सेहत

Dry Eye Disease: स्क्रीन टाइम से बढ़ी ड्राई आई, अब मां के दूध का प्रोटीन करेगा कमाल

Dry Eye Disease, आज के डिजिटल दौर में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। घंटों मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के सामने बैठने की आदत ने “ड्राई आई डिजीज”

Dry Eye Disease : ड्राई आई से राहत दिलाएगा लैक्टोफेरिन? रिसर्च में नई उम्मीद

Dry Eye Disease, आज के डिजिटल दौर में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। घंटों मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के सामने बैठने की आदत ने “ड्राई आई डिजीज” (Dry Eye Disease) को आम समस्या बना दिया है। पहले यह परेशानी उम्रदराज लोगों में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब युवा और बच्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। हाल ही में कुछ शोधों में यह संकेत मिले हैं कि मां के दूध में मौजूद एक खास प्रोटीन इस बीमारी के इलाज में मददगार साबित हो सकता है।

क्या है ड्राई आई डिजीज?

ड्राई आई डिजीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बन पाते या आंसुओं की गुणवत्ता सही नहीं होती। आंसू केवल भावनाओं से जुड़े नहीं होते, बल्कि आंखों को नमी देने, पोषण पहुंचाने और संक्रमण से बचाने का काम भी करते हैं।जब आंसुओं की कमी हो जाती है, तो आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, चुभन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो आंखों की सतह को नुकसान भी पहुंच सकता है।

क्यों बढ़ रही है समस्या?

ड्राई आई के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं:

  • डिजिटल स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल
  • एसी और प्रदूषित वातावरण
  • नींद की कमी
  • कॉन्टैक्ट लेंस का ज्यादा उपयोग
  • हार्मोनल बदलाव
  • कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट

कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेस की वजह से स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है, जिससे आंखों पर दबाव और भी ज्यादा हो गया है।

ड्राई आई के लक्षण

इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • आंखों में सूखापन
  • जलन या चुभन
  • बार-बार पानी आना
  • रोशनी से परेशानी
  • धुंधला दिखाई देना
  • आंखों में भारीपन

कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है।

मां के दूध में मौजूद प्रोटीन से उम्मीद

हालिया रिसर्च में यह सामने आया है कि मां के दूध में मौजूद कुछ विशेष प्रोटीन, जैसे लैक्टोफेरिन (Lactoferrin), आंखों की सूजन और सूखापन कम करने में मदद कर सकते हैं। लैक्टोफेरिन एक ऐसा प्रोटीन है, जो संक्रमण से लड़ने और सूजन कम करने में सहायक माना जाता है।शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रोटीन को आई ड्रॉप या दवा के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे ड्राई आई के मरीजों को राहत मिल सके। हालांकि, अभी इस पर और विस्तृत अध्ययन जारी हैं और इसे व्यापक इलाज के रूप में अपनाने से पहले क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है।

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वर्तमान इलाज क्या है?

फिलहाल ड्राई आई डिजीज के इलाज के लिए डॉक्टर कृत्रिम आंसू (Artificial Tears) आई ड्रॉप्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं या जीवनशैली में बदलाव की सलाह देते हैं। गंभीर मामलों में विशेष आई ड्रॉप्स या थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।लेकिन यदि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले प्रोटीन पर आधारित नई दवा विकसित होती है, तो यह इलाज का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकता है।

बचाव के आसान उपाय

ड्राई आई से बचने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं:

1. 20-20-20 नियम अपनाएं

हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों को आराम मिलता है।

2. पलकें झपकाने की आदत

स्क्रीन देखते समय हम कम पलक झपकाते हैं, जिससे आंखें सूख जाती हैं। नियमित रूप से पलकें झपकाने की कोशिश करें।

3. पर्याप्त पानी पिएं

शरीर में पानी की कमी भी आंखों के सूखापन का कारण बन सकती है।

4. पौष्टिक आहार लें

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन, जैसे अलसी, अखरोट और मछली, आंखों के लिए फायदेमंद हैं।

5. पर्याप्त नींद लें

कम नींद आंखों की सेहत पर सीधा असर डालती है।

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कब डॉक्टर से मिलें?

यदि आंखों में लगातार जलन, दर्द या धुंधलापन बना रहे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने से बचें, क्योंकि गलत आई ड्रॉप समस्या को और बढ़ा सकती है।ड्राई आई डिजीज आज की जीवनशैली से जुड़ी एक तेजी से बढ़ती समस्या है। डिजिटल उपकरणों का बढ़ता उपयोग और बदलती आदतें आंखों की सेहत पर असर डाल रही हैं। ऐसे में मां के दूध में मौजूद प्रोटीन जैसे लैक्टोफेरिन पर हो रहा शोध एक नई उम्मीद जगा रहा है।हालांकि यह अभी शोध के चरण में है, लेकिन भविष्य में यह ड्राई आई के इलाज में क्रांतिकारी साबित हो सकता है। तब तक सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर आंखों की जांच ही इस समस्या से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।

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