Kharif Crop Sowing 2026: जुलाई के पहले सप्ताह में खरीफ फसलों की बुवाई बढ़ी, कृषि मंत्रालय ने जारी किए ताजा आंकड़े
Kharif Crop Sowing 2026, देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में भी तेजी देखने को मिल रही है।
Kharif Crop Sowing 2026 : धान की बुवाई में तेजी, अरहर-सोयाबीन और कपास पर क्या है अपडेट?
Kharif Crop Sowing 2026, देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में भी तेजी देखने को मिल रही है। जून में कमजोर बारिश के कारण बुवाई की रफ्तार धीमी रही थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश बढ़ने से किसानों ने खेतों का रुख किया है। इसका सबसे बड़ा फायदा धान (पैडी) की बुवाई को मिला है। हालांकि, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली और कपास जैसी अन्य प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कुछ क्षेत्रों में पीछे चल रही है।
धान की बुवाई में आई तेजी
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में धान की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानसून के सक्रिय होने के बाद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड सहित कई राज्यों में किसानों ने तेजी से रोपाई शुरू की है।धान खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल है और देश के खाद्यान्न उत्पादन में इसकी अहम भूमिका होती है। बेहतर बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनने से रोपाई का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है।
खरीफ बुवाई अभी भी पिछले साल से पीछे
हालांकि जुलाई की शुरुआत में बुवाई की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन कुल खरीफ क्षेत्र अभी भी पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 21 प्रतिशत कम बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह जून महीने में मानसून का देर से सक्रिय होना और कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज होना है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के शेष दिनों में अच्छी बारिश जारी रहती है तो यह अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।
अरहर की बुवाई कैसी रही?
दलहन फसलों में अरहर (तुअर) की बुवाई धीरे-धीरे बढ़ रही है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में किसानों ने बारिश मिलने के बाद बुवाई शुरू कर दी है।हालांकि शुरुआती देरी के कारण कई क्षेत्रों में अरहर का रकबा अभी भी सामान्य स्तर से कम है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होती रही तो किसान बुवाई का लक्ष्य पूरा करने की कोशिश करेंगे।
सोयाबीन की स्थिति
सोयाबीन की खेती मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में होती है। जून में कमजोर मानसून के कारण इसकी बुवाई काफी प्रभावित हुई थी।हालांकि सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के अनुसार, जुलाई की शुरुआत तक देश में लगभग 28.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। कई राज्यों में बारिश बढ़ने के बाद किसान तेजी से बुवाई कर रहे हैं, जिससे आने वाले सप्ताह में रकबा और बढ़ने की उम्मीद है।
मूंगफली की बुवाई
मूंगफली की खेती गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर होती है। शुरुआती मानसूनी देरी के कारण इसकी बुवाई भी प्रभावित हुई थी।अब बारिश में सुधार के बाद किसानों ने बुवाई तेज कर दी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का दूसरा और तीसरा सप्ताह मूंगफली की बुवाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
कपास की क्या है स्थिति?
कपास की खेती करने वाले राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और तेलंगाना में भी शुरुआती देरी देखने को मिली थी।कम बारिश के कारण किसानों ने बुवाई टाल दी थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश के बाद कपास की बुवाई में सुधार शुरू हुआ है। इसके बावजूद कई इलाकों में कपास का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बताया जा रहा है।
मौसम विभाग की क्या है भविष्यवाणी?
हालांकि मानसून अब सक्रिय हो गया है, लेकिन मौसम विभाग ने जुलाई के पूरे महीने के लिए सामान्य से कम बारिश की संभावना भी जताई है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।इसके बावजूद कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में पर्याप्त वर्षा होती रही तो किसान काफी हद तक देरी की भरपाई कर सकते हैं।
किसानों की उम्मीदें बढ़ीं
बारिश में सुधार के साथ किसानों का उत्साह भी बढ़ा है। कई राज्यों में कृषि विभाग किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और तकनीकी सलाह उपलब्ध करा रहा है ताकि बुवाई का लक्ष्य जल्द पूरा किया जा सके।विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का महीना खरीफ सीजन के लिए निर्णायक रहेगा। यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो धान, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली और कपास सभी फसलों का रकबा तेजी से बढ़ सकता है।\जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की सक्रियता से खरीफ फसलों की बुवाई में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है। धान की रोपाई ने सबसे तेज रफ्तार पकड़ी है, जबकि अरहर, सोयाबीन, मूंगफली और कपास की बुवाई भी धीरे-धीरे गति पकड़ रही है। हालांकि कुल खरीफ क्षेत्र अभी पिछले साल के स्तर से नीचे है, लेकिन आने वाले हफ्तों की बारिश इस अंतर को काफी हद तक कम कर सकती है। फिलहाल किसानों और कृषि विशेषज्ञों की नजरें मानसून की आगे की चाल पर टिकी हुई हैं।
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