ईमानदारी की मिसाल: जाने 117 साल की बुजुर्ग गिरिजा बाई के बारे में, जो बनीं एक ईमानदार आयकरदाता

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girija bai

गिरिजा बाई बनी ईमानदार की नई मिसाल


भारत की सबसे बुजुर्ग और वृद्ध महिला गिरिजा बाई तिवारी बनी ईमानदारी की नई मिसाल। गिरिजा बाई मध्य प्रदेश के सागर जिले में रहती है। गिरिजा बाई को मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ आयकर रीजन का सबसे बुजुर्ग और ईमानदार आय कर दाता माना गया है। उनको मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के मुख्य आयकर आयुक्त ए.के चौहान ने आयकर स्थापना दिवस पर सबसे बुजुर्ग और ईमानदार महिला आय कर दाता के तौर पर सम्मानित किया। आयकर आयुक्त ए.के चौहान ने बताया कि  गिरिजा बाई के पैन कार्ड पर दर्ज जानकारी के मुताबिक, वह अभी 117 साल की है। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि आयकर विभाग के दूसरे ऑफिस में इतनी उम्र का कोई करदाता है या नहीं, इस बात की जानकारी उनको नहीं है लेकिन अभी इस बारे में रिकॉर्ड देखें जा रहे है। ए.के चौहान ने बताया कि गिरिजा बाई का नाम ‘बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉ‌र्ड्स’ के लिए भेजा जा रहा है जिसके लिए अभी गिरिजा बाई की उम्र संबंधी अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

गिरिजा बाई ने ठुकरा दी थी लोगों की कर बचाने की सलाह

गिरिजा बाई भारत की सबसे बुजुर्ग आयकरदाता ईमानदार महिला है। उन्होंने देश के विकास में अपनी पूरी भागीदारी निभाई है। कई बार लोगों ने गिरिजा बाई को आयकर बचाने की सलाह दी लेकिन उन्होंने हर बार ये सलाह ठुकरा दी। गिरिजा बाई भारत के स्वतंत्रता सेनानी सिद्धनाथ तिवारी की पत्नी है सिद्धनाथ तिवारी ने अपने जीवन में असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, जंगल सत्याग्रह जैसे आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी दी थी। अभी गिरिजा बाई को उनके पति सिद्धनाथ तिवारी की स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन और उस पर मिलने वाले ब्याज मिलता है उनके इस आय पर लगने वाले आयकर को वो नियमित रूप से जमा करती है।

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आयकर विभाग ने चार महिलाओं को किया सम्‍मानित

मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ आयकर विभाग ने 100 या 100 से ज्यादा उम्र की चार बुजुर्ग महिलाओं को सम्‍मानित किया। उन्होंने 117 साल की गिरिजा बाई के अलावा तीन और महिलाओं को सम्‍मानित किया। मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ आयकर विभाग ने इंदौर की ‘ईश्वरी बाई लुल्ला’ जो की 103 साल की थी उनको उनकी ईमानदारी के लिए सम्मानित किया। उसके बाद उन्होंने बिलासपुर की ‘बीना रक्षित’ जो की 100 साल की थी उनको भी सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने इंदौर की ‘कंचन बाई’ जो की 100 साल की थी उनको भी सम्मानित किया। इन महिलाओं का चयन एक समिति के माध्यम किया गया था।

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