Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad: राखी बांधने के विज्ञापन में कुत्ता दिखाना पड़ा भारी, कृति सेनन पर भड़के काशी के विद्वान
Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad, बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपने एक नए रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर विवादों में हैं। ज्वेलरी ब्रांड GIVA के लिए बनाए गए इस विज्ञापन में कृति सेनन रक्षाबंधन मनाती नजर आती हैं, लेकिन विज्ञापन की थीम और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं।
Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad : कृति सेनन के Raksha Bandhan विज्ञापन पर विवाद, ‘कुत्ते को राखी’ वाले सीन ने बढ़ाई मुश्किल
Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad, बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपने एक नए रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर विवादों में हैं। ज्वेलरी ब्रांड GIVA के लिए बनाए गए इस विज्ञापन में कृति सेनन रक्षाबंधन मनाती नजर आती हैं, लेकिन विज्ञापन की थीम और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस सीन की हो रही है, जिसमें कृति अपने पालतू कुत्ते को राखी बांधती दिखाई देती हैं। अब इस मामले में काशी के कुछ विद्वानों की आपत्ति भी सामने आई है।

क्या है कृति सेनन के विज्ञापन में?
कृति सेनन का यह विज्ञापन रक्षाबंधन के मौके पर लॉन्च किए गए ज्वेलरी कैंपेन का हिस्सा है। विज्ञापन में अभिनेत्री आधुनिक अंदाज में नजर आती हैं। उन्होंने ऑफ-व्हाइट ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज के साथ केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी है। विज्ञापन का उद्देश्य पारंपरिक रक्षाबंधन को आधुनिक और फैशन-फॉरवर्ड अंदाज में पेश करना नजर आता है। लेकिन विज्ञापन सामने आने के बाद कुछ दर्शकों ने इसकी थीम को लेकर नाराजगी जताई। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन में पारंपरिक रीति-रिवाजों को ज्यादा प्रमुखता मिलनी चाहिए थी।
कुत्ते को राखी बांधने पर क्यों मचा बवाल?
विज्ञापन में एक पालतू कुत्ता भी दिखाई देता है। एक सीन में कृति कुत्ते को राखी बांधती हैं। विज्ञापन में इसके जरिए पालतू जानवर को परिवार के सदस्य के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है। यह आधुनिक परिवारों में पेट्स की भूमिका को दर्शाने वाला क्रिएटिव आइडिया हो सकता है, लेकिन सभी दर्शकों को यह पसंद नहीं आया। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन पारंपरिक रूप से भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा सूत्र से जुड़ा त्योहार है, इसलिए विज्ञापन में कुत्ते को राखी बांधने का दृश्य धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में उचित नहीं है। इसी मुद्दे ने विवाद को और बढ़ा दिया।
काशी के विद्वानों ने क्या आपत्ति जताई?
विवाद के बीच काशी के विद्वानों की ओर से भी विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ विद्वानों ने कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य को सनातन परंपरा और रक्षाबंधन की मान्यताओं के अनुरूप नहीं बताया। उनका तर्क है कि राखी को केवल फैशन या विज्ञापन की रचनात्मकता का हिस्सा बनाने के बजाय उसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी ध्यान में रखना चाहिए। कुछ विद्वानों ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों से जुड़े विज्ञापन बनाते समय ब्रांड्स को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि काशी के सभी विद्वानों की राय एक जैसी है, ऐसा दावा उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
सिर्फ कुत्ता ही नहीं, कृति के आउटफिट पर भी विवाद
विज्ञापन को लेकर विवाद केवल कुत्ते को राखी बांधने तक सीमित नहीं है। कृति के कपड़ों को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उनका ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और पारंपरिक त्योहार के लिए उपयुक्त नहीं था। वहीं कुछ लोगों ने इसे अभिनेत्री की व्यक्तिगत पसंद और विज्ञापन की आधुनिक प्रस्तुति का हिस्सा बताया। कुछ यूजर्स ने विज्ञापन में पूजा की थाली जैसे पारंपरिक तत्वों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। दूसरी तरफ, विज्ञापन की आलोचना करने वालों के जवाब में यह तर्क भी सामने आया कि त्योहारों को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करना अपने आप में गलत नहीं है।
