मनोरंजन

Charak Movie Review: आस्था, तंत्र और अंधविश्वास की सिहराने वाली कहानी

Charak Movie Review: सुदीप्तो सेन की नई फिल्म “चरक” आस्था, तंत्र और अंधविश्वास के खतरनाक सच को सामने लाती है। जानें फिल्म की कहानी, अभिनय, निर्देशन और क्यों यह फिल्म दर्शकों को झकझोर देती है।

Charak Review: अंधविश्वास और तांत्रिक प्रथाओं पर बनी सुदीप्तो सेन की रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्म

Charak Movie Review: बॉक्स ऑफिस के ट्रेंड और मसाला फिल्मों के दौर में सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाना किसी जोखिम से कम नहीं होता। ऐसे समय में फिल्म निर्माता सुदीप्तो सेन की तारीफ करनी होगी, जो हमेशा ऐसे विषयों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं जो समाज की सच्चाई को सामने लाती हैं।सुदीप्तो सेन की पिछली फिल्म “द केरल स्टोरी” ने बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी और दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स से भी काफी सराहना मिली थी। हालांकि इस तरह के विषयों पर फिल्म बनाने की वजह से उन्हें कई बार आलोचना और धमकियों का भी सामना करना पड़ा है। अब उनकी नई फिल्म “चरक” भी एक ऐसे विषय पर आधारित है जो समाज में मौजूद अंधविश्वास और तांत्रिक प्रथाओं की सच्चाई को दिखाने की कोशिश करती है।

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी चरक उत्सव से जुड़ी है, जो करीब एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत के कई राज्यों में मनाया जाता रहा है। पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड के साथ-साथ दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी यह उत्सव आयोजित होता है। हर साल लगभग 15 मार्च से 15 मई के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस उत्सव को मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है, जो तांत्रिक साधनाओं, अघोरी प्रथाओं और अंधविश्वास से जुड़ा हुआ है। फिल्म इसी अंधेरे पहलू को सामने लाने की कोशिश करती है।

Read More: Tanvi The Great On OTT: Anupam Kher की ‘तन्वी द ग्रेट’ OTT पर आ रही है, नोट कर लें रिलीज डेट और प्लेटफॉर्म

स्टोरी प्लॉट

फिल्म की कहानी एक छोटे से गांव में सेट की गई है, जो चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के लोग बेहद गरीब हैं, लेकिन इसके बावजूद शाम को शराब पीना और ताश खेलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। गांव में चरक उत्सव की तैयारियां चल रही हैं और दूर-दराज से कई अघोरी और तांत्रिक वहां डेरा डाले हुए हैं। इसी गांव के छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले दो दोस्त कहानी के अहम किरदार बनते हैं।

दूसरी तरफ गांव की पुलिस चौकी में तैनात एक इंस्पेक्टर और उसकी पत्नी भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इंस्पेक्टर की पत्नी एक लेखिका है और शादी के 12 साल बाद भी उनके कोई संतान नहीं है। इंस्पेक्टर के मन में भी चरक उत्सव के दौरान पिता बनने की इच्छा कहीं न कहीं पल रही होती है। इसी बीच गांव के दो बच्चों का अचानक अपहरण हो जाता है और इसके बाद जो घटनाएं सामने आती हैं, वे पूरे गांव को हिला कर रख देती हैं।

अभिनय और निर्देशन

फिल्म में अंजलि पाटिल और साहिदुर रहमान मुख्य भूमिकाओं में नजर आते हैं और दोनों ने अपने किरदार को बेहद प्रभावशाली तरीके से निभाया है। अन्य कलाकारों में सुब्रत दत्ता, नवनीश नील, शशि भूषण और शंखदीप ने भी अपने किरदारों को जीवंत बना दिया है। निर्देशक शीलादित्य मौलिक ने फिल्म को बेहद वास्तविक अंदाज में पेश किया है। खास बात यह है कि फिल्म को किसी स्टूडियो सेट पर नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के एक असली गांव में शूट किया गया है, जिससे कहानी और भी ज्यादा वास्तविक लगती है।

सेंसर और विवाद

फिल्म के विषय को देखते हुए इसे सेंसर बोर्ड से क्लियर करवाना भी आसान नहीं था। फिल्म के मेकर्स को अपनी रिसर्च से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड सेंसर कमेटी के सामने पेश करने पड़े। इसके बाद फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की अनुमति मिली।

ओवरऑल रिव्यू

“चरक” सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि समाज में मौजूद अंधविश्वास और कुप्रथाओं पर सवाल उठाने की कोशिश है। फिल्म का क्लाइमैक्स दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि अंधविश्वास केवल अनपढ़ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी कभी-कभी इसके जाल में फंस जाते हैं। अगर आप सिनेमा में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की सच्चाई देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Back to top button