Tiger Shroff attack: टाइगर श्रॉफ के शूटर्स को पकड़ने का पूरा ऑपरेशन, 3 गाड़ियों और 3 राज्यों का क्या है कनेक्शन?
Tiger Shroff attack, बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में तीन आरोपियों को पकड़ने के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें राजस्थान के कोटा से महाराष्ट्र पहुंचाया।
Tiger Shroff attack : टाइगर श्रॉफ के शूटर्स की गिरफ्तारी में पुलिस की रणनीति चर्चा में, जानिए कैसे हुई कार्रवाई
Tiger Shroff attack, बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में तीन आरोपियों को पकड़ने के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें राजस्थान के कोटा से महाराष्ट्र पहुंचाया। इस कार्रवाई में पुलिस को कई राज्यों की मदद लेनी पड़ी। आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए अपनी यात्रा के दौरान बार-बार सफर का तरीका बदला। कभी बाइक, कभी लोकल ट्रेन, फिर कैब और आखिर में लंबी दूरी की ट्रेन से उन्होंने मुंबई से दूर निकलने की कोशिश की। दूसरी ओर, पुलिस सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी और अलग-अलग राज्यों की पुलिस के साथ तालमेल के जरिए उनकी गतिविधियों का पता लगाती रही। 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपियों को कोटा से सड़क मार्ग के जरिए मुंबई लाया गया।

टाइगर श्रॉफ की कार पर कब हुई थी फायरिंग?
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ फुटबॉल खेलने के बाद अपनी कार से लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी पर गोलियां चलाई गईं। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच की जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच को दी गई, जिसने आरोपियों की पहचान करने और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए कई टीमें बनाईं।
बाइक छोड़कर लोकल ट्रेन से भागे आरोपी
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कथित हमलावर घटना के बाद बाइक से फरार हुए थे। इसके बाद उन्होंने अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास बाइक छोड़ दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जानकारी की मदद से उनकी गतिविधियों को जोड़ने की कोशिश की। सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी इसके बाद लोकल ट्रेन से बोरीवली पहुंचे। वहां से उन्होंने सूरत जाने के लिए कैब बुक की। इस तरह आरोपियों ने एक ही साधन पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया, ताकि उनकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो सके।
कैब ड्राइवर की एक कॉल से मिला अहम सुराग
इस मामले में कैब से जुड़ी जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने सूरत जाने के लिए कैब बुक की थी। कैब समय पर नहीं पहुंची तो उनमें से एक आरोपी ने ड्राइवर को फोन करके अपनी लोकेशन बताई। इसके बाद आरोपियों ने फोन बंद कर लिया, लेकिन पुलिस को कैब ड्राइवर का नंबर मिल गया था। जांचकर्ताओं ने ड्राइवर से संपर्क किया और उससे मिली जानकारी के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की। सूरत में सीसीटीवी फुटेज की मदद से भी उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने की दिशा में जांच आगे बढ़ी।

सूरत से ट्रेन पकड़कर पहुंचे कोटा
पुलिस की जांच के मुताबिक, आरोपी सूरत में बस का इंतजार कर रहे थे। जब बस से आगे जाने की योजना सफल नहीं हुई, तो उन्होंने पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करने का फैसला किया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने ट्रेन में उनकी मौजूदगी और कोच से जुड़ी जानकारी जुटाई। इसके बाद राजस्थान पुलिस को अलर्ट किया गया। कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने ट्रेन की तलाशी ली और संदिग्धों की पहचान की। सोमवार, 19 अक्टूबर को तीनों आरोपियों को कोटा में हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस के साथ राजस्थान पुलिस का समन्वय अहम रहा। दिल्ली और गुजरात पुलिस से भी जांच में सहायता मिलने की जानकारी दी गई।
कोटा से मुंबई तक तीन गाड़ियों में सफर
आरोपियों को पकड़ने के बाद उन्हें मुंबई लाना भी पुलिस के लिए एक अलग चुनौती रहा। 21 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस का काफिला कोटा से करीब 900 किलोमीटर की सड़क यात्रा पर निकला। इस दौरान तीन इनोवा क्रिस्टा गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया और काफिले ने अपने रास्ते में कई बार बदलाव किया। आरोपियों को एक गाड़ी से दूसरी गाड़ी में कम से कम चार बार शिफ्ट किया गया। गुजरात के भरूच के पास भी गाड़ियां रुकीं और आरोपियों को दूसरी गाड़ी में बैठाया गया। बाद में महाराष्ट्र नंबर वाली एक अन्य इनोवा भी काफिले में शामिल हुई। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर रुकते हुए आगे का सफर जारी रखा।
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गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र पहुंचा काफिला
कोटा से निकलने के बाद पुलिस का काफिला गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से गुजरा। रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 10:50 बजे काफिला वलसाड और वापी की ओर से महाराष्ट्र में दाखिल हुआ। इसके बाद मुंबई पहुंचने में कई घंटे और लगे। बुधवार, 21 अक्टूबर की सुबह करीब 2:30 बजे पुलिस आरोपियों को लेकर मुंबई पहुंची। वहां सबसे पहले उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां अनिवार्य मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद आरोपियों को मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल के कार्यालय ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की जानी है।
कौन हैं तीनों आरोपी?
इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का, रितिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, रेहान हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला है, जबकि रितिक मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का निवासी है और मुंबई में रह रहा था। फूल सिंह भी हरियाणा से है। पुलिस ने बताया कि तीनों को कोटा पुलिस से अपनी हिरासत में लेने के बाद मुंबई लाया गया। मामले में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय में होना बाकी है।
अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
आरोपियों के मुंबई पहुंचने के बाद जांच का अगला चरण उनकी भूमिका, फायरिंग के पीछे की वजह और संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटाना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हमले की योजना कैसे बनाई गई, हथियार कहां से आए और क्या इस घटना में अन्य लोगों की भी भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से गिरफ्तारी के समय हथियार बरामद नहीं हुए थे। इसलिए इस्तेमाल किए गए हथियारों का पता लगाना भी जांच का अहम हिस्सा है। सोशल मीडिया पर हमले की जिम्मेदारी लेने से जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल इन दावों को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में आरोपियों को मुंबई लाने की पूरी कार्रवाई में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी, कैब ड्राइवर से मिले सुराग और अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच तालमेल की अहम भूमिका रही। आरोपियों ने कथित तौर पर अपने रास्ते और सफर के साधन बदले, लेकिन पुलिस ने उनकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़कर उन्हें कोटा में पकड़ लिया।
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