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AR Rahman के बयान पर गरमाई बहस, क्या हिंदी सिनेमा को धर्म के चश्मे से देखा जा सकता है?

AR Rahman के हालिया बयान ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। जहां उन्होंने इंडस्ट्री में सांप्रदायिक सोच की बात कही, वहीं गायक Shaan समेत कई कलाकारों ने इससे असहमति जताई।

AR Rahman के बयान पर मचा बवाल 

AR Rahman: ऑस्कर विजेता संगीतकार AR Rahman एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका संगीत नहीं, बल्कि उनका एक बयान है। हाल ही में उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे एंटरटेनमेंट जगत में बहस छेड़ दी है। उनके शब्दों को लेकर कई तरह की व्याख्याएं हो रही हैं और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। AR Rahman ने यह संकेत दिया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें हिंदी सिनेमा में पहले जैसा काम नहीं मिला और इसके पीछे उन्होंने इंडस्ट्री में एक खास तरह की सोच के होने की बात कही। उनके इस बयान को कुछ लोगों ने गंभीर आरोप के तौर पर देखा, तो कुछ ने इसे एक कलाकार का निजी अनुभव बताया।

AR Rahman का नजरिया

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AR Rahman का कहना था कि उन्होंने जो महसूस किया, वह उनका व्यक्तिगत अनुभव है। उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, बल्कि यह कहा कि उन्होंने इंडस्ट्री के बदलते माहौल को महसूस किया है। उनके अनुसार, पहले जहां संगीत और प्रतिभा को प्राथमिकता मिलती थी, वहीं अब कई तरह के बाहरी कारण फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।  उनका यह बयान कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि हिंदी सिनेमा को हमेशा विविधता और समावेशिता के लिए जाना जाता रहा है।

Shaan की प्रतिक्रिया: “संगीत में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं”

गायक Shaan ने AR Rahman के बयान पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। Shaan साफ कहा कि संगीत और कला के क्षेत्र में धर्म या समुदाय का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। Shaan के मुताबिक, इंडस्ट्री में काम सिर्फ और सिर्फ टैलेंट, अनुभव और डिमांड के आधार पर मिलता है। Shaan कहा कि किसी कलाकार को कम या ज्यादा काम मिलना कई व्यावसायिक और रचनात्मक कारणों पर निर्भर करता है, इसे सांप्रदायिक नजरिए से देखना सही नहीं है। Shaan यह बात इंडस्ट्री के कई लोगों को तार्किक और संतुलित लगी।

सोशल मीडिया पर दो धड़ों में बंटी राय

AR Rahman के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आई।  एक वर्ग का मानना है कि एक बड़े कलाकार के अनुभव को हल्के में नहीं लेना चाहिए और इंडस्ट्री को आत्ममंथन करना चाहिए।  दूसरा वर्ग कहता है कि हिंदी सिनेमा हमेशा से हर धर्म, भाषा और संस्कृति के कलाकारों को बराबरी का मंच देता आया है, इसलिए ऐसे आरोप पूरे इंडस्ट्री पर सवाल खड़े करते हैं।

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क्या यह रचनात्मक बदलाव का असर है?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी सिनेमा में संगीत का ट्रेंड बदल चुका है।
अब:

  • रीमिक्स और शॉर्ट फॉर्म म्यूजिक का दौर है
  • बड़े म्यूजिक डायरेक्टर्स की जगह टीम वर्क ज्यादा हो गया है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने काम करने का तरीका बदल दिया है

ऐसे में किसी कलाकार को कम मौके मिलना जरूरी नहीं कि किसी सोच या भेदभाव का नतीजा हो, बल्कि यह इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का असर भी हो सकता है।

कला और धर्म को अलग रखने की जरूरत

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इस पूरे विवाद ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है – क्या कला को धर्म से जोड़कर देखना सही है?
अधिकतर कलाकारों का मानना है कि संगीत, सिनेमा और साहित्य जैसी विधाएं सीमाओं से परे होती हैं। इन्हें किसी भी धार्मिक या राजनीतिक नजरिए में बांधना इनके मूल स्वभाव के खिलाफ है।

AR Rahman का कद और उनकी विरासत

AR Rahman सिर्फ एक संगीतकार नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की वैश्विक पहचान हैं। उन्होंने अपनी धुनों से दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया है। ऐसे में उनके हर बयान को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके शब्दों को संतुलित और व्यापक संदर्भ में समझा जाए।

निष्कर्ष

AR Rahman के बयान ने हिंदी सिनेमा और संगीत इंडस्ट्री को आत्ममंथन का मौका जरूर दिया है। जहां एक तरफ Shaan जैसे कलाकारों ने यह स्पष्ट किया कि संगीत में किसी तरह की सांप्रदायिक सोच की कोई जगह नहीं है, वहीं दूसरी ओर यह बहस यह भी दिखाती है कि इंडस्ट्री में बदलाव और कलाकारों के अनुभवों को समझना कितना जरूरी है। यह मामला साबित करता है कि कला का असली धर्म केवल रचनात्मकता, सच्चाई और इंसानियत है।

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