World Hearing Day: विश्व श्रवण दिवस 2026, कानों की सेहत क्यों है जरूरी, जानें WHO का खास संदेश
World Hearing Day, हर साल 3 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व श्रवण दिवस (World Hearing Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को कान और सुनने की क्षमता (Hearing Health) से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और बहरेपन व
World Hearing Day : सुनने की क्षमता की सुरक्षा और जागरूकता का वैश्विक अभियान
World Hearing Day, हर साल 3 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व श्रवण दिवस (World Hearing Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को कान और सुनने की क्षमता (Hearing Health) से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और बहरेपन व सुनने की कमजोरी की रोकथाम के उपायों पर ध्यान आकर्षित करना है। यह दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पहल पर मनाया जाता है। आज के दौर में बढ़ता शोर, हेडफोन का अत्यधिक उपयोग, संक्रमण, उम्र का असर और सही समय पर इलाज न मिल पाना – ये सभी कारण सुनने की समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। ऐसे में विश्व श्रवण दिवस का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
विश्व श्रवण दिवस का इतिहास
विश्व श्रवण दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा की गई थी। पहले इसे International Ear Care Day के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर World Hearing Day कर दिया गया।
3 मार्च की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि यह 3.3 जैसी दिखती है, जो इंसान के दो कानों के आकार से मिलती-जुलती मानी जाती है।
WHO हर साल इस दिन एक खास थीम जारी करता है, जिसके जरिए दुनिया भर में सुनने की देखभाल से जुड़ा संदेश फैलाया जाता है।
सुनने की समस्या: एक गंभीर वैश्विक चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
सुनने की कमजोरी सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं है, बल्कि आज युवाओं और बच्चों में भी यह तेजी से देखने को मिल रही है। तेज आवाज में म्यूजिक सुनना, लंबे समय तक ईयरफोन लगाकर रहना और शोर-शराबे वाले माहौल में काम करना इसके प्रमुख कारण हैं।
सुनने की क्षमता कमजोर होने के कारण
सुनने की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
- लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहना
- मोबाइल और हेडफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल
- कान में संक्रमण या मैल जमना
- जन्मजात समस्याएं
- बढ़ती उम्र
- कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट
- सिर या कान पर गंभीर चोट
इन कारणों को समझकर और समय रहते सावधानी बरतकर सुनने की क्षमता को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
बच्चों में सुनने की समस्या का असर
अगर किसी बच्चे को सुनने में दिक्कत होती है और उसका समय पर इलाज नहीं हो पाता, तो इसका असर उसके बोलने, सीखने और मानसिक विकास पर पड़ता है। ऐसे बच्चे स्कूल में पिछड़ सकते हैं और आत्मविश्वास की कमी का भी सामना कर सकते हैं। इसीलिए WHO इस बात पर जोर देता है कि नवजात शिशुओं की सुनने की जांच जन्म के तुरंत बाद की जाए, ताकि किसी भी समस्या को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सके।
विश्व श्रवण दिवस का उद्देश्य
विश्व श्रवण दिवस का मुख्य उद्देश्य है:
- सुनने की समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- लोगों को नियमित हियरिंग चेकअप के लिए प्रेरित करना
- कानों की देखभाल से जुड़े सही उपायों की जानकारी देना
- बहरेपन से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना
- सरकारों और संस्थाओं को इस दिशा में नीति बनाने के लिए प्रोत्साहित करना
यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सुनने की क्षमता हमारी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा है, जिसकी देखभाल बेहद जरूरी है।
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सुनने की क्षमता को कैसे रखें सुरक्षित?
कुछ आसान आदतों को अपनाकर हम अपनी सुनने की क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं:
- हेडफोन या ईयरबड्स का सीमित और कम आवाज में इस्तेमाल करें
- तेज आवाज वाले माहौल में इयरप्लग का उपयोग करें
- कान में किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें
- कान की सफाई में नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करें
- समय-समय पर हियरिंग टेस्ट करवाएं
- बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दें
तकनीक और सुनने की देखभाल
आज के समय में तकनीक ने सुनने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। हियरिंग एड्स, कोक्लियर इंप्लांट और डिजिटल डिवाइसेज की मदद से लाखों लोग फिर से सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।हालांकि, WHO का मानना है कि इलाज से ज्यादा जरूरी है रोकथाम, ताकि लोग इस समस्या से बच सकें। विश्व श्रवण दिवस हमें यह सोचने का मौका देता है कि हम अपनी सुनने की क्षमता को कितनी गंभीरता से लेते हैं। सुनना केवल आवाजों को पहचानना नहीं, बल्कि संवाद, रिश्तों और समाज से जुड़ने का माध्यम है। अगर हम आज से ही थोड़ी सी सावधानी बरतें, सही जानकारी अपनाएं और समय पर जांच कराएं, तो आने वाली पीढ़ियों को सुनने की समस्याओं से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
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