Gen-Z Dry Holi: इंस्टाग्राम फ्रेंडली होली! Gen-Z क्यों चुन रही है Dry Holi
Gen-Z Dry Holi, भारत में होली रंगों, पानी और मस्ती का त्योहार माना जाता है। परंतु पिछले कुछ वर्षों में खासकर Gen-Z यानी 1997 के बाद जन्मी पीढ़ी के बीच एक नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है
Gen-Z Dry Holi : क्या है Dry Holi और क्यों तेजी से बढ़ रहा है इसका ट्रेंड?
Gen-Z Dry Holi, भारत में होली रंगों, पानी और मस्ती का त्योहार माना जाता है। परंतु पिछले कुछ वर्षों में खासकर Gen-Z यानी 1997 के बाद जन्मी पीढ़ी के बीच एक नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है — “Dry Holi”। इस ट्रेंड में लोग पानी की जगह सूखे गुलाल से होली खेलते हैं या फिर बिना रंगों के सिर्फ मिलना-जुलना, संगीत और फूड के साथ त्योहार मनाते हैं।सोशल मीडिया पर #DryHoli जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं और कॉलेज कैंपस से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक इस तरह की होली का चलन बढ़ रहा है। आखिर ऐसा क्या है जो Gen-Z को ड्राई होली की ओर आकर्षित कर रहा है? आइए जानते हैं इसके चार बड़े कारण।
1. पानी की बचत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता
Gen-Z को अक्सर “क्लाइमेट कॉन्शियस” पीढ़ी कहा जाता है। यह पीढ़ी पर्यावरण, जल संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी जैसे मुद्दों को गंभीरता से लेती है।भारत के कई हिस्सों में पानी की कमी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में हजारों लीटर पानी होली के दिन बर्बाद करना कई युवाओं को सही नहीं लगता। Dry Holi खेलने से पानी की बचत होती है और यह एक जिम्मेदार नागरिक होने का संदेश भी देता है।इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल्स होते हैं जो त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक हैं। सूखे, हर्बल गुलाल या बिना रंगों के होली मनाना पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।Gen-Z के लिए त्योहार केवल मस्ती का नहीं, बल्कि जागरूकता दिखाने का भी माध्यम बन गया है।
2. स्किन और हेल्थ के प्रति बढ़ती सजगता
आज की युवा पीढ़ी अपनी स्किन, बालों और हेल्थ को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग है। केमिकल वाले रंगों से एलर्जी, रैशेज, बालों का खराब होना और आंखों में जलन जैसी समस्याएं आम हैं।कई बार होली के बाद त्वचा को सामान्य होने में कई दिन लग जाते हैं। यही वजह है कि कई युवा अब वेट होली से दूरी बना रहे हैं।Dry Holi में हल्का-फुल्का गुलाल लगाकर या सिर्फ तिलक लगाकर त्योहार मनाया जाता है, जिससे स्किन को नुकसान नहीं होता। कुछ लोग तो “नो कलर, ओनली सेलिब्रेशन” कॉन्सेप्ट को भी अपनाते हैं, जहां वे सिर्फ म्यूजिक, डांस और दोस्तों के साथ पार्टी करते हैं।Gen-Z के लिए सेल्फ-केयर एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है, और Dry Holi इसी सोच के अनुरूप है।
3. पर्सनल बाउंड्री और कंसेंट की अहमियत
होली के दौरान “बुरा न मानो होली है” कहकर कई बार लोग दूसरों की पर्सनल बाउंड्री का उल्लंघन कर देते हैं। अनचाहा रंग लगाना, जबरदस्ती पानी डालना या कीचड़ में धकेलना जैसी घटनाएं कई लोगों को असहज करती हैं।Gen-Z पर्सनल स्पेस और कंसेंट को लेकर बहुत स्पष्ट सोच रखती है। उनके लिए त्योहार का मतलब किसी की मर्जी के बिना उसे शामिल करना नहीं है।Dry Holi का ट्रेंड इस बात को बढ़ावा देता है कि त्योहार खुशी से और आपसी सहमति से मनाया जाए। अगर कोई रंग नहीं लगवाना चाहता, तो उसके फैसले का सम्मान किया जाए।यह बदलाव केवल होली तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में एक बड़े सांस्कृतिक परिवर्तन की ओर इशारा करता है, जहां व्यक्तिगत पसंद और सीमाओं को महत्व दिया जा रहा है।
4. इंस्टाग्राम-फ्रेंडली और मॉडर्न सेलिब्रेशन स्टाइल
Gen-Z को सोशल मीडिया जेनरेशन भी कहा जाता है। उनके लिए त्योहार केवल ऑफलाइन नहीं, बल्कि ऑनलाइन भी होते हैं।Wet Holi में कपड़े खराब होना, मेकअप बिगड़ना और पहचान में न आना आम बात है। वहीं Dry Holi में लोग स्टाइलिश आउटफिट पहनकर, हल्के गुलाल के साथ फोटोशूट और रील्स बनाते हैं।कई कैफे, क्लब और हाउस पार्टियों में “Dry Holi Bash” का आयोजन होता है, जहां डीजे, ऑर्गेनिक गुलाल और थीम-बेस्ड ड्रेस कोड होता है। यह अनुभव ज्यादा कंट्रोल्ड, साफ-सुथरा और इंस्टाग्राम-फ्रेंडली माना जाता है।युवा पीढ़ी के लिए त्योहार अब एक “एक्सपीरियंस” बन गया है, जिसे वे यादगार और शेयर करने लायक बनाना चाहते हैं।
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क्या Dry Holi परंपरा से दूर जाना है?
कुछ लोग मानते हैं कि Dry Holi पारंपरिक होली की भावना को कम कर रही है। लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहार समय के साथ बदलते हैं।पहले जहां कीचड़ और पक्के रंगों से होली खेली जाती थी, वहीं अब हर्बल रंगों का चलन बढ़ा है। उसी तरह Dry Holi भी एक आधुनिक रूप है, जो बदलती जीवनशैली और सोच को दर्शाता है।महत्वपूर्ण बात यह है कि त्योहार की मूल भावना प्रेम, भाईचारा और खुशियां बनी रहे। चाहे पानी से हो या बिना पानी के, होली का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना है।Gen-Z के बीच Dry Holi का बढ़ता ट्रेंड केवल एक फैशन नहीं, बल्कि सोच में बदलाव का संकेत है। पर्यावरण संरक्षण, हेल्थ अवेयरनेस, पर्सनल बाउंड्री का सम्मान और सोशल मीडिया कल्चर ये चार बड़े कारण हैं जो इस ट्रेंड को आगे बढ़ा रहे हैं।यह कहा जा सकता है कि Dry Holi पारंपरिक होली का विरोध नहीं, बल्कि उसका एक नया और जागरूक रूप है। समय के साथ त्योहारों का स्वरूप बदलता है, लेकिन उनकी भावना वही रहती है।अंततः, चाहे रंगों से खेलें या बिना रंगों के, जरूरी यह है कि त्योहार खुशी, सम्मान और जिम्मेदारी के साथ मनाया जाए।
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