Floss oral health: गलत फ्लॉसिंग से ब्लीडिंग और इन्फेक्शन का खतरा, ऐसे करें बचाव
Floss oral health, दांतों की सफाई के लिए ब्रश करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है फ्लॉसिंग करना। फ्लॉसिंग दांतों के बीच फंसे खाने के कण और प्लाक को हटाने में मदद करती है,
Floss oral health : फ्लॉसिंग के फायदे तभी जब तरीका सही हो, जानें पूरी गाइड
Floss oral health, दांतों की सफाई के लिए ब्रश करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है फ्लॉसिंग करना। फ्लॉसिंग दांतों के बीच फंसे खाने के कण और प्लाक को हटाने में मदद करती है, जहां ब्रश आसानी से नहीं पहुंच पाता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्यादा या गलत तरीके से फ्लॉसिंग करना आपके मसूड़ों और दांतों को नुकसान भी पहुंचा सकता है? आइए जानते हैं इसके संभावित नुकसान और सही तरीका।
फ्लॉसिंग क्यों है जरूरी?
फ्लॉसिंग करने से दांतों के बीच जमी गंदगी साफ होती है और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। नियमित फ्लॉसिंग से कैविटी, बदबूदार सांस और मसूड़ों की सूजन जैसी समस्याओं से बचाव होता है। दंत चिकित्सक भी रोजाना कम से कम एक बार फ्लॉसिंग करने की सलाह देते हैं।
ज्यादा फ्लॉसिंग करने के नुकसान
1. मसूड़ों से खून आना
अगर आप दिन में कई बार या बहुत ज्यादा जोर लगाकर फ्लॉसिंग करते हैं, तो मसूड़ों से खून आने की समस्या हो सकती है। लगातार ऐसा करने से मसूड़े कमजोर हो सकते हैं।
2. मसूड़ों में सूजन और दर्द
गलत तकनीक या बार-बार फ्लॉसिंग करने से मसूड़ों में जलन और सूजन हो सकती है। इससे दांतों के आसपास की त्वचा संवेदनशील हो जाती है।
3. इनेमल को नुकसान
बहुत ज्यादा रगड़ने से दांतों की ऊपरी परत यानी इनेमल प्रभावित हो सकती है। इनेमल कमजोर होने पर दांतों में सेंसिटिविटी बढ़ जाती है।
4. मसूड़ों का पीछे हटना (गम रीसशन)
कठोरता से फ्लॉसिंग करने पर मसूड़े धीरे-धीरे पीछे हट सकते हैं। इससे दांतों की जड़ें खुलने लगती हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
गलत तरीके से फ्लॉसिंग करने की आम गलतियां
- फ्लॉस को बहुत जोर से नीचे धकेलना
- मसूड़ों पर तेज रगड़ लगाना
- एक ही फ्लॉस का बार-बार इस्तेमाल करना
- रोजाना फ्लॉसिंग न करना और अचानक ज्यादा करना
- गंदे हाथों से फ्लॉसिंग करना
इन गलतियों से दांतों और मसूड़ों की सेहत बिगड़ सकती है।
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फ्लॉसिंग का सही तरीका
1. सही फ्लॉस का चुनाव करें
मार्केट में वैक्स्ड (मोम लगे) और अनवैक्स्ड फ्लॉस उपलब्ध हैं। अपने दांतों की स्थिति के अनुसार फ्लॉस चुनें। जिनके दांतों के बीच कम जगह होती है, वे पतला फ्लॉस इस्तेमाल करें।
2. पर्याप्त लंबाई लें
लगभग 18 इंच (45 सेंटीमीटर) फ्लॉस लें और उसे दोनों हाथों की उंगलियों पर लपेट लें, बीच में 2-3 इंच हिस्सा काम के लिए छोड़ दें।
3. धीरे-धीरे डालें
फ्लॉस को दांतों के बीच धीरे-धीरे स्लाइड करें। इसे मसूड़ों में जोर से न धकेलें।
4. ‘C’ शेप बनाएं
फ्लॉस को दांत के चारों ओर ‘C’ आकार में मोड़ें और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें। इससे प्लाक अच्छी तरह साफ होता है।
5. हर दांत के लिए साफ हिस्सा इस्तेमाल करें
हर दांत के बीच सफाई के लिए फ्लॉस का नया हिस्सा लें, ताकि बैक्टीरिया न फैलें।
6. दिन में एक बार पर्याप्त
दिन में एक बार, खासकर रात में सोने से पहले फ्लॉसिंग करना काफी है। जरूरत से ज्यादा फ्लॉसिंग से बचें।
कब करें डॉक्टर से संपर्क?
अगर फ्लॉसिंग के दौरान लगातार खून आता है, मसूड़ों में दर्द बना रहता है या सूजन कम नहीं होती, तो दंत चिकित्सक से जरूर संपर्क करें। हो सकता है आपको गम डिजीज या अन्य समस्या हो।
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बच्चों और बुजुर्गों के लिए सलाह
बच्चों को फ्लॉसिंग की आदत धीरे-धीरे सिखाएं और शुरुआत में उनकी मदद करें। बुजुर्ग लोग फ्लॉस पिक या वाटर फ्लॉसर का उपयोग कर सकते हैं, जिससे कम दबाव में सफाई हो सके। फ्लॉसिंग दांतों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसे सही तरीके से करना उतना ही महत्वपूर्ण है। ज्यादा या गलत फ्लॉसिंग मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है और दांतों की संवेदनशीलता बढ़ा सकती है। इसलिए रोजाना एक बार, सही तकनीक से और हल्के हाथों से फ्लॉसिंग करें। स्वस्थ दांत और मजबूत मसूड़े न केवल आपकी मुस्कान को खूबसूरत बनाते हैं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी हैं।
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