ISRO: भारत का स्पेस स्टेशन मिशन, ISRO ने तेज की तैयारी, जानें कब होगा लॉन्च
ISRO, भारत अब बहुत जल्द उन चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में शामिल होने जा रहा है, जिनके पास अंतरिक्ष में अपना खुद का स्पेस स्टेशन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत स्पेस स्टेशन
ISRO : भारत का अपना स्पेस स्टेशन! ISRO के इस मिशन से बदलेगा अंतरिक्ष का भविष्य
ISRO, भारत अब बहुत जल्द उन चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में शामिल होने जा रहा है, जिनके पास अंतरिक्ष में अपना खुद का स्पेस स्टेशन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत स्पेस स्टेशन (Bharat Space Station – BAS) के कोर स्ट्रक्चर पर काम शुरू कर दिया है। यह परियोजना भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक नया अध्याय साबित होने वाली है। ISRO का यह महत्वाकांक्षी मिशन भारत को अंतरिक्ष में स्थायी मौजूदगी दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। गगनयान मिशन के बाद यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा मानव अंतरिक्ष प्रोजेक्ट होगा।
लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित होगा भारत का स्पेस स्टेशन
भारत स्पेस स्टेशन को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया जाएगा। यह स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करेगा। इस ऊंचाई पर मौजूद रहने से वैज्ञानिकों को माइक्रोग्रैविटी रिसर्च करने में मदद मिलेगी। इस स्टेशन पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर विभिन्न प्रयोग कर सकेंगे। इससे जैविक विज्ञान, भौतिकी, अंतरिक्ष चिकित्सा और नई तकनीकों पर शोध को नई गति मिलेगी।
2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत स्पेस स्टेशन का पहला चरण 2028 में शुरू होगा। इस दौरान स्टेशन का पहला मॉड्यूल अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य मॉड्यूल जोड़े जाएंगे। ISRO का लक्ष्य है कि 2035 तक कुल पांच मॉड्यूल जोड़कर भारत स्पेस स्टेशन को पूरी तरह ऑपरेशनल बना दिया जाए। यह एक लंबी लेकिन रणनीतिक योजना है, जो भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
एक साथ 3–4 अंतरिक्ष यात्री रह सकेंगे
भारत स्पेस स्टेशन को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इसमें एक समय में 3 से 4 अंतरिक्ष यात्री रह सकें। स्टेशन में रहने की सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद होंगी, ताकि अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक सुरक्षित और आरामदायक तरीके से काम कर सकें। यह स्टेशन वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ-साथ अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और गगनयान मिशन के अगले चरणों के लिए भी उपयोग किया जाएगा।
मॉड्यूल का साइज और निर्माण तकनीक
भारत स्पेस स्टेशन का हर मॉड्यूल तकनीकी रूप से बेहद एडवांस होगा। प्रत्येक मॉड्यूल का व्यास 3.8 मीटर और ऊंचाई 8 मीटर तय की गई है। इन मॉड्यूल्स का निर्माण उच्च शक्ति वाले एल्युमिनियम मिश्र धातु (AA-2219) से किया जाएगा। ISRO ने साफ किया है कि निर्माण में 0.5 मिलीमीटर की गलती भी स्वीकार्य नहीं होगी। इसके लिए कंपनियों को अत्याधुनिक वेल्डिंग और फैब्रिकेशन तकनीक विकसित करनी होगी।
भारतीय कंपनियों के लिए ISRO ने रखी सख्त शर्तें
चूंकि यह मॉड्यूल इंसानों के रहने योग्य होंगे, इसलिए ISRO ने भारतीय कंपनियों के लिए बेहद कड़े मानक तय किए हैं। जो कंपनियां इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहती हैं, उनके लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं।
- कम से कम 5 साल का एयरोस्पेस निर्माण अनुभव
- पिछले 3 वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 50 करोड़ रुपये
- खास तकनीकी क्षमता और उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन
ISRO के अनुसार, 8 मार्च 2026 आवेदन करने की अंतिम तिथि तय की गई है।
पूरी तरह स्वदेशी होगा भारत स्पेस स्टेशन
ISRO ने स्पष्ट किया है कि भारत स्पेस स्टेशन एक पूरी तरह स्वदेशी परियोजना होगी। इसमें किसी भी तरह के विदेशी सहयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी। डिजाइन से लेकर निर्माण तक हर प्रक्रिया भारत में ही पूरी की जाएगी। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती देगी। इससे देश की निजी और सरकारी एयरोस्पेस कंपनियों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।
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चंद्र मिशन के लिए बनेगा ट्रांजिट हब
भारत स्पेस स्टेशन का उपयोग सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में यह स्टेशन चंद्रमा पर मानव भेजने के मिशन के लिए एक अहम ट्रांजिट हब की भूमिका निभाएगा।अंतरिक्ष यात्री यहां से चंद्र मिशन के लिए रवाना हो सकेंगे, जिससे भारत की अंतरिक्ष रणनीति और ज्यादा मजबूत होगी।
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भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को मिलेगी नई उड़ान
भारत स्पेस स्टेशन परियोजना भारत को उन देशों की सूची में शामिल कर देगी, जिनके पास अंतरिक्ष में अपना स्थायी ठिकाना है। यह गगनयान की सफलता के बाद भारत का अगला बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। ISRO की यह पहल न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने की दिशा में निर्णायक कदम भी है। आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष में स्थायी मौजूदगी दर्ज कराकर वैश्विक मंच पर अपनी ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन करेगा।
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