Baba Sodal Mela 2026 : खेत्री पूजन से लेकर सोढल सरोवर तक, जानें मेले की खास रस्में
Baba Sodal Mela 2026, पंजाब के जालंधर में आज यानी 25 सितंबर 2026 से प्रसिद्ध श्री सिद्ध बाबा सोढल मेला शुरू हो गया है। हर साल भादों महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी के अवसर पर लगने वाला यह मेला पंजाब के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा सोढल जी के दरबार में माथा टेकने और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। जालंधर जिला प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं।
आस्था का बड़ा केंद्र है बाबा सोढल मंदिर
बाबा सोढल मंदिर जालंधर के सोढल रोड पर स्थित है और लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं कई पीढ़ियों से चली आ रही हैं। जालंधर जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, बाबा सोढल मेले का आयोजन हर साल भादों महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है और इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। 2026 में यह पवित्र अवसर 25 सितंबर, शुक्रवार को पड़ रहा है। बाबा सोढल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक मेले के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था रहती है।
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बाबा सोढल से जुड़ी क्या है मान्यता?
बाबा सोढल के जन्म और उनके जीवन से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार, बाबा सोढल का जन्म जालंधर के चड्ढा परिवार में हुआ था। बचपन में वह अपनी मां के साथ तालाब के पास जाते थे। एक दिन उनकी मां ने नाराज होकर उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा। लोककथा के अनुसार, बालक सोढल ने अपनी मां से उनके शब्द दोहराने को कहा और इसके बाद वह तालाब में चले गए।इसके बाद उनके दिव्य रूप में प्रकट होने और नाग देवता से जुड़ी मान्यता भी प्रचलित हुई। इसी वजह से बाबा सोढल की पूजा और मेले में सर्प या नाग से जुड़े प्रतीकों का भी धार्मिक महत्व माना जाता है। यह कथा लोकविश्वास का हिस्सा है और अलग-अलग समुदायों में इसके अलग-अलग विवरण मिलते हैं।
सोढल सरोवर का भी है विशेष महत्व
बाबा सोढल मंदिर के पास स्थित सोढल सरोवर इस धार्मिक स्थल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालु यहां आकर सरोवर के दर्शन करते हैं और बाबा सोढल के दरबार में पूजा-अर्चना करते हैं। कई भक्त धार्मिक आस्था के कारण सरोवर के जल से जुड़ी परंपराओं का पालन भी करते हैं।Incredible India के अनुसार, सोढल मंदिर और उसके पवित्र सरोवर का धार्मिक महत्व है और मेले के दौरान यहां का वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय हो जाता है। मंदिर परिसर में फूलों, झंडियों और सजावट के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
पूरी होती हैं मन्नतें, ऐसी है श्रद्धालुओं की आस्था
बाबा सोढल मेले से जुड़ी सबसे बड़ी मान्यता मनोकामना पूरी होने को लेकर है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा सोढल के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने और मन्नत मांगने से उनकी इच्छा पूरी होती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ यहां पहुंचते हैं।खासकर परिवार की सुख-समृद्धि, बच्चों की खुशहाली और स्वास्थ्य से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए श्रद्धालु बाबा सोढल का आशीर्वाद लेते हैं। हालांकि, मन्नत पूरी होने की यह बात धार्मिक आस्था और लोकविश्वास का हिस्सा है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
सात दिनों तक भक्तिमय रहता है माहौल
बाबा सोढल मेला केवल एक दिन का आयोजन नहीं माना जाता। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मेले से जुड़ा धार्मिक उत्सव लगभग सात दिनों तक चलता है। इस दौरान कीर्तन, भजन, धार्मिक आयोजन, शोभायात्रा और लंगर जैसी गतिविधियां होती हैं। मेले के मुख्य दिन मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई देती है। अलग-अलग शहरों और राज्यों से लोग जालंधर पहुंचते हैं। मेले का धार्मिक पक्ष जहां श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, वहीं यहां लगने वाले बाजार और अन्य गतिविधियां इसे सांस्कृतिक आयोजन का रूप भी देती हैं।
खेत्री पूजन और पारंपरिक रस्में
बाबा सोढल मेले से जुड़ी कई पारंपरिक रस्में भी महत्वपूर्ण हैं। जालंधर जिला प्रशासन के पोर्टल के अनुसार, चड्ढा परिवार से जुड़ी कुछ पारंपरिक प्रक्रियाएं मेले के दौरान निभाई जाती हैं। इनमें खेत्री पूजन जैसी परंपराएं भी शामिल हैं। इन रस्मों का संबंध परिवार की सुख-समृद्धि और बाबा सोढल के प्रति श्रद्धा से जोड़ा जाता है। इसके अलावा बाबा सोढल को प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है। अलग-अलग परिवार अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा और प्रसाद की रस्में पूरी करते हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम
इस साल मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसे देखते हुए जालंधर पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। मंदिर के आसपास भीड़ नियंत्रण, निगरानी और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।मंदिर के सामने कंट्रोल रूम भी बनाया गया है और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ में सावधानी बरतने और पुलिस तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
जालंधर में स्थानीय अवकाश भी घोषित
बाबा सोढल मेले के महत्व को देखते हुए जालंधर जिले में 25 सितंबर को स्थानीय सरकारी अवकाश घोषित किया गया है। जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार पंजाब सरकार के अधीन आने वाले कार्यालयों, बोर्ड, निगम और शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह छुट्टी लागू है। इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबा सोढल मेला जालंधर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी जानकारी
बाबा सोढल मंदिर सामान्य दिनों में सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुलता है। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक सोढल मेले के सप्ताह में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़ को देखते हुए पर्याप्त समय लेकर पहुंचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।कुल मिलाकर, Baba Sodal Mela 2026 जालंधर में आस्था, परंपरा और संस्कृति का बड़ा संगम बनकर सामने आया है। बाबा सोढल से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताएं, सोढल सरोवर, धार्मिक रस्में, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस मेले को खास बनाती है। आज से शुरू हुआ यह आयोजन आने वाले दिनों में जालंधर को पूरी तरह भक्तिमय माहौल में रंग देगा।
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