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Sunday became weekly holiday: रविवार को छुट्टी का नियम कब और क्यों बना? जानिए पूरा इतिहास

Sunday became weekly holiday, आज हम सभी के लिए रविवार यानी Sunday आराम, परिवार और सुकून का दिन माना जाता है। स्कूल हो, कॉलेज हो या ऑफिस अधिकांश जगहों पर रविवार साप्ताहिक अवकाश होता है।

Sunday became weekly holiday : हफ्ते की थकान दूर करने का दिन क्यों बना रविवार?

Sunday became weekly holiday, आज हम सभी के लिए रविवार यानी Sunday आराम, परिवार और सुकून का दिन माना जाता है। स्कूल हो, कॉलेज हो या ऑफिस अधिकांश जगहों पर रविवार साप्ताहिक अवकाश होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हफ्ते में छुट्टी के लिए रविवार ही क्यों चुना गया? आखिर इसके पीछे क्या इतिहास और कारण हैं? इसकी कहानी धार्मिक, सामाजिक और औद्योगिक बदलावों से जुड़ी हुई है।आइए जानते हैं इस दिलचस्प सफर के बारे में।

रोमन साम्राज्य से शुरू हुई परंपरा

रविवार को अवकाश घोषित करने की परंपरा की जड़ें प्राचीन रोमन साम्राज्य में मिलती हैं। चौथी शताब्दी में रोमन सम्राट Constantine I ने वर्ष 321 ईस्वी में एक आदेश जारी किया। इस आदेश के अनुसार रविवार को “Day of the Sun” मानते हुए इसे विश्राम और प्रार्थना का दिन घोषित किया गया।चूंकि उस समय ईसाई धर्म तेजी से फैल रहा था और रविवार को ईसा मसीह के पुनरुत्थान का दिन माना जाता था, इसलिए इसे पवित्र दिन का दर्जा दिया गया। धीरे-धीरे यह परंपरा यूरोप के कई देशों में लागू हो गई।

ईसाई धर्म में रविवार का महत्व

ईसाई धर्म में रविवार का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इसी दिन प्रभु यीशु पुनर्जीवित हुए थे। इसलिए चर्च में प्रार्थना और सामूहिक उपासना के लिए रविवार को चुना गया।यूरोप के देशों में जब औद्योगिक क्रांति आई, तब फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को सप्ताह में एक दिन आराम देने की आवश्यकता महसूस हुई। धार्मिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए रविवार को ही अवकाश का दिन माना गया।

औद्योगिक क्रांति और मजदूर आंदोलन

18वीं और 19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों से सप्ताह के सातों दिन काम लिया जाता था। इससे उनका स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन प्रभावित होता था।धीरे-धीरे मजदूर संगठनों ने साप्ताहिक अवकाश की मांग शुरू की। कई देशों में रविवार को छुट्टी देना एक व्यावहारिक समाधान माना गया, क्योंकि यह पहले से धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण दिन था।इस तरह रविवार केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और श्रमिक अधिकारों का प्रतीक भी बन गया।

भारत में रविवार की छुट्टी कैसे शुरू हुई?

भारत में अंग्रेजों के शासन के दौरान रविवार को छुट्टी की परंपरा आई। ब्रिटिश प्रशासन ने अपने नियमों के अनुसार रविवार को अवकाश लागू किया।हालांकि भारत में इस नियम को लागू करवाने में एक भारतीय समाज सुधारक की भी अहम भूमिका रही। 19वीं सदी में कामगारों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले Narayan Meghaji Lokhande ने मजदूरों के लिए साप्ताहिक अवकाश की मांग की।उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह अंग्रेज कर्मचारी रविवार को चर्च जाते हैं और आराम करते हैं, उसी तरह भारतीय मजदूरों को भी सप्ताह में एक दिन आराम मिलना चाहिए। उनके प्रयासों के बाद 1890 के दशक में रविवार को साप्ताहिक अवकाश के रूप में मान्यता मिली।

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क्या अन्य धर्मों में भी अलग-अलग अवकाश दिन हैं?

दुनिया के विभिन्न धर्मों में अलग-अलग दिनों को पवित्र माना जाता है।

  • इस्लाम में शुक्रवार (जुम्मा) को विशेष दिन माना जाता है।
  • यहूदी धर्म में शनिवार (Sabbath) को विश्राम का दिन माना जाता है।

कुछ मुस्लिम देशों में शुक्रवार या शुक्रवार-शनिवार वीकेंड होता है। वहीं पश्चिमी देशों में शनिवार और रविवार दोनों दिन वीकेंड के रूप में मनाए जाते हैं।लेकिन भारत समेत कई देशों में रविवार ऐतिहासिक और प्रशासनिक कारणों से साप्ताहिक अवकाश बना हुआ है।

पांच दिन का वर्किंग वीक कैसे आया?

समय के साथ कई देशों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया। यानी शनिवार और रविवार दोनों दिन अवकाश। यह बदलाव 20वीं सदी में श्रमिक अधिकारों के विस्तार और बेहतर कार्य-जीवन संतुलन की सोच के कारण आया।हालांकि सभी संस्थानों में यह व्यवस्था लागू नहीं है। कई सरकारी और निजी संस्थान आज भी छह दिन काम और एक दिन रविवार को अवकाश का नियम अपनाते हैं।

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सामाजिक और पारिवारिक महत्व

रविवार केवल आराम का दिन नहीं, बल्कि परिवार और सामाजिक जुड़ाव का भी दिन है। इस दिन लोग अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं या मनोरंजन के लिए बाहर जाते हैं।धीरे-धीरे यह दिन सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बन गया। फिल्मों की रिलीज, पारिवारिक कार्यक्रम और खेल प्रतियोगिताएं अक्सर रविवार को आयोजित की जाती हैं।रविवार को साप्ताहिक अवकाश मिलने की परंपरा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि इतिहास, धर्म और सामाजिक आंदोलनों का परिणाम है। रोमन सम्राट के आदेश से शुरू हुई यह परंपरा औद्योगिक क्रांति और मजदूर आंदोलनों के दौर से गुजरते हुए आज हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है।भारत में भी यह नियम ब्रिटिश काल और श्रमिक संघर्षों के कारण लागू हुआ।इस तरह रविवार केवल एक छुट्टी का दिन नहीं, बल्कि इतिहास की एक लंबी और रोचक यात्रा का परिणाम है। अगली बार जब आप रविवार को आराम करें, तो याद रखिएगा कि इसके पीछे सदियों पुरानी कहानी छिपी है।

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