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Tuberculosis symptoms: दिल्ली में टीबी को लेकर बढ़ी चिंता, 42 दिनों में 12 हजार से ज्यादा केस; इन संकेतों पर रहें सतर्क

Tuberculosis symptoms, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टीबी यानी Tuberculosis को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। दिल्ली में चलाए गए 42 दिनों के विशेष स्क्रीनिंग अभियान के दौरान 12,078 नए टीबी मरीज सामने आए। यह अभियान 24 मार्च से 5 मई 2026 के बीच चलाया गया था,

Tuberculosis symptoms : 42 दिन की स्क्रीनिंग में सामने आए 12,078 नए मरीज, जानें टीबी के प्रमुख लक्षण

Tuberculosis symptoms, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टीबी यानी Tuberculosis को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। दिल्ली में चलाए गए 42 दिनों के विशेष स्क्रीनिंग अभियान के दौरान 12,078 नए टीबी मरीज सामने आए। यह अभियान 24 मार्च से 5 मई 2026 के बीच चलाया गया था, जिसमें कुल 71,603 लोगों की जांच की गई। सामने आए मामलों में 10,755 वयस्क और 1,323 बच्चे शामिल थे। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्क्रीनिंग बढ़ने से ऐसे मरीज भी सामने आते हैं, जिनमें बीमारी पहले छिपी रह सकती थी। इसलिए इन आंकड़ों को केवल संक्रमण में अचानक हुई बढ़ोतरी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। फिर भी दिल्ली में टीबी का लगातार बना रहना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

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42 दिनों में कैसे सामने आए इतने मामले?

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच मुहिम के दौरान 71,603 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 12,078 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई। खास बात यह रही कि करीब 42 प्रतिशत मामले एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी के थे। इसका मतलब है कि संक्रमण केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों में भी पाया गया। दिल्ली में इस साल 1 जुलाई तक टीबी के लिए 28.83 लाख लोगों की स्क्रीनिंग, 21.67 लाख Chest X-Ray और 3.65 लाख Molecular Tests किए जा चुके थे। इसी अवधि तक करीब 1.75 लाख टीबी मरीजों को नोटिफाई किया गया था

दिल्ली में लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई है टीबी

आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में टीबी के मामले पिछले कुछ वर्षों से एक लाख से ऊपर बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 में 1,00,523, 2024 में 1,05,343 और 2025 में 1,12,977 मामले दर्ज किए गए। 2024 में दिल्ली में टीबी से 5,093 मौतें भी दर्ज हुई थीं। सरकार ने दिल्ली के 11 जिलों के 38 हाई-रिस्क वार्डों को विशेष निगरानी में रखा है। घनी आबादी, प्रवासी आबादी, पोषण की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच जैसे कारक शहरी क्षेत्रों में टीबी की रोकथाम और समय पर इलाज को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। ICMR ने भी दिल्ली की घनी आबादी वाली बस्तियों में समुदाय आधारित टीबी स्क्रीनिंग और उपचार सहायता को मजबूत करने के लिए एक परियोजना प्रस्तावित की है।

टीबी क्या है?

टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बीमारी सबसे ज्यादा फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे लिम्फ नोड्स, हड्डियों, रीढ़, किडनी और मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकती है। फेफड़ों की सक्रिय टीबी वाले व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने पर हवा के जरिए बैक्टीरिया फैल सकते हैं। हालांकि, टीबी संक्रमण और सक्रिय टीबी बीमारी एक ही चीज नहीं हैं। संक्रमित व्यक्ति में बीमारी तुरंत विकसित हो, यह जरूरी नहीं है।

लंबे समय तक खांसी हो तो रहें सावधान

टीबी का सबसे आम संकेत लगातार खांसी है। भारत के केंद्रीय टीबी विभाग के अनुसार, अगर खांसी दो सप्ताह या उससे ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो जांच कराना जरूरी है। खांसी के साथ बलगम या कभी-कभी बलगम में खून भी आ सकता है। WHO भी लंबे समय तक रहने वाली खांसी, सीने में दर्द, कमजोरी, वजन कम होना, बुखार और रात में पसीना आने को टीबी के सामान्य लक्षणों में शामिल करता है।

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इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

टीबी के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। खासकर एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी में लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन-सा अंग प्रभावित हुआ है।

इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी
  • सीने में दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • खांसते समय खून आना
  • लगातार या बार-बार बुखार
  • रात में अत्यधिक पसीना
  • बिना कोशिश के वजन कम होना
  • भूख कम लगना
  • लगातार थकान या कमजोरी
  • गर्दन या शरीर के किसी हिस्से में लिम्फ नोड्स की सूजन

भारत के 2026 के टीबी अभियान में भी इन्हीं तरह के 10 प्रमुख लक्षणों के आधार पर स्क्रीनिंग पर जोर दिया गया है।

हर खांसी टीबी नहीं होती

यह भी समझना जरूरी है कि लंबे समय तक खांसी होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को टीबी ही है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी, अस्थमा, निमोनिया और कई अन्य स्थितियों में भी खांसी हो सकती है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से टीबी की पुष्टि करना सही नहीं है। WHO के अनुसार, लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्यकर्मी से जांच और जरूरत के अनुसार डायग्नोस्टिक टेस्ट कराना चाहिए।

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टीबी की जांच कैसे होती है?

फेफड़ों की टीबी की जांच में डॉक्टर मरीज के लक्षणों और स्थिति के अनुसार बलगम की जांच, Chest X-Ray और Molecular Tests जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं। WHO लक्षण वाले लोगों में शुरुआती जांच के लिए Rapid Diagnostic Tests को प्राथमिकता देने की सिफारिश करता है। अगर टीबी शरीर के किसी दूसरे हिस्से में है, तो प्रभावित अंग के अनुसार अलग नमूने या जांच की जरूरत पड़ सकती है।

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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

कुछ लोगों में टीबी बीमारी विकसित होने का जोखिम ज्यादा हो सकता है। WHO के अनुसार कमजोर इम्यून सिस्टम, HIV, कुपोषण और डायबिटीज जैसी स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। तंबाकू का सेवन भी टीबी के जोखिम से जुड़ा हुआ है। ऐसे लोगों को लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह से समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

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टीबी का इलाज संभव है

टीबी को लेकर डरने के बजाय समय पर जांच और इलाज कराना सबसे जरूरी है। WHO के अनुसार टीबी रोकथाम योग्य और इलाज योग्य बीमारी है। लेकिन डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी होता है। इलाज बीच में छोड़ने से बीमारी के दोबारा होने और दवा-प्रतिरोधी टीबी जैसी गंभीर समस्या का जोखिम बढ़ सकता है। भारत में सरकारी और चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और उपचार सेवाएं उपलब्ध हैं। केंद्रीय टीबी विभाग के अनुसार, टीबी से जुड़ी जानकारी और सहायता के लिए Nikshay Sampark हेल्पलाइन 1800-11-6666 भी उपलब्ध है। दिल्ली में 42 दिनों की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान 12,078 टीबी मामले सामने आना इस बीमारी की चुनौती को जरूर रेखांकित करता है। साथ ही, बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग से ऐसे छिपे मामलों की पहचान भी संभव हुई है, जिनका समय पर पता नहीं चल पाता। सबसे जरूरी है कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना, सीने में दर्द, सांस फूलना या बलगम में खून जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं, क्योंकि समय पर पहचान और पूरा इलाज टीबी से बचाव और इसके प्रसार को रोकने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।

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