Ramlila Maidan Rally: रामलीला रैली की तस्वीर में AI का इस्तेमाल? किरेन रिजिजू के बयान से मचा सियासी घमासान
Ramlila Maidan Rally, सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक रैलियों की तस्वीरें और वीडियो अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। कभी रैली में उमड़ी भीड़ को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी तस्वीरों की वास्तविकता पर बहस शुरू हो जाती है। ऐसा ही एक मामला रामलीला रैली से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सामने आया है।
Ramlila Maidan Rally : रैली की भीड़ पर AI विवाद, किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कसा तंज
Ramlila Maidan Rally, सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक रैलियों की तस्वीरें और वीडियो अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। कभी रैली में उमड़ी भीड़ को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी तस्वीरों की वास्तविकता पर बहस शुरू हो जाती है। ऐसा ही एक मामला रामलीला रैली से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सामने आया है। इस पोस्ट में दिखाई गई भीड़ की तस्वीर को AI से तैयार किए जाने का दावा किया गया, जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तंज कसा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि संबंधित लोग ठीक से दिखावा भी नहीं कर पाए।यह मामला 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडी गठबंधन की रैली से जुड़ा है। इस रैली में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करना था। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी। इस आयोजन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही बयानबाजी जारी थी, लेकिन रैली के बाद भीड़ की तस्वीरों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया।दरअसल, रैली के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की गई, जिसमें रामलीला मैदान भारी भीड़ से भरा हुआ दिखाई दे रहा था। यह तस्वीर कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की ओर से साझा की गई थी। तेलंगाना से कांग्रेस सांसद वामसी गड्डम और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य जगदीश ठाकोर सहित कुछ लोगों ने भी इस तस्वीर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया। इसके बाद तस्वीर की वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि तस्वीर में AI का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने तस्वीर में दिखाई दे रहे मंच और नेताओं के चेहरों की तुलना रैली की वास्तविक तस्वीरों से करते हुए अंतर की ओर इशारा किया।इसी मामले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कथित AI तस्वीर साझा करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। रिजिजू ने अंग्रेजी में लिखा कि रामलीला मैदान को भरा हुआ दिखाने के लिए कांग्रेस की फेक नैरेटिव टीम AI से बनी नकली तस्वीर भी ठीक से तैयार नहीं कर पाई। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। रिजिजू का यह तंज सीधे तौर पर कांग्रेस की ओर से साझा की गई तस्वीर और रैली में भीड़ दिखाने के दावे पर था। हालांकि, AI के इस्तेमाल को लेकर सामने आए आरोपों को तस्वीर की स्वतंत्र तकनीकी जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

बीजेपी ने रैली में भीड़ के दावे पर उठाए सवाल
AI तस्वीर को लेकर विवाद के साथ-साथ बीजेपी ने रैली में शामिल लोगों की संख्या पर भी सवाल उठाए। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने दावा किया कि इंडी गठबंधन ने रैली से पहले 10 लाख लोगों के जुटने की बात कही थी, लेकिन आयोजन स्थल पर उतनी भीड़ दिखाई नहीं दी। पात्रा के मुताबिक, रामलीला मैदान में करीब 28 हजार कुर्सियां लगाई गई थीं और दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच इनमें से लगभग 5 हजार से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं। उन्होंने दावा किया कि मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली था। बीजेपी ने रैली की कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए भी अपने दावों को सामने रखा। हालांकि, ये आंकड़े बीजेपी नेताओं के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
कांग्रेस ने ड्रोन फुटेज से दिया जवाब
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। पार्टी की ओर से रैली स्थल के ड्रोन फुटेज और तस्वीरें साझा की गईं। कांग्रेस का दावा था कि रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। रैली में अलग-अलग राज्यों से आए विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। आयोजन स्थल के आसपास भी लोगों की आवाजाही देखी गई। इस तरह रैली में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के दावे अलग-अलग रहे।

रैली में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
इस पूरे विवाद के बीच रैली में राहुल गांधी का भाषण भी चर्चा में रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ा है।राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल या नेता की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के अधिकारों की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका ने मौजूदा सरकार को फायदा पहुंचाया। ये सभी राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप थे।

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रिजिजू और संबित पात्रा ने राहुल गांधी को भी घेरा
रैली से पहले भी किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से कई सवाल पूछे थे। उन्होंने पार्टी से पूछा था कि जब 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस को लगातार तीसरी बार चुनावी हार का सामना क्यों करना पड़ा? इसके अलावा उन्होंने मतदाता सूची में मृत, स्थान बदल चुके और दोहराए गए नामों को हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। रिजिजू ने SIR की पुरानी प्रक्रियाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा था।वहीं, संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर विपक्ष को चुनाव के नतीजों या चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने रैली में दिए गए भाषण और 10 लाख लोगों के जुटने के दावे पर भी सवाल उठाए।
AI तस्वीर से शुरू हुई बहस, सियासी बयानबाजी तक पहुंची
फिलहाल रामलीला मैदान की रैली के बाद AI तस्वीर को लेकर शुरू हुआ विवाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ बीजेपी नेताओं ने तस्वीर की प्रामाणिकता और भीड़ के दावे पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बात कही है।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली राजनीतिक तस्वीरों और वीडियो की वास्तविकता की जांच कितनी जरूरी है। AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच किसी भी तस्वीर को सच मानने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की पुष्टि करना जरूरी हो गया है। खासकर राजनीतिक आयोजनों से जुड़ी तस्वीरों के मामले में सही जानकारी और स्वतंत्र सत्यापन का महत्व और बढ़ जाता है।
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