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क्या सच में आज के दौर में हम सोलह ऋंगार को महत्व नहीं देते

क्या सच में आज के दौर में हम सोलह ऋंगार को महत्व नहीं देते


क्या सच में आज के दौर में हम सोलह ऋंगार को महत्व नहीं देते:- घर में शादी का नाम सुनते है सबसे पहले दिमाम में अगर कोई बात आती है तो वह तैयारी की। घर के राशन से लेकर दुल्हा दुल्हन के जोड़े तक की तैयारी की टेंशन शुरु। यह टेंशन तब तक खत्म नही होती जब तक की पूरी शादी न हो जाएं। वैसे तो शादी में सारी रस्में मायने रखती है लेकिन बढ़ते मॉर्डन युग में लोगों की व्यस्तता और समय की कमी की कारण बहुत रस्में छुट जाती है या हम स्वयं ही छोड़ देते है।

लेकिन अगर शादी हो और मैकप की बात न हो ऐसा हो नहीं सकता। लड़कियां तो पार्लर जा जा कर अपने जूते घिस लेती है। लेकिन आपको पता है इस ऋंगार का भी हमारे जीवन में एक अलग ही महत्व है। शादी में दुल्हन सोहल ऋंगार न करें तो मजा ही नहीं आता। लेकिन आजकल की शादियों में तो यह सब कहावतों भर में ही रह गया है। तो चलिए आज आपको शादी के सोलह ऋंगार के बारे में बताते हैं।

स्नान– शादी में  प्रथम चरण स्नान से प्रारंभ होता है। शस्त्रानुसार स्नान के भी कई प्रकार होते है। जिसे शादी के समय इस्तेमाल किया जाता है।

वस्त्र- घर में शादी हो और वस्त्र की बात न हो ऐसा हो नहीं सकता । शादी के हिसाब से अगर वस्त्र न हो तो सौदंर्य का तो मतलब ही नहीं रहता है।

हार– शादी में हार पहनने के पीछे स्वास्थ्य को भी फायदा होता है। हमारे गले के नजदीकी क्षेत्र में प्रेशर बिंदु होते है जिनसे शरीर के कई हिस्सों को लाभ प्राप्त होता है। जिसके कारण इसे सौदंर्य का दर्जा दिया गया है।

 क्या सच में आज के दौर में हम सोलह ऋंगार को महत्व नहीं देते
दुल्हन का सोलह ऋंगार

अंजन– आंखों को सुदंर बनाने के लिए अंजन(काजल) लगाया जाता है। जिससे आंखो को सुरक्षा प्राप्त होती है इसलिए इसे सोलह ऋंगार में शामिल किया गया है।

अधरंजन- होठों या अधरों की सुदंरता को बढ़ाने के लिए उन्हें कई रंगों से रंगा जाता है। प्राचीन काल में फूलों के रसों द्वारा यह कार्य संपन्न किया जाता था।

नथ या नथनी– नाक की शोभा को नाक में छेदकर नाक में नथनी डाली जाती है। यह सौभाग्य की निशानी मानी जाती है।

केश सज्जा- लड़कियों की शादी में उसके केशों महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इससे उसकी शोभा और ऋंगार और बढ़ जाता है। केशों को तरह-तरह से सजाना भी सोलह ऋंगार का एक हिस्सा है।

कंचुकी– प्राचीन काल में स्त्रियों में अधिकतर दो तरह के वस्त्र पहनने की प्रथा थी। अधोवस्त्र तथा उत्तरीय। अधोवस्त्र के साथ कंचुकी को पहना जाता है।

उबटन– उबटन से आपकी त्वचा और सुंदर और कोमल हो जाती है। प्राचीन कालों में विभिन्न प्रकार के फूलों और जड़ी बूटियों से तैयार विशेष  प्रकार का उबटन का प्रयोग किया जाता था। जिससे आपकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।

पैंजनियां(पायल)- पैरों की शोभा को बढ़ने के लिए पैंजनियां का प्रयोग किया जाता है। ताकि जब भी नई बहू घर में चले फिर तो पता चले कि नई बहू आ रही है।

इत्र– सोलह ऋंगार में इत्र का प्रयोगा आर्कषित करने के लिए किया जाता है। प्राचीन काल में फूलों के  अर्क का प्रयोग किया जाता था।

कंगन– कलाईयों की खूबसुरती को चार चांद लगने के लिए कंगनों का प्रयोग करते है। इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

कमरबंध– कमर का सौंदर्यवान बनाने के लिए कमरबंध का प्रयोग किया जाता है। इसे सोने चांदी की साथ हीरे मोती जड़कर विभिन्न आकारों में बनाया जाता है।

चरणराग– इसे हाथों और पैरों में लगाया जाता है और उम्मीद की जाती है कि मेंहदी जितना रंग लगाएंगे हमारी जिदंगी भी इतने ही रंगों से भरी होगी।

दर्पण- सारी ऋंगार को देखने के लिए दर्पण को भी सोलह ऋंगार में रखा गया है जिससे कि हम अपनी खूबसूरती को देख पाएं।

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