JPSC Scam: JPSC परीक्षा में ‘रेट कार्ड’ का खुलासा! प्रीलिम्स 5 लाख, फाइनल सिलेक्शन के लिए 70 लाख
JPSC Scam, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।
JPSC Scam : CID पूछताछ में अभय तिवारी का बड़ा खुलासा, JPSC परीक्षा में लाखों की डील का आरोप
JPSC Scam, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। CID की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर परीक्षा में पैसे के बदले मदद और चयन कराने से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में दावा किया गया है कि प्रीलिम्स पास कराने के लिए करीब 5 लाख रुपये, जबकि फाइनल चयन के लिए 70 लाख रुपये तक की रकम मांगे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
प्रीलिम्स से फाइनल तक कथित ‘रेट कार्ड’
CID की जांच में सामने आई जानकारी ने JPSC जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कथित सिंडिकेट में परीक्षा के अलग-अलग चरणों के लिए अलग-अलग रकम तय होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि प्रीलिम्स में मदद के लिए लगभग 5 लाख रुपये और फाइनल चयन तक पहुंचाने के लिए रकम कई गुना बढ़ जाती थी। कुछ रिपोर्टों में फाइनल चयन के लिए 70 लाख रुपये तक की कथित मांग का उल्लेख किया गया है। वहीं, अन्य रिपोर्टों में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ के नाम पर 25 से 40 लाख रुपये तक वसूले जाने का भी दावा किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां केवल पेपर लीक ही नहीं, बल्कि परीक्षा के विभिन्न चरणों में कथित संगठित भ्रष्टाचार की संभावनाओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
कौन है अभय तिवारी?
जांच के केंद्र में आए अभय तिवारी को लेकर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वह झारखंड के गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। सरकारी सेवा में आने से पहले वह परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था। CID की जांच में यह भी सामने आया कि अभय तिवारी ने कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उसने करीब 13 वर्षों में 12 सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। यही रिकॉर्ड कथित तौर पर अभ्यर्थियों के बीच उसका भरोसा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
12 परीक्षाएं पास करने का रिकॉर्ड बना ‘भरोसे का हथियार’
अभय तिवारी के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया है कि उसने पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों, सार्वजनिक क्षेत्र और JPSC-JSSC से जुड़ी कई परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। इसी उपलब्धि को वह कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल करता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसकी व्यक्तिगत परीक्षा सफलताओं और कथित नेटवर्क के बीच किस तरह का संबंध था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या अभ्यर्थियों को वास्तव में किसी चरण में अनुचित मदद दिलाई जाती थी या फिर ‘गारंटीड सिलेक्शन’ के नाम पर पैसे वसूले जाते थे।
इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने का भी आरोप
JPSC घोटाले की जांच सिर्फ लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, CID को कथित तौर पर ऐसे मामलों की जानकारी मिली है, जिनमें इंटरव्यू के अंकों में हेरफेर कर कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने का आरोप है।जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित सिंडिकेट में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों, बिचौलियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की क्या भूमिका थी। कुछ रिपोर्टों में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते और आयोग से जुड़े कुछ पूर्व सदस्यों के नाम भी जांच के संदर्भ में सामने आए हैं। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत पुष्टि होना अभी बाकी है।
परीक्षा एजेंसी की भूमिका भी जांच के घेरे में
JPSC परीक्षा घोटाले की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, CID ने एजेंसी से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई की है और दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक किन लोगों की पहुंच थी और क्या किसी उम्मीदवार को परीक्षा से पहले प्रश्न या उत्तर से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई थी।
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JSSC परीक्षाओं से भी जुड़ रहे तार
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जांच का दायरा JPSC के साथ-साथ JSSC की कुछ परीक्षाओं तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। ताजा रिपोर्टों में JSSC CGL से जुड़े कथित पेपर लीक में 65 सवालों की जानकारी और उम्मीदवारों से पैसे लिए जाने के आरोपों का भी उल्लेख है।CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दोनों मामलों के पीछे एक ही नेटवर्क सक्रिय था और किन-किन लोगों ने इसमें भूमिका निभाई।
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अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा सवाल
JPSC और JSSC जैसी परीक्षाएं झारखंड के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में अगर परीक्षा में पैसे और प्रभाव के जरिए कथित तौर पर चयन कराने का नेटवर्क सामने आता है, तो इसका सीधा असर उन उम्मीदवारों के भरोसे पर पड़ता है जो वर्षों तक मेहनत और तैयारी करते हैं।फिलहाल CID की जांच जारी है और अभय तिवारी समेत गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच में सामने आए आरोपों को अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों से परखा जाएगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित रेट कार्ड कितना व्यापक था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और किन परीक्षाओं या उम्मीदवारों को इसका फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
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