India-Russia: रूस दौरे पर विदेश मंत्री जयशंकर, भारत-रूस आयोग की 27वीं बैठक की करेंगे सह-अध्यक्षता
India-Russia, भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों रूस के दौरे पर हैं।
India-Russia : भारत-रूस संबंधों के लिए अहम दिन, मॉस्को में 27वें आयोग की बैठक की कमान जयशंकर के हाथ
India-Russia, भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों रूस के दौरे पर हैं। 23-24 अगस्त 2026 के अपने दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान जयशंकर मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे। यह आयोग दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रमुख मंच है।

27वें सत्र में कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक दोनों देशों के आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग, विज्ञान एवं तकनीक, ऊर्जा, औद्योगिक सहयोग और अन्य क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा होने की उम्मीद है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना इस बैठक का महत्वपूर्ण एजेंडा है।इस आयोग की खासियत यह है कि इसमें दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़े मुद्दों पर एक साथ बातचीत होती है। ऐसे में बैठक से केवल तत्काल व्यापारिक फैसलों की उम्मीद नहीं होती, बल्कि भविष्य के सहयोग के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने में भी मदद मिलती है।
रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ बैठक
जयशंकर की मॉस्को यात्रा रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के निमंत्रण पर हो रही है। मंटुरोव भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग में रूस की ओर से सह-अध्यक्ष हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच होने वाली यह बैठक आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।भारत और रूस पिछले कुछ वर्षों में व्यापार तथा ऊर्जा सहयोग को लगातार बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में आयोग की बैठक दोनों देशों के बीच मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा और नई संभावनाओं की पहचान के लिए अहम मंच उपलब्ध कराएगी।
पुतिन से भी मिले एस. जयशंकर
रूस यात्रा के दौरान जयशंकर ने सोमवार को क्रेमलिन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने तथा द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पुतिन को शुभकामनाएं दीं और प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत संदेश भी सौंपा।जयशंकर और पुतिन के बीच बातचीत में व्यापार और आर्थिक सहयोग के साथ ऊर्जा, उर्वरक तथा परमाणु क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत-रूस आर्थिक संबंधों को नई गति देने के लिए दोनों पक्षों की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
व्यापार और आर्थिक सहयोग पर खास जोर
भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग हाल के वर्षों में विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग है और तेल तथा अन्य ऊर्जा संसाधनों से जुड़े व्यापार ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और महत्व दिया है।राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत के दौरान भी आर्थिक सहयोग को प्रमुखता मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस की ओर से भारत के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों में हो रही प्रगति को सकारात्मक रूप से देखा गया है। ऐसे में IRIGC-TEC की बैठक दोनों देशों के लिए व्यापारिक रिश्तों को और विस्तार देने का अवसर प्रदान कर सकती है।
विज्ञान और तकनीक में सहयोग बढ़ाने की कोशिश
भारत-रूस संबंध केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में भी सहयोग के कई आयाम हैं। IRIGC-TEC का उद्देश्य इन्हीं क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाना है।तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में नई परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा दोनों देशों की दीर्घकालिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत और रूस अपने-अपने उद्योगों तथा तकनीकी क्षमताओं के लिए नए अवसर तलाश रहे हैं।
भारत-रूस संबंधों की अहम कड़ी है आयोग
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी कई दशकों पुरानी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, रूस भारत का लंबे समय से चला आ रहा और समय-परीक्षित साझेदार है। दोनों देशों के संबंध राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं।अंतर-सरकारी आयोग इसी व्यापक साझेदारी को आर्थिक और व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयोग की बैठकों के जरिए दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा करते हैं और आने वाले समय के लिए प्राथमिकताएं तय करते हैं।
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वैश्विक परिस्थितियों के बीच यात्रा का महत्व
जयशंकर का रूस दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, ऊर्जा और भू-राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। भारत के लिए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए विभिन्न देशों के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को संतुलित करना महत्वपूर्ण है।रूस के साथ भारत के संबंध भी इसी व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखते हैं। ऐसे समय में उच्चस्तरीय बैठकों का महत्व और बढ़ जाता है।
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आगे बढ़ेगी भारत-रूस साझेदारी
जयशंकर की मॉस्को यात्रा और 27वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक को दोनों देशों के संबंधों को आर्थिक और तकनीकी आधार पर और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग, विज्ञान, तकनीक और संस्कृति समेत कई क्षेत्रों की समीक्षा होगी।पुतिन के साथ जयशंकर की मुलाकात ने इस यात्रा के कूटनीतिक महत्व को भी बढ़ा दिया है। अब निगाहें आयोग की बैठक के नतीजों और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर टिकी हैं। आने वाले समय में इन चर्चाओं से भारत-रूस व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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