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सह-शिक्षा की महत्ता

सह-शिक्षा : समानता की ओर क़दम


सह-शिक्षा के अर्थ से हम सभी वाक़िफ़ हैं। सह-शिक्षा अर्थात् लड़के व लड़कियों का साथ पढ़ना। हमारा देश भारत जो कितने ही वर्षों तक ग़ुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ा रहा उसके लिए रुढीवादिताओं को समाप्त करना कोई आसान कार्य नही रहा होगा। हमारे समाज ने वह समय भी देखा है जब लड़के व लड़की के साथ पढ़ने पर भी पाबन्दी लगाई हुई थी। जब भारतवर्ष पर मुग़ल शासक राज कर रहे थे तब स्त्रियों को घर से बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं दी जाती थी जिसके कारण उनका सामाजिक विकास नहीं हो पाता था, वे अपने अधिकारों से वांछित रह जाती थी, इससे स्त्रियाँ कमज़ोर होती गयी और पुरुष अपने आपको सर्वश्रेष्ठ समझने लगे। नारी को स्वतंत्रता बनाने में सह शिक्षा का सहयोग हमेशा से रहा है। क्योंकि यह उसे अपने से विपरीत लिंग के साथ पढ़ने का मौक़ा देती है जिससे वह जान पाती है की स्त्री व पुरूष दोनो समान है और पुरूषों कि पास ख़ुद को श्रेष्ठ समझने का कोई ख़ास कारण नहीं है।

सह-शिक्षा की महत्ता
सह-शिक्षा की महत्ता

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यह केवल लड़कियों कि लिए ही लाभदायक नहीं है यह लड़कों को भी तहज़ीब से पेश आना सिखाती है। जब वे लड़कियों के साथ रहते हैं तब वे उनका आदर करना भी सीख जाते हैं जो किसी भी सम्बंध में बहुत आवश्यक है। इससे लड़की व लड़के दोनों ही एक दूसरे के साथ उठना बैठना सीखते है जिससे उन्हें आने वाली ज़िन्दगी में सहायता मिलती है। जो बच्चे ऐसे विद्यालयों में पढ़े होते जहाँ सह-शिक्षा नहीं दी जाती वे फिर सदा ही अपने से विपरीत लिंग वाले लोगों से झिझकते हैं जो उनके सामाजिक विकास को रोक देता है। ऐसा देखा गया है की जो विद्यार्थी सह-शिक्षा नहीं ग्रहण करते वे आजीवन एक दूसरे का आदर करना नही सीख पाते। वे बच्चे जल्दी से दूसरे लोगों की मानसिकता को भी नहीं समझ पाता। उन्हें एक दूसरे के साथ रहना और अपनाना नहीं आता। उन्होंने अपने से विपरीत लिंग का सिर्फ़ एक ही पहलू देखा होता हैं क्योंकि उन्हें कभी एक दूसरे से बात करने का मौक़ा दिया ही नहीं जाता।

यही सब कारण मिलकर सह शिक्षा को और महत्वपूर्ण बनाते है। हमारे देश में अभी भी कितने गाँव व क़स्बे ऐसे हैं जहाँ सह-शिक्षा को निषेध माना जाता है। और लड़कियों को अलग व लड़कों को
अलग विद्यालयों में दाख़िला दिलाया जाता है। परंतु लड़की व लड़के दोनों के लिए ही सह-शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इसी सोच के साथ हमारा देश आगे बढ़ता रहा तो वह आगे बढ़कर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। सह-शिक्षा बच्चों को एक आधार प्रदान करती है जिससे स्त्री पुरुष एक साथ आगे बढ़ सकें।

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