Indian ship green asha crosses hormuz: होर्मुज से रवाना हुआ 8वां जहाज ‘ग्रीन आशा’, 20 हजार टन LPG लेकर भारत की ओर
Indian ship green asha crosses hormuz, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री गतिविधियों पर बढ़ती निगरानी के बीच भारत के लिए एक अहम खबर सामने आई है। भारत का आठवां एलपीजी वाहक जहाज ‘ग्रीन आशा’
Indian ship green asha crosses hormuz : ऊर्जा सप्लाई मजबूत: होर्मुज से निकला 8वां जहाज ‘ग्रीन आशा’
Indian ship green asha crosses hormuz, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री गतिविधियों पर बढ़ती निगरानी के बीच भारत के लिए एक अहम खबर सामने आई है। भारत का आठवां एलपीजी वाहक जहाज ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुका है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार इस जहाज पर करीब 20,000 टन एलपीजी लदी हुई है, जो भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।भारतीय समयानुसार रविवार दोपहर लगभग 3:30 बजे यह जहाज ईरान के लारक, केशम और होर्मुज द्वीपों के बीच स्थित ईरानी जलक्षेत्र से गुजरने के बाद जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में प्रवेश कर गया। इस घटनाक्रम को मौजूदा परिस्थितियों में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
युद्ध के बाद आठवां भारतीय जहाज
सूत्रों के मुताबिक 28 फरवरी को क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद से यह आठवां भारतीय जहाज है, जिसने एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया है। मौजूदा हालात में इस समुद्री मार्ग से गुजरना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि यहां सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी लगातार बढ़ाई गई है।’ग्रीन आशा’ की सुरक्षित आवाजाही यह दर्शाती है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए हरसंभव कूटनीतिक और रणनीतिक प्रयास कर रहा है।
‘ग्रीन सांवरी’ भी कर चुका है पार
‘ग्रीन आशा’ से पहले भारतीय जहाज ‘ग्रीन सांवरी’ ने भी शुक्रवार रात को होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया था। इस जहाज पर लगभग 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी का कार्गो लदा हुआ था। दोनों जहाजों की सफल आवाजाही से यह स्पष्ट होता है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय जहाजों की निगरानी और समन्वय मजबूत बना हुआ है।ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की नियमित आपूर्ति देश की घरेलू जरूरतों और औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में इन जहाजों का सुरक्षित पहुंचना आर्थिक स्थिरता के लिए भी अहम है।
भारतीय नौसेना अलर्ट मोड में
एएनआई से मिली जानकारी के अनुसार, व्यापारिक जहाजों को हरसंभव सहायता देने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत पूरी तरह तैयार हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित समुद्री नाकेबंदी की स्थिति को देखते हुए नौसेना हाई अलर्ट पर है।सरकार की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय जहाजों और उनके चालक दल को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। यह कदम समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
ईरानी अधिकारियों से लगातार संवाद
केंद्र सरकार भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध रूप से गुजरने की अनुमति दिलाने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है। कूटनीतिक स्तर पर चल रही यह बातचीत भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है।विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसलिए भारत समेत कई देश इस मार्ग की स्थिरता को लेकर सतर्क हैं।
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18 जहाज अब भी फारसी खाड़ी में
इससे पहले जहाजरानी मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि फारसी की खाड़ी में अभी भी 18 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर लगभग 485 नाविक सवार हैं। हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए इन सभी जहाजों और उनके चालक दल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर आयोजित एक संयुक्त ब्रीफिंग में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
अब तक 964 नाविकों की वापसी
सरकार के प्रयासों के तहत अब तक 964 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। यह अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को कम किया जा सके।अधिकारियों के अनुसार, देशभर के बंदरगाहों पर संचालन सामान्य रूप से जारी है और आपूर्ति श्रृंखला पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है।
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ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम
‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में जब समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में भारतीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही देश की रणनीतिक तैयारी को दर्शाती है।कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार, नौसेना और संबंधित मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों से ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिल रही है। आने वाले दिनों में भी स्थिति पर करीबी नजर रखी जाएगी, ताकि भारत की आवश्यक ऊर्जा जरूरतें बिना किसी बाधा के पूरी होती रहें।
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