Rajya Sabha elections 2026: कहां खत्म हुआ चुनाव, कहां होगी भिड़ंत? 26 निर्विरोध के बाद इन राज्यों में 11 सीटों पर लड़ाई
Rajya Sabha elections 2026, देश की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दस राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया के बीच सात राज्यों के 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं।
Rajya Sabha elections 2026 : 26 नेता पहुंचे राज्यसभा निर्विरोध, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में 11 सीटों पर वोटिंग तय
Rajya Sabha elections 2026, देश की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दस राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया के बीच सात राज्यों के 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख Sharad Pawar, केंद्रीय मंत्री Ramdas Athawale और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Abhishek Manu Singhvi जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन नेताओं को किसी प्रकार के मतदान या विरोध का सामना नहीं करना पड़ा और वे सीधे उच्च सदन पहुंच गए।हालांकि, अब भी तीन राज्यों Bihar, Odisha और Haryana की 11 सीटों पर मुकाबला बाकी है। इन सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटों के लिए चुनाव होना है।
बिहार में दिलचस्प सियासी मुकाबला
बिहार की पांच सीटों पर कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे एक सीट पर सीधा मुकाबला तय हो गया है। राज्य की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने को लेकर है। विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए उनका चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष Nitin Nabin के भी राज्यसभा पहुंचने की संभावना मजबूत है। जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा का नाम भी संभावित विजेताओं में गिना जा रहा है। हालांकि पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जहां बीजेपी के शिवेश कुमार और आरजेडी के एडी सिंह आमने-सामने हैं। इस सीट पर क्रॉस वोटिंग की आशंका से सभी दल सतर्क हैं।
ओडिशा और हरियाणा में भी टक्कर
ओडिशा की चार सीटों पर अतिरिक्त उम्मीदवार होने के कारण मतदान होगा। यहां सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच सीधी भिड़ंत देखने को मिल सकती है। इसी तरह हरियाणा की दो सीटों पर भी मुकाबला तय है। दोनों राज्यों में दलों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति बनाई है।क्रॉस वोटिंग की संभावना को देखते हुए भाजपा ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। बिहार में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को जिम्मेदारी दी गई है। हरियाणा में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी और ओडिशा में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
37 सीटों पर 40 उम्मीदवार
इन चुनावों के लिए करीब 40 उम्मीदवारों ने नामांकन भरा था। लेकिन कई राज्यों में विपक्ष द्वारा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण 26 नेता निर्विरोध चुन लिए गए। अब शेष 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन चुनावों के नतीजे संबंधित राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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किन राज्यों में निर्विरोध हुए चुनाव
महाराष्ट्र (7 सीटें)
महाराष्ट्र से शरद पवार और रामदास अठावले सहित सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इसके अलावा भाजपा के विनोद तावड़े, रामराव वडुकुटे और माया इवनाते, शिवसेना (शिंदे गुट) की ज्योति वाघमारे तथा पार्थ पवार भी बिना मुकाबले उच्च सदन पहुंचे।
तमिलनाडु (6 सीटें)
तमिलनाडु में डीएमके, एआईएडीएमके, पीएमके, कांग्रेस और डीएमडीके के उम्मीदवारों को निर्विरोध सफलता मिली। तिरुची शिवा, जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन, एम थंबीदुरई, अंबुमणि रामदास, एम क्रिस्टोफर तिलक और एल के सुदीश राज्यसभा के लिए चुने गए।
पश्चिम बंगाल (5 सीटें)
यहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत मिली। राहुल सिन्हा, बाबुल सुप्रियो, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, मेनका गुरुस्वामी और कोएल मलिक उच्च सदन पहुंचे।
असम (3 सीटें)
असम से भाजपा के जोगेन मोहन और तेरोस गोवाला तथा यूपीपीएल के प्रमोद बोरो निर्विरोध चुने गए। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने सभी को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि वे राज्य के हितों को मजबूती से उठाएंगे।
तेलंगाना (2 सीटें)
तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी निर्विरोध चुने गए।
छत्तीसगढ़ (2 सीटें)
छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा और फूलो देवी नेताम को बिना मतदान के जीत मिली।
हिमाचल प्रदेश (1 सीट)
हिमाचल प्रदेश की एक सीट पर भी उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया। कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव 2026 में 26 नेताओं का निर्विरोध चुना जाना सियासी समीकरणों का संकेत देता है। वहीं बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक दलों की रणनीति और एकजुटता की असली परीक्षा होगा। 16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि उच्च सदन में किस दल की स्थिति कितनी मजबूत होती है।
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