेबपेजों के सोर्स कोड में ऐसे छिपे हुए निर्देश मिले, जो कंपनी के एआई सपोर्ट चैटबॉट के लिए तैयार किए गए थे। इन निर्देशों में चैटबॉट को कुछ कानूनी सवालों के जवाब देते समय खास तरह की सीमाओं का पालन करने और यूजर्स को डेटा सुरक्षा नियामकों से संपर्क करने की सलाह न देने को कहा गया था। प्राइवेसी कंपनी Redact की जांच के बाद यह मामला सामने आया। रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद मेटा ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया और कहा कि समस्या ठीक कर दी गई है।
80 वेबपेजों पर मिले 102 छिपे हुए निर्देश
टेक्नोलॉजी वेबसाइट WIRED की रिपोर्ट के अनुसार, Redact ने व्हाट्सएप के हेल्प सेंटर से जुड़े 545 वेबपेजों की जांच की। इस दौरान लगभग 80 पेजों पर कुल 102 ऐसे टेक्स्ट ब्लॉक मिले, जो आम यूजर्स को वेबसाइट पर दिखाई नहीं देते थे, लेकिन पेज के HTML सोर्स कोड में मौजूद थे।इन निर्देशों को “HelpContentGalaxyLLMInclude” नाम के कोड ब्लॉक में रखा गया था। कुछ निर्देश सामान्य ग्राहक सहायता से संबंधित थे, जैसे यूजर्स को सही जानकारी देना या उन्हें संबंधित हेल्प पेज पर भेजना। लेकिन कुछ निर्देश कानूनी कार्रवाई, अकाउंट डिलीट करने और डेटा सुरक्षा कानूनों से जुड़े सवालों पर चैटबॉट के जवाबों को सीमित करते दिखाई दिए।इनमें कुछ जगह “WHAT NOT TO SAY” यानी क्या नहीं कहना है, जैसे निर्देश भी शामिल थे। इससे पता चला कि एआई चैटबॉट को जवाब देने के लिए केवल जानकारी ही नहीं दी जाती, बल्कि यह भी तय किया जाता है कि किन विषयों पर उसे क्या नहीं कहना चाहिए।
अकाउंट डिलीट करने के मामले में क्या निर्देश थे?
इस विवाद का एक अहम हिस्सा व्हाट्सएप अकाउंट डिलीट करने की प्रक्रिया से जुड़ा था। आम तौर पर यूजर्स अपने अकाउंट को हटाने के लिए ऐप के भीतर उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन अगर किसी यूजर के पास उसका पुराना फोन या सक्रिय फोन नंबर उपलब्ध न हो, तो अकाउंट डिलीट करने की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सएप के अकाउंट डिलीट करने से संबंधित हेल्प पेज के सोर्स कोड में चैटबॉट के लिए ऐसे निर्देश मिले, जिनमें कहा गया था कि यूजर को डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी, किसी नियामक संस्था या निगरानी प्राधिकरण से संपर्क करने की सलाह न दी जाए। इसके अलावा, चैटबॉट को यह सुझाव देने से भी रोका गया था कि व्हाट्सएप यूजर की ओर से मैन्युअल तरीके से अकाउंट डिलीट कर सकता है।यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये निर्देश चैटबॉट के लिए थे, न कि हेल्प पेज पर सीधे यूजर्स को दिखाई जाने वाली जानकारी। हालांकि, इनसे यह सवाल जरूर उठा कि अगर कोई यूजर अपने अकाउंट या निजी डेटा को लेकर परेशानी में है, तो उसे उपलब्ध विकल्पों की पूरी जानकारी कैसे मिलेगी।
कानूनी कार्रवाई और प्राइवेसी कानूनों पर भी रोक
Redact की जांच में व्हाट्सएप के रिपोर्टिंग और ब्लॉकिंग से जुड़े हेल्प पेज पर भी ऐसे निर्देश मिले। इनका संबंध उन स्थितियों से था, जब कोई यूजर कानूनी कार्रवाई, मुकदमे, वकील या अदालत का जिक्र करता है।रिपोर्ट के अनुसार, चैटबॉट को निर्देश दिया गया था कि ऐसे मामलों में वह व्हाट्सएप की सेवा शर्तों, प्राइवेसी पॉलिसी या अन्य कानूनी दस्तावेजों का हवाला न दे और उनकी कानूनी व्याख्या न करे। इसके अलावा, उसे GDPR, LGPD और CCPA जैसे डेटा सुरक्षा एवं प्राइवेसी कानूनों का उल्लेख या उनकी व्याख्या करने से भी रोका गया था, भले ही यूजर खुद इन कानूनों के बारे में सवाल पूछे।चैटबॉट को कानूनी मामलों में योग्य कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेने की बात कहने का निर्देश भी दिया गया था। किसी एआई सपोर्ट सिस्टम को व्यक्तिगत कानूनी सलाह देने से रोकना अपने आप में अलग बात है, लेकिन किसी यूजर को उसके डेटा अधिकारों और शिकायत दर्ज करने के उपलब्ध रास्तों की जानकारी न देना एक अलग मुद्दा है। इसी अंतर ने इस मामले को चर्चा में ला दिया।
व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी से क्यों जुड़ा विवाद?