कंगना रनौत ने भी साधा निशाना
इस विवाद में बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की प्रतिक्रिया ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कृति सेनन के विज्ञापन के स्टाइलिंग और प्रस्तुति पर सवाल उठाया। कंगना ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन को लेकर तीखी टिप्पणी की और रक्षाबंधन के मौके पर इस तरह की पोशाक को लेकर सवाल किया। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद सोशल मीडिया पर और ज्यादा चर्चा में आ गया। इसके बाद बहस केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सवाल भी उठने लगा कि भारतीय त्योहारों को आधुनिक विज्ञापन में किस तरह पेश किया जाना चाहिए और रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए।
कृति सेनन ने भी दिया जवाब
अब इस पूरे विवाद पर कृति सेनन की प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है। 25 अगस्त को अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर कपड़ों को लेकर होने वाली आलोचना पर सवाल उठाया। उन्होंने महिलाओं के पहनावे को लेकर समाज की लगातार टिप्पणियों पर सवाल करते हुए कहा कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संस्कृति और परंपरा केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के भीतर होती है। कृति की इस प्रतिक्रिया को उनके समर्थकों ने महिला की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता के समर्थन के तौर पर देखा है, जबकि आलोचकों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में संदर्भ और संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी जरूरी है।
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सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटे लोग
कृति सेनन का विज्ञापन सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाओं का कारण बना हुआ है। एक वर्ग इसे पुराने त्योहारों को नए और आधुनिक अंदाज में पेश करने की कोशिश मान रहा है। इस वर्ग के अनुसार आज के समय में पालतू जानवर भी परिवार का हिस्सा होते हैं और विज्ञापन इसी भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता है।वहीं दूसरे वर्ग का कहना है कि रक्षाबंधन की धार्मिक और पारंपरिक पहचान को देखते हुए विज्ञापन में ज्यादा सावधानी बरती जानी चाहिए थी। कुछ लोगों ने इसे भारतीय परंपराओं का मजाक बताया, जबकि कुछ ने केवल विज्ञापन की क्रिएटिव दिशा पर सवाल उठाए।
विज्ञापन ने छेड़ दी बड़ी बहस
इस विवाद ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है क्या पारंपरिक त्योहारों को आधुनिक विज्ञापन के जरिए नए रूप में पेश किया जा सकता है? विज्ञापन जगत अक्सर त्योहारों को नए दृष्टिकोण और आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ने की कोशिश करता है। लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल के दौरान दर्शकों की भावनाओं का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।कृति सेनन के विज्ञापन में एक तरफ पालतू जानवर को परिवार का हिस्सा दिखाने की कोशिश नजर आती है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक रक्षाबंधन की रस्म को नए अंदाज में पेश करने से विवाद पैदा हुआ है।
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आगे क्या?
फिलहाल कृति सेनन का विज्ञापन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। काशी के कुछ विद्वानों की आपत्ति, सोशल मीडिया यूजर्स की आलोचना, कंगना रनौत की टिप्पणी और अब कृति सेनन की प्रतिक्रिया ने विवाद को और बड़ा कर दिया है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भारतीय त्योहारों से जुड़े विज्ञापन केवल मार्केटिंग कैंपेन नहीं रहते, बल्कि उनके साथ संस्कृति, परंपरा और धार्मिक भावनाओं का सवाल भी जुड़ जाता है।Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad Controversy में विवाद के मुख्य केंद्र कृति का आधुनिक पहनावा और कुत्ते को राखी बांधने वाला दृश्य हैं। जहां विज्ञापन को कुछ लोगों ने आधुनिक परिवार और पालतू जानवरों के भावनात्मक जुड़ाव को दिखाने वाला क्रिएटिव प्रयास माना, वहीं काशी के कुछ विद्वानों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे रक्षाबंधन की परंपरा के विपरीत बताया।
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