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Gandak River: बिहार में गंडक का कहर! पुराना रिकॉर्ड टूटा, बगहा में 91.25 मीटर पहुंचा नदी का जलस्तर

Gandak River, बिहार में गंडक नदी ने इस बार बाढ़ का नया रिकॉर्ड बना दिया है। पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2024 में दर्ज रिकॉर्ड से करीब 35 सेंटीमीटर अधिक है।

Gandak River : गंडक नदी के उफान से मचा हड़कंप, 91.25 मीटर पहुंचा जलस्तर; कई इलाकों पर बाढ़ का खतरा

Gandak River, बिहार में गंडक नदी ने इस बार बाढ़ का नया रिकॉर्ड बना दिया है। पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2024 में दर्ज रिकॉर्ड से करीब 35 सेंटीमीटर अधिक है। नदी के इस उफान ने पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। पानी के भारी दबाव के कारण चंपारण तटबंध को भी नुकसान पहुंचा और पश्चिम चंपारण में दो स्थानों पर तटबंध टूटने की जानकारी सामने आई है।

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91.25 मीटर पहुंचा गंडक का जलस्तर

गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी की मुख्य वजह नेपाल के गंडक नदी बेसिन में हुई भारी बारिश बताई जा रही है। लगातार बारिश के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बराज में पानी का दबाव बढ़ा और वहां से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया। रिपोर्ट के अनुसार बराज पर डिस्चार्ज करीब 5.43 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था और कई घंटों तक यह 5 लाख क्यूसेक से अधिक बना रहा। इसका सीधा असर पश्चिम चंपारण और गंडक के निचले इलाकों में दिखाई दिया।बगहा गेज स्थल पर दर्ज 91.25 मीटर का जलस्तर इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 2024 में दर्ज उच्चतम स्तर करीब 90.90 मीटर था। यानी इस बार नदी ने अपना पुराना रिकॉर्ड पार कर लिया। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई।

चंपारण तटबंध पर पानी का भारी दबाव

गंडक के बढ़े हुए जलस्तर और तेज बहाव का सबसे बड़ा असर तटबंधों पर पड़ा। पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र में चखनी-खैरटवा के पास चंपारण तटबंध का हिस्सा सोमवार रात टूट गया। अलग-अलग रिपोर्टों में टूटे हिस्से की लंबाई करीब 10 मीटर से लेकर 150 फीट तक बताई गई है। जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने और मरम्मत कार्य में जुटी हैं।तटबंध टूटने के बाद आसपास के निचले इलाकों में तेजी से पानी फैलने लगा। इससे कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जरूरत पड़ रही है और प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

दो जगह तटबंध टूटने से बढ़ी चिंता

मौजूदा बाढ़ की स्थिति में पश्चिम चंपारण के चंपारण तटबंध पर दो स्थानों पर टूटने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में भी एक स्थान पर तटबंध को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है। लगातार तेज बहाव के कारण तटबंधों पर रिसाव, कटाव और ओवरटॉपिंग जैसी समस्याएं सामने आईं। जल संसाधन विभाग ने पहले ही कई कमजोर स्थानों पर मरम्मत और सुरक्षा कार्य किए थे, लेकिन पानी के दबाव के सामने कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए।तटबंध टूटने के बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी। कई परिवार अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे। प्रशासन और राहत दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।

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बगहा शहर में भी पहुंचा बाढ़ का पानी

गंडक नदी का पानी केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रहा। बगहा शहर के कई हिस्सों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। रिपोर्टों के अनुसार बेतिया-बगहा और वाल्मीकिनगर की ओर जाने वाले मार्गों पर भी पानी का असर पड़ा है। कुछ स्थानों पर सड़कें जलमग्न होने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।शहर में पानी पहुंचने के बाद प्रशासन के सामने लोगों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सड़क संपर्क बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

कई जिलों पर बाढ़ का असर

गंडक नदी के उफान का असर पश्चिम चंपारण के अलावा पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली तक दिखाई दे रहा है। नदी के निचले इलाकों में पानी फैलने के कारण कई गांवों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान की आशंका है।पश्चिम चंपारण के कई दियारा और निचले इलाकों में पहले से ही पानी पहुंच चुका था। गंडक बराज से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। हालांकि बाद में बराज से पानी के डिस्चार्ज में कमी आने की जानकारी मिली है, जिससे प्रशासन को कुछ राहत की उम्मीद है।

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प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों की निगरानी कर रही हैं। जहां कटाव या रिसाव की समस्या सामने आई है, वहां मरम्मत का काम शुरू किया गया है। स्थानीय प्रशासन भी संवेदनशील गांवों पर नजर रख रहा है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नदी का बहाव तेज होने के कारण क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत आसान नहीं है। ऐसे में कमजोर हिस्सों पर लगातार निगरानी और तत्काल बचाव कार्य बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

जलस्तर में कमी के बावजूद खतरा बरकरार

ताजा रिपोर्टों के अनुसार गंडक के जलस्तर और बराज से पानी के डिस्चार्ज में कुछ कमी आने के संकेत मिले हैं। हालांकि रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुके जलस्तर और तटबंधों को हुए नुकसान के कारण खतरा पूरी तरह टला नहीं है। निचले इलाकों में जमा पानी को निकलने में समय लग सकता है और किसी नए तेज बहाव की स्थिति में परेशानी फिर बढ़ सकती है।फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा, टूटे तटबंधों की मरम्मत और बाढ़ के पानी को रिहायशी इलाकों में आगे फैलने से रोकना है। गंडक नदी का 91.25 मीटर तक पहुंचना इस साल बिहार में बाढ़ की गंभीरता को दिखाता है और आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर तथा तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

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