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दीवाली के बाद दियो की महत्ता

दीवाली के बाद दियो की महत्ता


दीवाली का त्यौहार हर किसी ने बहुत ही धूम धाम से मनाया होगा। रौनकें तो बहुत लगी थी। शायद लोग सही मायनों में खुश भी रहे होंगे। पर हर साल की तरह लोगों ने कई दिये जलाए और हर साल कि भाँति उन्ही दियो को टूटने के लिए छोड़ दिया।

देखा जाए तोदीवाली इस लिए मनाई जाती है क्योंकि श्री राम अपना वनवास ख़त्म कर घर वापिस आए थे। पर हम अपना वनवास ख़त्म ही नहीं कर रहे। सच्चे मन से खुश होना तो हमे आता ही नहीं है। मोह माया के इस चक्र में हम ऐसा फंसे है, कि निकलना बहुत मुश्किल है। ख़ुशी से दिया जलाते तो है पर उसकी लौ हमारे तक पहुँचती ही नहीं है।

दीवाली के बाद दियो की महत्ता
जब दिया जलाया ही है तो क्यों ना उसे संभाले भी।

हम सभी को बड़ी खुशी सेदीवाली की शुभकामनाएं देते है पर कभी महसूस ही नहीं करते। जिस दिन हर उस शुभकामना को हम दिल से महसूस कर के आगे बाँटेंगे तभी तो आगे बढ़ेंगे।दीवाली पर जलाये हर उस दिये की कीमत हम तभी समझेंगे। उसकी रौशनी से जब हम अपनी अंधेर ज़िन्दगी में उजाला करेंगे, तभी उस दिये की महत्ता सही मायने में मानी जाएगी।

यह सब मोह माया और क्षण्डभंगूर पल किसी काम के नहीं है। उस ज्ञान के दीये को लेकर आगे बढ़ा जाए तो हमारी मंज़िल हमे साफ़ दिखाई भी देगी और ख़ुशी और हमारी राहे हमे आसानी से मिल भी जाएँगी। अब ज़रूरी ही की हर उस टूटे हुए दिये को जोड़ कर अपनी ज्ञान और खुशियों की रौशनी बढ़ाना।

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