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US Election Results: सुहास और पिया ने रचा इतिहास, विवेक रामास्वामी को मिली शिकस्त; जानें पूरा चुनावी हाल

US Election Results, अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनाव यानी मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का प्रदर्शन चर्चा में है।

US Election Results : अमेरिकी चुनाव में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों का रिपोर्ट कार्ड, किसे मिली जीत और किसे हार?

US Election Results, अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनाव यानी मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का प्रदर्शन चर्चा में है। इस बार चुनावी मैदान में कई ऐसे चेहरे थे, जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी के सुहास सुब्रमण्यम, पिया डांडिया और अरुणा मिलर ने जीत दर्ज की है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख भारतीय-अमेरिकी चेहरे विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर पद की दौड़ में हार का सामना करना पड़ा। इस तरह भारतीय मूल के उम्मीदवारों के लिए चुनाव के नतीजे मिले-जुले रहे। किसी ने अमेरिकी संसद में अपनी जगह बरकरार रखी, तो किसी ने पहली बार संसद तक पहुंचकर इतिहास बनाया।

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सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया में दोहराई जीत

भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ और निर्दलीय उम्मीदवार अहसेन मुजीब मलिक को पीछे छोड़ दिया। चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, सुहास को करीब 63 प्रतिशत वोट मिले, जबकि बेकविथ को लगभग 35 प्रतिशत वोट हासिल हुए।इस जीत के साथ सुहास अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करेंगे। इससे पहले 2024 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की थी। वह वर्जीनिया के 10वें डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी सांसद बने थे।सुहास का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने वर्जीनिया की स्टेट सीनेट और हाउस ऑफ डेलीगेट्स में काम किया है। इसके अलावा वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी पॉलिसी एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, महंगाई, रोजगार और भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाया।

पिया डांडिया ने फ्लोरिडा में रचा इतिहास

इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा पिया डांडिया की जीत की भी हो रही है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया। चुनावी नतीजों के अनुसार, पिया को करीब 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को लगभग 48.1 प्रतिशत वोट हासिल हुए।इस जीत के साथ पिया फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं। उनकी जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने एक कड़े मुकाबले में अपनी जगह बनाई है।पिया का परिवार भारत से अमेरिका जाकर बसा था। उनका पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। वह न्यूयॉर्क के हार्लेम इलाके में एक हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल भी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने व्हाइट हाउस फेलोशिप के तहत काम किया और टेक्नोलॉजी कंपनी Apple से भी जुड़ी रहीं। चुनाव प्रचार में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आम परिवारों की आर्थिक स्थिति उनके प्रमुख मुद्दे रहे।

अरुणा मिलर को भी मिली जीत

भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने भी इस चुनाव में अपनी जीत दर्ज की है। वह मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं और डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के साथ चुनावी मैदान में थीं। दोनों ने दोबारा जीत हासिल की है। इसके साथ अरुणा मिलर मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर अपना कार्यकाल जारी रखेंगी।अरुणा मिलर का जन्म भारत में हुआ था। वह सात साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गई थीं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सिविल इंजीनियर के रूप में काम किया। वह मैरीलैंड के हाउस ऑफ डेलीगेट्स की सदस्य भी रह चुकी हैं। साल 2022 में उन्होंने मैरीलैंड की पहली भारतीय-अमेरिकी और पहली एशियाई-अमेरिकी लेफ्टिनेंट गवर्नर बनकर इतिहास रचा था। इस बार की जीत ने राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका को आगे बढ़ाया है।

विवेक रामास्वामी को ओहायो में मिली हार

भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी के लिए यह चुनाव निराशाजनक रहा। उन्होंने ओहायो के गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से था। चुनावी नतीजों में एमी एक्टन ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।विवेक रामास्वामी अमेरिका के चर्चित भारतीय-अमेरिकी नेताओं में शामिल हैं। उनका जन्म ओहायो के सिनसिनाटी में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बाद में येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की। राजनीति में आने से पहले वह कारोबारी और बायोटेक्नोलॉजी उद्यमी के रूप में काम कर चुके हैं।साल 2024 में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए भी अपनी दावेदारी पेश की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना अभियान समाप्त कर डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था। 2026 में ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव उनके राजनीतिक करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मुकाबला था, लेकिन इस बार उन्हें जीत नहीं मिल सकी।

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अन्य भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों पर भी नजर

इन प्रमुख चेहरों के अलावा भारतीय मूल के कई अन्य नेता भी अमेरिकी चुनाव में शामिल थे। इनमें रो खन्ना, अमी बेरा और प्रमिला जयपाल जैसे मौजूदा सांसदों के नाम शामिल हैं, जो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे थे। इसके अलावा मैसाचुसेट्स में निर्दलीय उम्मीदवार शिवा अय्यादुरई भी चुनावी मैदान में थे।शिवा अय्यादुरई को सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एड मार्की से चुनौती मिली। वहीं जॉर्जिया के राज्य विधायी चुनाव में ज्योत सिंह और नॉर्थ कैरोलिना में महेश गनोर्कर जैसे भारतीय मूल के उम्मीदवार भी मैदान में थे। इन सभी उम्मीदवारों के प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग स्तर पर नतीजे सामने आए।

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भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए क्यों अहम हैं ये नतीजे?

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी लगातार चर्चा का विषय रही है। शिक्षा, तकनीक, कारोबार और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में पहचान बनाने के बाद अब भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई सदस्य राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।सुहास सुब्रमण्यम की दोबारा जीत, अरुणा मिलर की वापसी और पिया डांडिया का पहली बार प्रतिनिधि सभा तक पहुंचना इस राजनीतिक भागीदारी के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। दूसरी ओर विवेक रामास्वामी की हार यह दिखाती है कि भारतीय मूल के उम्मीदवारों को भी अमेरिकी चुनावों में दूसरे नेताओं की तरह कड़े राजनीतिक मुकाबले का सामना करना पड़ता है।कुल मिलाकर 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतवंशियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। तीन प्रमुख डेमोक्रेटिक चेहरों को सफलता मिली, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को हार का सामना करना पड़ा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी संसद और राज्य सरकारों में भारतीय मूल के ये नेता अपने समुदाय के साथ-साथ व्यापक अमेरिकी मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर किस तरह काम करते हैं।

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