Deepika Padukone : दीपिका पादुकोण का बड़ा खुलासा, ‘ओम शांति ओम’ के बाद झेली थी ट्रोलिंग की मार
Deepika Padukone, आज बॉलीवुड की सबसे सफल और प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में से एक हैं, लेकिन उनकी ये यात्रा इतनी आसान नहीं थी। उन्होंने 2007 में फराह खान की फिल्म "ओम शांति ओम" से शाहरुख खान के साथ डेब्यू किया था।
Deepika Padukone : दीपिका पादुकोण का 17 साल पुराना दर्द, ‘ओम शांति ओम’ के बाद झेलनी पड़ी थी आलोचनाएं
Deepika Padukone, आज बॉलीवुड की सबसे सफल और प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में से एक हैं, लेकिन उनकी ये यात्रा इतनी आसान नहीं थी। उन्होंने 2007 में फराह खान की फिल्म “ओम शांति ओम” से शाहरुख खान के साथ डेब्यू किया था। यह फिल्म बहुत बड़ी हिट रही, और दीपिका को एक नई स्टार के रूप में पहचान मिली। हालांकि, इस सफल शुरुआत के बावजूद दीपिका को उस समय आलोचना और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा, जिसने उनके आत्मविश्वास को हिला दिया। 17 साल बाद, दीपिका ने अपने शुरुआती करियर के संघर्षों और आलोचनाओं पर खुलकर बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन ट्रोल्स का सामना करना पड़ा और इस दर्द से वे कैसे उबरीं।
दीपिका का फिल्मी सफर
दीपिका पादुकोण ने अपने करियर की शुरुआत एक मॉडल के रूप में की थी और मॉडलिंग में उन्हें काफी सफलता मिली थी। “ओम शांति ओम” में उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई, जिसमें उन्होंने शांति प्रिय और सैंडी जैसे किरदार निभाए। फिल्म की बड़ी सफलता के बावजूद, दीपिका को उनके अभिनय कौशल के लिए ट्रोल किया गया। कई आलोचकों और दर्शकों ने कहा कि उनका अभिनय “बेजान” और “अप्रभावी” था। सोशल मीडिया पर भी उनके लुक्स और डायलॉग डिलीवरी का मजाक उड़ाया गया, जिससे वे काफी आहत हुईं।
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‘लेडी सिंघम’ का दर्द छलका
हाल ही में दीपिका पादुकोण ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि “ओम शांति ओम” के बाद उन्हें जिस तरह से ट्रोल किया गया था, वह उनके लिए बहुत कठिन समय था। उन्होंने बताया कि लोग उन्हें कहते थे कि वह सिर्फ अपनी खूबसूरती की वजह से इंडस्ट्री में हैं और उनमें अभिनय की क्षमता नहीं है। उन्होंने इस अनुभव को अपने जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण समयों में से एक बताया, जब उन्होंने खुद को साबित करने के लिए कई प्रयास किए।
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ट्रोलिंग का असर
दीपिका ने अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए कहा जब मेरी पहली फिल्म ओम शांति ओम रिलीज हुई, तो कुछ बुरे रिव्यूज भी आए, लेकिन मुझे खास तौर पर यह एक बुरा रिव्यू याद है जिसने मुझे खुद पर काम करने के लिए प्रेरित किया। इसने मेरे एक्सेंट, डिक्शन, टैलेंट और काबिलियत के बारे में बताया। नेगेटिविटी कभी-कभी एक अच्छी चीज होती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किस तरह से लेते हैं। बड़ी तस्वीर यह है कि आप उस आलोचना के साथ क्या करते हैं, आप इसे पॉजिटिव तरीके से कैसे देखते हैं।
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