इस मामले में यूरोप के यूजर्स से संबंधित व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की यूरोपीय प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स के पास अपने व्यक्तिगत डेटा तक पहुंचने, उसमें सुधार कराने और उसे हटाने का अनुरोध करने जैसे अधिकारों का उल्लेख है। इसके अलावा, संबंधित कानूनों के तहत यूजर्स को डेटा सुरक्षा प्राधिकरण के पास शिकायत करने का अधिकार भी मिल सकता है।यूरोपीय संघ के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) के अनुच्छेद 77 में पर्यवेक्षी प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में हेल्प पेज के छिपे हुए निर्देशों और कंपनी की सार्वजनिक प्राइवेसी जानकारी के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे।हालांकि, GDPR और दूसरे प्राइवेसी कानूनों के प्रावधान हर देश में समान रूप से लागू नहीं होते। भारतीय यूजर्स के अधिकार भारत में लागू कानूनों और संबंधित परिस्थितियों के आधार पर तय होंगे। इसलिए यूरोप में लागू किसी नियम को बिना संदर्भ के सभी भारतीय यूजर्स पर लागू मानना सही नहीं होगा।
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मेटा ने क्या सफाई दी?
WIRED की ओर से इस मामले पर सवाल पूछे जाने के बाद व्हाट्सएप ने कहा कि ये निर्देश उसके एआई सपोर्ट चैटबॉट के लिए थे और एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण सार्वजनिक हेल्प पेजों के कोड में दिखाई देने लगे थे। कंपनी के प्रवक्ता जोशुआ ब्रेकमैन के मुताबिक, इन निर्देशों का उद्देश्य उन यूजर्स को सटीक और प्रासंगिक सहायता देना था, जो एआई के माध्यम से व्हाट्सएप सपोर्ट से संपर्क करते हैं।कंपनी ने यह भी कहा कि उसका उद्देश्य सपोर्ट चैटबॉट को व्हाट्सएप के उत्पाद और सेवाओं से जुड़ी मदद देने तक सीमित रखना है, न कि उससे कानूनी सलाह दिलवाना। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अक्टूबर तक इन 102 छिपे हुए टेक्स्ट ब्लॉक्स को संबंधित वेबपेजों से हटा दिया गया था।
क्या यूजर्स का निजी डेटा भी लीक हुआ?
इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि यूजर्स की निजी व्हाट्सएप चैट, फोन नंबर या व्यक्तिगत संदेश लीक हुए। यह मामला मुख्य रूप से सार्वजनिक हेल्प पेजों के सोर्स कोड में मौजूद आंतरिक निर्देशों के सामने आने से जुड़ा है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि व्हाट्सएप का एआई चैटबॉट वास्तव में इन सभी निर्देशों के अनुसार जवाब दे रहा था या कितने यूजर्स पर इनका असर पड़ा। Redact की जांच से निर्देशों का पता चला, लेकिन इससे यह साबित नहीं हुआ कि चैटबॉट ने हर मामले में यूजर्स को जानकारी देने से इनकार किया। जांच में यह भी स्थापित नहीं हुआ कि किसी बाहरी एआई कंपनी ने इन निर्देशों का इस्तेमाल किया था।
एआई और यूजर्स के अधिकारों पर नई बहस
इस घटना ने एआई आधारित ग्राहक सहायता की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। कंपनियां अपने चैटबॉट को गलत या भ्रामक कानूनी सलाह देने से रोक सकती हैं, लेकिन यूजर्स को उनके उपलब्ध अधिकारों और शिकायत के विकल्पों की सही जानकारी मिलना भी महत्वपूर्ण है।अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि भविष्य में कंपनियां अपने एआई सिस्टम को किस तरह प्रशिक्षित करेंगी, ताकि तकनीकी सहायता देते समय कानूनी सलाह की सीमा का पालन भी हो और यूजर्स को जरूरी जानकारी से वंचित भी न रहना पड़े। फिलहाल, मेटा ने सार्वजनिक पेजों पर दिखाई देने वाले निर्देशों को तकनीकी गड़बड़ी बताया है और उन्हें हटा दिया है। यह मामला एआई सिस्टम के संचालन, जवाबदेही और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत को सामने लाता है।
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