Milk Cream Based Ghee: मलाई से सीधे बना घी कितना फायदेमंद? जानें इसमें क्यों कम हो सकता है पोषण
Milk Cream Based Ghee, भारतीय रसोई में घी का खास स्थान है। दाल में तड़का लगाना हो, रोटी पर लगाना हो या फिर मिठाई बनानी हो घी स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ा देता है।
Milk Cream Based Ghee : घर का मलाई वाला घी या बाजार का? पोषण को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Milk Cream Based Ghee, भारतीय रसोई में घी का खास स्थान है। दाल में तड़का लगाना हो, रोटी पर लगाना हो या फिर मिठाई बनानी हो घी स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ा देता है। लेकिन आजकल बाजार में मिलावट की खबरों के चलते कई लोग घर पर ही दूध की मलाई से घी बनाना पसंद करते हैं।अक्सर यह माना जाता है कि घर का बना घी ज्यादा शुद्ध और सेहतमंद होता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि क्रीम (मलाई) से सीधे बनाया गया घी हर बार उतना पौष्टिक नहीं होता, जितना पारंपरिक तरीके से बने घी में पोषण मिलता है। आइए समझते हैं पूरा मामला।
घी बनाने के दो प्रमुख तरीके
भारत में घी बनाने के दो मुख्य तरीके प्रचलित हैं—
1. मलाई से सीधे घी बनाना
दूध उबालने के बाद जो मलाई ऊपर जमती है, उसे इकट्ठा कर फ्रिज में रखा जाता है। कुछ दिनों बाद उस मलाई को सीधे गर्म करके घी बना लिया जाता है।
2. पारंपरिक बिलौना विधि
इस विधि में पहले दूध से दही बनाया जाता है। फिर दही को मथकर मक्खन निकाला जाता है और उस मक्खन को गर्म कर घी तैयार किया जाता है।पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, बिलौना विधि से बने घी में पोषक तत्वों का स्तर अधिक संतुलित होता है।
क्रीम से बने घी में पोषण कम क्यों?
मलाई से सीधे बनाए गए घी में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
- दही बनने की प्रक्रिया में जो फर्मेंटेशन (किण्वन) होता है, वह प्रोबायोटिक गुण जोड़ता है।
- मक्खन मथने की प्रक्रिया में फैट की गुणवत्ता बेहतर होती है।
- बिलौना घी में ब्यूटिरिक एसिड जैसे तत्व अधिक पाए जाते हैं, जो आंतों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
जब हम सीधे मलाई को गर्म कर घी बनाते हैं, तो फर्मेंटेशन की प्रक्रिया नहीं होती, जिससे कुछ लाभकारी तत्व कम हो सकते हैं।
क्या घर का मलाई वाला घी नुकसानदायक है?
नहीं, ऐसा नहीं है कि क्रीम से बना घी पूरी तरह खराब या नुकसानदायक होता है। यह फिर भी बाजार में मिलने वाले मिलावटी घी से बेहतर विकल्प हो सकता है।लेकिन अगर बात की जाए अधिक पोषण और पाचन के फायदे की, तो पारंपरिक तरीके से बना घी थोड़ा आगे रहता है।
बाजार के घी में मिलावट की समस्या
आजकल कई जगहों पर घी में वनस्पति तेल, स्टार्च या सिंथेटिक फ्लेवर मिलाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसलिए लोग घर का बना घी ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं।फिर भी यह जरूरी है कि घर पर घी बनाते समय साफ-सफाई और सही तापमान का ध्यान रखा जाए, वरना घी की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।
घी के पोषण तत्व
घी में मुख्य रूप से—
- हेल्दी फैट
- विटामिन A, D, E और K
- ओमेगा-3 फैटी एसिड (कुछ हद तक)
पाए जाते हैं।
लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि घी कैलोरी से भरपूर होता है। ज्यादा मात्रा में सेवन वजन बढ़ा सकता है।
किसे कितना घी खाना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- एक स्वस्थ व्यक्ति रोज 1-2 चम्मच घी ले सकता है।
- हार्ट पेशेंट या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग डॉक्टर की सलाह से सेवन करें।
- बच्चों और बढ़ते किशोरों के लिए सीमित मात्रा में घी फायदेमंद हो सकता है।
कौन सा घी बेहतर विकल्प?
अगर आप ज्यादा पोषण चाहते हैं तो—
- देसी गाय के दूध से बना बिलौना घी बेहतर माना जाता है।
- ऑर्गेनिक और भरोसेमंद ब्रांड चुनें।
- घर पर बनाएं तो दही-मक्खन विधि अपनाएं।
अगर समय की कमी है, तो मलाई वाला घी भी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसे संतुलित मात्रा में ही लें।
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घी बनाते समय ध्यान रखने वाली बातें
✔ मलाई को साफ बर्तन में स्टोर करें
✔ खराब या खट्टी गंध वाली मलाई का उपयोग न करें
✔ धीमी आंच पर ही घी तैयार करें
✔ तैयार घी को एयरटाइट कंटेनर में रखें
घर का बना घी, चाहे मलाई से हो या पारंपरिक बिलौना विधि से, बाजार के मिलावटी घी से बेहतर हो सकता है। लेकिन अगर पोषण की बात करें, तो दही से मक्खन निकालकर बनाया गया घी अधिक फायदेमंद माना जाता है।इसलिए अगली बार जब आप घर पर घी बनाएं, तो सिर्फ शुद्धता ही नहीं, बल्कि पोषण के पहलू को भी ध्यान में रखें। संतुलित मात्रा में घी का सेवन करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
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