सेहत

Blood Clots: पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स आने की वजह क्या है? जानिए कब डॉक्टर से मिलना है जरूरी

Blood Clots, मासिक धर्म (पीरियड्स) महिलाओं के जीवन का एक सामान्य जैविक हिस्सा है। इस दौरान कई महिलाओं को पेट दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और हैवी ब्लीडिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

Blood Clots : पीरियड्स में खून के थक्के क्यों बनते हैं? जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव

Blood Clots, मासिक धर्म (पीरियड्स) महिलाओं के जीवन का एक सामान्य जैविक हिस्सा है। इस दौरान कई महिलाओं को पेट दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और हैवी ब्लीडिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक है पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट्स (खून के थक्के) निकलना। कई बार इसे देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन हर बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता।आइए जानते हैं कि पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स क्यों बनते हैं, कब यह सामान्य माने जाते हैं और किन स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

पीरियड्स में Blood Clots क्या होते हैं?

पीरियड्स के दौरान गर्भाशय (यूटरस) की अंदरूनी परत टूटकर रक्त और टिश्यू के रूप में शरीर से बाहर निकलती है। जब ब्लीडिंग ज्यादा होती है, तो शरीर के प्राकृतिक एंटीकोआगुलेंट्स (खून को पतला रखने वाले तत्व) पूरे खून को तरल नहीं रख पाते, जिससे छोटे या बड़े थक्के बन सकते हैं।ये थक्के लाल, गहरे लाल या भूरे रंग के हो सकते हैं और कई महिलाओं में सामान्य रूप से दिखाई देते हैं।

पीरियड्स में Blood Clots बनने के सामान्य कारण

1. हैवी मेंस्ट्रुअल फ्लो

अगर पीरियड्स के शुरुआती एक-दो दिनों में ब्लीडिंग ज्यादा होती है, तो ब्लड क्लॉट्स बनना सामान्य हो सकता है। तेज ब्लीडिंग के कारण खून जल्दी बाहर निकलता है और थक्के बनने लगते हैं।

2. हार्मोनल बदलाव

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का संतुलन बिगड़ने पर गर्भाशय की परत सामान्य से अधिक मोटी हो सकती है, जिससे पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग और क्लॉट्स बन सकते हैं।

3. गर्भाशय की परत का मोटा होना

अगर यूटरस की लाइनिंग अधिक मोटी हो जाती है, तो उसके टूटने पर ज्यादा मात्रा में रक्त और टिश्यू निकलते हैं, जिससे थक्के बनना संभव है।

कब हो सकते हैं गंभीर कारण?

कुछ मामलों में बार-बार या बड़े ब्लड क्लॉट्स किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं।

1. फाइब्रॉइड्स (Fibroids)

गर्भाशय में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठें हैवी ब्लीडिंग और बड़े ब्लड क्लॉट्स का कारण बन सकती हैं।

2. एंडोमेट्रियोसिस

इस स्थिति में गर्भाशय की परत जैसा टिश्यू दूसरी जगह विकसित होने लगता है, जिससे दर्द, अनियमित पीरियड्स और ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है।

3. एडेनोमायोसिस

इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत मांसपेशियों में बढ़ने लगती है, जिससे लंबे समय तक भारी ब्लीडिंग और क्लॉट्स हो सकते हैं।

4. हार्मोनल असंतुलन या PCOS

कुछ महिलाओं में हार्मोनल समस्याओं के कारण भी पीरियड्स में बदलाव और ब्लड क्लॉट्स देखने को मिल सकते हैं।

Read More: Money Laundering Act: रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप पर ED का शिकंजा, 2 पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है—

  • बार-बार बड़े आकार के ब्लड क्लॉट्स निकलना
  • हर घंटे पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ना
  • पीरियड्स 7 दिनों से ज्यादा चलना
  • अत्यधिक पेट दर्द या चक्कर आना
  • कमजोरी, सांस फूलना या एनीमिया के लक्षण
  • पीरियड्स के बीच में भी असामान्य ब्लीडिंग होना

Blood Clots से बचाव के लिए क्या करें?

संतुलित आहार लें

आयरन, फोलेट और विटामिन C से भरपूर भोजन करें ताकि शरीर में खून की कमी न हो।

पर्याप्त पानी पिएं

हाइड्रेटेड रहने से शरीर की कार्यप्रणाली बेहतर बनी रहती है।

नियमित व्यायाम करें

हल्की वॉक, योग और स्ट्रेचिंग से रक्त संचार बेहतर हो सकता है और पीरियड्स की असुविधा कम हो सकती है।

तनाव कम रखें

तनाव हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए पर्याप्त नींद और रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं।

Read More: Electricity Price Hike: बिजली बिल बढ़ने की तैयारी करें! 500 यूनिट से ज्यादा इस्तेमाल पर लगेगा अतिरिक्त शुल्क

क्या हर Blood Clot चिंता की बात है?

नहीं। छोटे आकार के ब्लड क्लॉट्स, खासकर पीरियड्स के पहले दो दिनों में, अक्सर सामान्य माने जाते हैं। लेकिन अगर क्लॉट्स लगातार बड़े हों, ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो या दर्द असहनीय हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट्स बनना कई महिलाओं में एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, खासकर जब ब्लीडिंग ज्यादा हो। हालांकि, बार-बार बड़े थक्के निकलना, अत्यधिक रक्तस्राव या तेज दर्द किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Back to top button