Hindi News Today:ग्रीनलैंड पर ट्रंप का सख्त रुख, भारत-EU FTA लगभग तय और संसद में बदलेगा हाजिरी नियम
Hindi News Today: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने इरादे फिर दोहराए, जिससे यूरोप में नाराज़गी है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और 27 जनवरी को इसकी घोषणा संभव है। वहीं भारत में बजट सत्र से सांसदों की उपस्थिति दर्ज करने का नियम भी बदलने जा रहा है।
Hindi News Today: ग्रीनलैंड पर ट्रंप का बयान और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय तनाव
Hindi News Today: दुनिया की राजनीति और भारत की कूटनीति, दोनों इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही हैं। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख पर कायम हैं, तो दूसरी तरफ भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता लगभग तय माना जा रहा है। वहीं देश के भीतर संसद की कार्यप्रणाली को लेकर भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जिससे सांसदों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता बढ़ेगी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के इरादे से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने इसे अमेरिका ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी “बहुत जरूरी” बताया है। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम है और वहां अमेरिका की मौजूदगी से दुनिया में संतुलन बना रह सकता है।
Read More: Gender Equality Month 2026: हर कदम मायने रखता है, Gender Equality Month 2026 में जागरूकता फैलाएं
इसी के साथ उन्होंने 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया है और कई मौकों पर सैन्य ताकत के इस्तेमाल की बात तक कह चुके हैं। इससे यूरोप, कनाडा और कई दूसरे देशों में नाराज़गी बढ़ गई है। फ्रांस जैसे देशों ने अमेरिका को सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि इस तरह का रवैया अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए ठीक नहीं है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने हालात को देखते हुए अपने नागरिकों से जरूरी आपूर्ति तैयार रखने का सुझाव दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में परेशानी न हो। यह बयान दिखाता है कि मामला सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वहां के लोग भी इसे गंभीरता से ले रहे हैं।
भारत और स्पेन के रिश्तों में नई मजबूती
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में स्पेन के विदेश मंत्री से मुलाकात में साफ कहा कि स्पेन भारत का एक अहम व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद से मुकाबले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट, मेक-इन-इंडिया और टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि भारत और स्पेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार मजबूत हो रहा है और कई स्पेनिश कंपनियां भारत में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इससे रोजगार के नए मौके भी पैदा हो रहे हैं और भारत की वैश्विक आर्थिक छवि और मजबूत हो रही है।
Read More: Disha Patani: दिशा पाटनी की फिटनेस का राज, ये 3 ड्रिंक्स करें आपकी डाइट का हिस्सा
एक ऐतिहासिक समझौते की ओर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA लगभग अंतिम रूप में है। उम्मीद है कि इसकी औपचारिक घोषणा 27 जनवरी को की जा सकती है। अगर यह समझौता लागू होता है तो यह दुनिया के 2 अरब से ज्यादा लोगों को जोड़ने वाला एक बहुत बड़ा आर्थिक मंच बन जाएगा। इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी और यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को भी इससे मजबूती मिलेगी।
संसद में बदलेगा हाजिरी का नियम
देश के भीतर भी एक अहम बदलाव होने जा रहा है। 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से सांसदों को अपनी उपस्थिति केवल सदन के अंदर, अपनी निर्धारित सीट से ही दर्ज करानी होगी। पहले वे बाहर की लॉबी से भी हाजिरी लगा सकते थे, लेकिन अब इस व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। अब सांसद की हाजिरी तभी मानी जाएगी जब वह सदन की कार्यवाही के दौरान अपनी सीट पर मौजूद होगा। अगर सदन स्थगित हो गया है तो उस समय हाजिरी दर्ज नहीं की जा सकेगी। इसका मकसद यह है कि सांसद सिर्फ कागज़ी तौर पर नहीं, बल्कि वास्तव में सदन की कार्यवाही में भाग लें। यह कदम संसद की गरिमा और कार्यकुशलता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
निष्कर्ष
एक तरफ दुनिया में ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का सख्त रुख वैश्विक राजनीति में हलचल मचा रहा है, तो दूसरी तरफ भारत अपने कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत-EU FTA जैसे समझौते देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। वहीं संसद में हाजिरी नियमों में बदलाव से लोकतंत्र को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। यह साफ है कि चाहे अंतरराष्ट्रीय मंच हो या देश की संसद, आने वाला समय बड़े फैसलों और बदलावों का समय है।
We’re now on WhatsApp. Click to join.
अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com







