Tamil New Year 2026: तमिल नववर्ष 2026, नई शुरुआत और खुशियों का पर्व
Tamil New Year 2026, तमिल नववर्ष, जिसे पुथांडु (Puthandu) भी कहा जाता है, दक्षिण भारत विशेषकर Tamil Nadu में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
Tamil New Year 2026 : पुथांडु 2026, क्यों खास है तमिल समुदाय के लिए यह दिन?
Tamil New Year 2026, तमिल नववर्ष, जिसे पुथांडु (Puthandu) भी कहा जाता है, दक्षिण भारत विशेषकर Tamil Nadu में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तमिल नववर्ष 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह दिन तमिल पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और इसे जीवन में नई ऊर्जा, नई आशाओं और सकारात्मक संकल्पों के साथ आरंभ करने का अवसर माना जाता है।
पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व
तमिल परंपरा के अनुसार यह दिन सृष्टि की रचना से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी। इसलिए यह दिन सृजन, समृद्धि और नवजीवन का प्रतीक है। तमिल समुदाय में यह पर्व केवल कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नवजागरण का प्रतीक है।तमिल नववर्ष को “चिथिरै” महीने के पहले दिन मनाया जाता है। तमिल पंचांग का पहला महीना ‘चिथिरै’ होता है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होता है। इस खगोलीय परिवर्तन को भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
घर की सजावट और कोलम की परंपरा
तमिल नववर्ष के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए वस्त्र धारण करते हैं। घरों को आम के पत्तों और फूलों से सजाया जाता है। मुख्य द्वार पर सुंदर “कोलम” बनाया जाता है। कोलम चावल के आटे से बनाई जाने वाली रंगोली है, जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक है।घर के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लोग भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष कार्यक्रम और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।
“कन्नी” दर्शन की परंपरा
तमिल नववर्ष की सुबह एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसे “कन्नी” कहा जाता है। इसमें रात को ही एक थाली में सोना-चांदी के आभूषण, फल, सब्जियां, फूल, दर्पण और धन रखा जाता है। सुबह उठते ही सबसे पहले इसी थाली को देखा जाता है। माना जाता है कि वर्ष के पहले दिन जो दृश्य देखा जाता है, उसी प्रकार का साल बीतता है। इसलिए शुभ और समृद्ध वस्तुओं को देखने की परंपरा है।
पुथांडु का विशेष भोजन
इस दिन घरों में विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं। सबसे खास पकवान “मांगई पचड़ी” (कच्चे आम की चटनी) होता है। यह व्यंजन मीठा, खट्टा, कड़वा और तीखा—चारों स्वादों का मिश्रण होता है। इसका संदेश यह है कि जीवन में सुख-दुख, खुशी-गम सभी भावनाएं आती हैं, और हमें हर परिस्थिति को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।इसके अलावा सांभर, पायसम, वड़ा, अप्पम जैसे पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और एकता बढ़ती है।
सामाजिक और पारिवारिक महत्व
तमिल नववर्ष केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज को जोड़ने वाला पर्व भी है। लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों से मिलते हैं, बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और बच्चों को उपहार दिए जाते हैं। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और संगीत समारोह आयोजित होते हैं।यह पर्व समाज में भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देता है। लोग एक-दूसरे को “पुथांडु वाझ्थुक्कल” कहकर नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं, जिसका अर्थ है—नववर्ष की मंगलकामनाएं।
अन्य राज्यों में उत्सव
हालांकि यह पर्व मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है, लेकिन Kerala, Karnataka और Andhra Pradesh में भी अलग-अलग नामों से इसी समय नववर्ष मनाया जाता है। केरल में इसे “विशु”, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में “उगादी” कहा जाता है। इन सभी त्योहारों का मूल भाव एक ही है—नई शुरुआत और सकारात्मकता।
आधुनिक संदर्भ में तमिल नववर्ष
आज के डिजिटल युग में भी तमिल नववर्ष की परंपराएं जीवित हैं। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाएं भेजते हैं, ऑनलाइन पूजा और कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। विदेशों में बसे तमिल समुदाय भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिससे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा जा सके।शहरों में रहने वाले युवा भी इस पर्व को नए जोश के साथ मनाते हैं। वे पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं, मंदिर जाते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं। इस प्रकार यह पर्व परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
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आर्थिक और व्यावसायिक महत्व
तमिल नववर्ष को व्यापारियों के लिए भी शुभ माना जाता है। कई व्यापारी इस दिन नए खाते (लेजर) की शुरुआत करते हैं। दुकानों और प्रतिष्ठानों में विशेष पूजा की जाती है। यह दिन नए व्यापारिक निर्णय लेने और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए शुभ समझा जाता है।तमिल नववर्ष 2026 केवल एक कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन के हर रंग को स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिए। पारिवारिक एकता, सांस्कृतिक परंपराएं और आध्यात्मिक आस्था इस दिन को और भी विशेष बनाती हैं।जब पूरा तमिल समुदाय “पुथांडु वाझ्थुक्कल” के साथ एक-दूसरे को शुभकामनाएं देता है, तब यह पर्व सचमुच नई उम्मीदों और सपनों की शुरुआत बन जाता है। तमिल नववर्ष हमें याद दिलाता है कि हर नया दिन एक नया अवसर है—खुश रहने का, आगे बढ़ने का और अपने जीवन को बेहतर बनाने का।
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